प्रदूषण जघन्य अपराध

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Edited By Amrit Vichar
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एनजीटी यानी राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण ने कहा है कि प्रदूषण से होने वाले नुकसान अन्य जघन्य अपराधों से होने वाले नुकसान से कम नहीं हैं। जाहिर है कि एनजीटी का यह कथन प्रदूषण फैलाने वाले कारकों को भी जघन्य अपराध की श्रेणी में मानने वाला है। इसका समर्थन किया जाना चाहिए, इसीलिए भी क्योंकि प्रदूषण …

एनजीटी यानी राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण ने कहा है कि प्रदूषण से होने वाले नुकसान अन्य जघन्य अपराधों से होने वाले नुकसान से कम नहीं हैं। जाहिर है कि एनजीटी का यह कथन प्रदूषण फैलाने वाले कारकों को भी जघन्य अपराध की श्रेणी में मानने वाला है। इसका समर्थन किया जाना चाहिए, इसीलिए भी क्योंकि प्रदूषण देश-दुनिया में गहराता गंभीर संकट है।

उत्तराखंड में रविवार को ग्लेशियर टूटने की आपदा भी ग्लोबल वार्मिंग का कारण है और इसके लिए प्रदूषण ही जिम्मेदार है। पूर्व में भी हम प्रदूषण से उपजे कारणों से कई त्रासदी झेल चुके हैं लेकिन अफसोस है कि चेतते फिर भी नहीं।

एनजीटी ने हाल में ही हिंडन नदी में प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाने पर उत्तर प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाई। असल में, सरकारी तंत्र हो या फिर आम नागरिक, कोई भी पर्यावरण की रक्षा के लिए अपनी जिम्मेदारियों के प्रति सजग नहीं हैं। नतीजतन, प्रदूषण बढ़ता जा रहा है और इसका खमियाजा सबके सामने आ रहा है। ऐसे में चिंता होना लाजमी है।

ऐसा प्रतीत होता है कि लोग पर्यावरण संरक्षण को लेकर अपने दायित्व का निर्वहन करने के लिए इसलिए सजग नहीं हैं। लोग सड़कों पर कूड़ा फेंकते हैं। पेड़-पौधों की रक्षा नहीं करते और प्रदूषण फैलाते हैं जबकि प्रदूषण भविष्य के लिए मानव जीवन के लिए खतरा है। ऐसे में, प्रदूषण के लिए जिम्मेदार कारकों को जघन्य अपराध की श्रेणी में लाया जाना आज वक्त की जरूरत है और प्रदूषण फैलाने के लिए जिम्मेदार लोगों को जघन्य अपराध करने वाला माना जाना चाहिए।

इसके लिए कड़े दंड का प्रावधान होना चाहिए और इसे सख्ती से लागू किया जाना चाहिए तभी लोग मानेंगे, वरना नहीं। सच यही है कि प्रदूषण की रोकथाम के लिए सिर्फ जागरूकता भर से काम नहीं चलने वाला। वैसे पराली पर रोक लगाने का कानून बना हुआ है। इसे दंडनीय अपराध भी बनाया गया है।

यही वजह है कि काफी हद तक पराली जलाने पर रोक भी लगी है। हम देखते हैं कि दुनिया के कई देशों में प्रदूषण की रोकथाम के लिए कड़े कानून बनाए गए हैं इसलिए वहां के नागरिक उन कानूनों का पालन करने के लिए बाध्य होते हैं। हमारे यहां भी आम नागरिकों के लिए सख्त कानून बनने चाहिए। अगर प्रदूषण फैलाने पर कड़ी सजा का प्रावधान होगा और उसपर अमल भी होगा तो निश्चित ही काफी हद तक देश में प्रदूषण की रोकथाम संभव हो पाएगी, अन्यथा प्रदूषण थमने वाला नहीं है।