बरेली: खसरा, रूबेला के टीके बच्चों के लिए कोरोना में बने सुरक्षा कवच
अमृत विचार, बरेली। हाल ही में मुंबई में हुए आईएपी (बाल रोग विशेषज्ञ एकेडमिक) का राष्ट्रीय अधिवेशन में शामिल बाल रोग विशेषज्ञ व आईएपी के पदाधिकारी डा. अतुल अग्रवाल ने बताया कि कांफ्रेंस में कोरोना विषय पर अब तक हुए शोध और सुझावों पर ही चर्चा हुई। कांफ्रेंस में यह भी चर्चा हुई कि संक्रमण …
अमृत विचार, बरेली। हाल ही में मुंबई में हुए आईएपी (बाल रोग विशेषज्ञ एकेडमिक) का राष्ट्रीय अधिवेशन में शामिल बाल रोग विशेषज्ञ व आईएपी के पदाधिकारी डा. अतुल अग्रवाल ने बताया कि कांफ्रेंस में कोरोना विषय पर अब तक हुए शोध और सुझावों पर ही चर्चा हुई।
कांफ्रेंस में यह भी चर्चा हुई कि संक्रमण काल में बच्चे इसलिए अधिक संक्रमित नहीं हुए, क्योंकि उन्हें 2 वर्ष पूर्व ही केंद्र सरकार की ओर से विद्यालयों में चलाए गए खसरा, कण्ठमाला और रूबेला वैक्सीन का टीका लगवाया गया था। इन टीकों की वजह से ही कोरोना से बचाव में उनकी मदद हो सकी।
जिले में कोरोना संक्रमितों के आंकड़ें पर 10 से 12 प्रतिशत ही बच्चे संक्रमित हुए, जो युवा व बुजुर्गों की अपेक्षा काफी कम आंकड़ा था। कांफ्रेंस में शामिल वैक्सीन विशेषज्ञों का कहना था कि उच्च स्तर के कण्ठमाला एंटीबॉडी वाले लोग कोविड-19 के कम गंभीर मामले होते हैं। उन्होंने कहा कि वयस्कों को एमएमआर वैक्सीन के बूस्टर शॉट्स प्राप्त करने की सिफारिश करना जल्दाबाजी होगी।
जर्नल एमबाईओ में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन में, शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला कि जिन लोगों के रक्त प्रवाह में मम्प्स के लिए एंटीबॉडी का स्तर कम था, वे कोविड-19 के अधिक गंभीर मामलों का अनुभव करते थे, जबकि उच्च स्तर के मम्प्स एंटीबॉडी में कम गंभीर मामले थे। एमएमआर 2 वैक्सीन को बहुत कम दुष्प्रभावों के साथ एक सुरक्षित टीका माना जाता है।
कैसे बचाव करती है मम्प्स वैक्सीन
बाल रोग विशेषज्ञ व आईएपी के सदस्य डॉ. अतुल अग्रवाल बताते हैं कि जब यह टीका दिया जाता है, तो शरीर के रोग ज़नक़ों के टुकड़े जो आपके प्रतिरक्षा प्रणाली से प्रतिक्रिया प्राप्त करते हैं और जो संक्रमण के समय के बाहर आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को शिक्षित करने की अनुमति देता है, को बाहर निकाल देता है। इनमें से कुछ वायरस होते हैं, जो विशेष रूप से वे जो ऊपरी श्वसन में रोग पैदा कर सकते हैं । अगर आप किसी ऐसे व्यक्ति के रूप में होते हैं, जिसके पास एक प्रोटीन के लिए एक एंटीबॉडी है, जो कोरोना के कुछ हिस्से जैसा दिखता है तो वह एंटीबॉडी अलग-अलग के बीच ‘क्रॉस-रिएक्शन’ कर सकता है।
सुरक्षात्मक माना गया एमएमआर टीका
डा. अतुल अग्रवाल ने बताया कि कांफ्रेंस में इस बिंदु पर भी विचार किया गया कि एमएमआर वैक्सीन कोरोना के खिलाफ सुरक्षात्मक हो सकती है। यह भी बता सकता है कि बच्चों की वयस्कों की तुलना में बहुत कम कोरोना केस दर है, साथ ही साथ मृत्यु दर भी बहुत कम है। अधिकांश बच्चों को अपना पहला एमएमआर टीकाकरण लगभग 12 से 15 महीने की उम्र में और दूसरा 4 से 6 साल की उम्र में लगवाना होता है। संयुक्त राज्य अमरीका ने 2 साल की उम्र के बच्चों की तुलना में 12 महीने से कम उम्र के शिशुओं में 65 प्रतिशत अधिक कोरोना के मामले सामने आए।
बीजीसी का लगवाया टीका, परिणाम रहे चौंकाने वाले
सीएमओ डा.एसके गर्ग का कहना है कि बच्चों के लगने वाले एमएमआर और अन्य तरह के टीके की वजह से बरेली जिला ही नहीं बल्कि पूरे देश में बच्चे कम ही संक्रमित रहे। वहीं बताया कोरोना संक्रमण काल में उन्होंने बुजुर्गों व उनकी पत्नी ने, जो गाजियाबाद के अस्पताल में सीएमएस के पद पर कार्यरत है, कोविड में तैनात रहते ही पूरे स्टाफ को बीजीसी का टीका लगवा दिया था। बताया कि इसके परिणाम चौंकाने वाले रहे, जिनको भी बीजीसी का टीका लगा, वह कोरोना से संक्रमित नहीं हुए।
