बरेली: अब बगैर टैग जीएसटी वाला माल नहीं ढो पाएंगे ट्रांसपोर्टर

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Edited By Amrit Vichar
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अमृत विचार, बरेली। जीएसटी के दायरे में आने वाले सामानों को ढोने वालों ट्रांसपोर्टरों को ट्रकों पर आरएफ (रेडियो फ्रीक्वेंसी) आईडी टैग लगवाना जरूरी कर दिया है। यह टैग फास्टैग की तर्ज पर काम करता है। फास्टैग में टोल प्जाला पर टोल टैक्स आटोमैटिक कट जाता है। इसी तरह यह टैग लगा होने पर टोल …

अमृत विचार, बरेली। जीएसटी के दायरे में आने वाले सामानों को ढोने वालों ट्रांसपोर्टरों को ट्रकों पर आरएफ (रेडियो फ्रीक्वेंसी) आईडी टैग लगवाना जरूरी कर दिया है। यह टैग फास्टैग की तर्ज पर काम करता है। फास्टैग में टोल प्जाला पर टोल टैक्स आटोमैटिक कट जाता है।

इसी तरह यह टैग लगा होने पर टोल या जिले की सीमा पार करते ही ट्रक का ब्योरा एक रेडियो फ्रीक्वेंसी टॉवर के माध्यम से वाणिज्यकर विभाग के लखनऊ स्थित सर्वर पर आटोमैटिक दर्ज हो जाएगा, जिसमें ट्रक नंबर,उस नंबर पर ताजा बने ईवे बिल का पूरा ब्योरा मिल जाएगा।

अगर 24 घंटे की अवधि में ट्रक जिले की सीमा या टोल से दो या तीन बार गुजरता है, तो उसका ब्योरा भी आएगा। इससे ये पता चल सकेगा कि ट्रक में किस-किस ई-वे बिल का माल कहां-कहां गया। जानकारों का कहना है अगर प्रभावी तरीके से यह व्यवस्था लागू हुई, तो ओवरलोडिंग पर काफी हद तक लगाम लगेगी, साथ ही ट्रांसपोर्टर्स में भी जुर्माने का डर बना रहेगा।

टैग बताएगा, ट्रक कहां से आया और कहां गया
ईवे बिल में रोजाना 200 किमी के सफर की सुविधा मिलने पर कई ट्रक मालिक एक ई वे बिल पर दिन भर में दो से तीन चक्कर लगा रहे थे, जिससे बड़े पैमाने पर कर चोरी हो रही थी। यानी सुबह आठ बजे एक ईवे बिल बनाया गया और दिल्ली, आगरा, मथुरा, हाथरस, पीलीभीत, बदायूं जैसे के आसपास के शहरों से ट्रक वाले दो-दो चक्कर लगा रहे थे। इसकी मानीटरिंग होती रही।

इसके बाद प्रदेश में कई जगह आरएफ आईडी टैग लगवाए गए। वहीं, अब यह व्यवस्था यहां के टोल प्लाजा पर भी चालू कर दी गई है। ट्रक में लगे आरएफआईडी को जिले की सीमा या टोल प्लाजा पर रेडियो फ्रीक्वेंसी टॉवर रीड कर लेगा। इस रीडिंग में ट्रक के बाहर जाने का समय, ट्रक नंबर, उस ट्रक नंबर पर बने ताजा ईवे बिल को भी ढूंढ लेगा। पूरी सूचना वाणिज्य कर विभाग के लखनऊ स्थित सर्वर पर पहुंचेगी। वहां से सूचना तत्काल स्थानीय एसआईबी टीम को मिलेगी।

तीन हजार वाहनों पर लगना है टैग
एक अनुमान के मुताबिक जिले में करीब तीन हजार छोटे-बड़े ट्रक हैं। इनमें बमुश्किल तीन सौ ट्रकों पर ही आरएफ (रेडियो फ्रीक्वेंसी) आईडी टैग लगा है। अब शासन से हुई सख्ती के बाद फिर से ट्रांसपोर्टरों को इसकी अनिवायर्ता बताकर टैग लगवाने के लिए कहा गया है। अधिकारियों के अलावा ट्रांसपोर्टस का भी मानना है। टैग लगने से काफी हद तक टैक्स चोरी पर लगाम लग सकेगी।

अभी तक काराबोरी व ट्रांसपोर्टर आपस में मिल पर ई-वेबिल का दुरुपयोग कर टैक्स की चोरी कर रहे थे। इस सिस्टम के लागू होने पर ई-वेबिल का दुरुपयोग नहीं हो सकेगा। जिससे दूसरे प्रांतों को जाने वाले और आने वाले माल पर टैक्स चोरी पर अंकुश लग जाएगा। गौरीशंकर, डिप्टी कमिश्नर, वाणिज्यकर विभाग

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