बरेली: चप्पलें घिस गईं, हिम्मत टूट गई…अब तो दे दो आवास
अमृत विचार,बरेली। हर एक व्यक्ति का सपना होता है कि उसका अपना एक आशियाना हो। इसी सपने को साकार करने के लिए सैकड़ों लोग डूडा कार्यालय के चक्कर काटते हैं। उन्हें आश्वासन तो मिल रहा है, लेकिन अभी छत के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि करीब पांच साल हो …
अमृत विचार,बरेली। हर एक व्यक्ति का सपना होता है कि उसका अपना एक आशियाना हो। इसी सपने को साकार करने के लिए सैकड़ों लोग डूडा कार्यालय के चक्कर काटते हैं। उन्हें आश्वासन तो मिल रहा है, लेकिन अभी छत के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि करीब पांच साल हो गए, लेकिन उन्हें अब तक आवास नहीं मिला है।
फाइल पास होने के बाद उन्हें कई साल से खाते में पैसा आने का इंतजार है। गरीबों को पक्के मकान उपलब्ध करवाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना चलाई जा रही है। अनेक को आवास मिले भी परंतु कई गरीब परिवार इसके लाभ से वंचित हैं। बहुत से आवेदन करने वाले करीब पांच साल से मकान मिलने की आस में डूडा कार्यालय के चक्कर काट रहे है।
इससे परेशान होकर आवेदन करने वाले सरकारी सिस्टम को कोसते हुए नजर आ रहे है। इसी तरह हर रोज सैकड़ों जरूरतमंद डूडा कार्यालय में जानकारी के लिए पहुंचते है लेकिन कर्मचारी कभी उस कमरे में तो कभी दूसरे कमरे में जाने की बात कहकर टरका देते है। वहीं अधिकारियों का कहना है कि जांच में अगर कोई पात्र होता है तो उसके खाते में पैसे भेज दिए जाते है।
-पांच साल पहले आवास के लिए आवेदन किया था मगर आज तक उनके खाते में पैसे नहीं आए हैं। पांच साल से लगातार चक्कर लगाते हुए हिम्मत भी जवाब दे चुकी है।
राज कुमारी, शांतिबिहार
प्रधानमंत्री आवास के लिए करीब डेढ़ साल पहले आवेदन किया था लेकिन अब तक पैसा खाते में नहीं आया है। एक साल से लगातार डूडा कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं पर कोई सुनवाई नहीं हुई है।
भगवान देवी , जौहरपुर सीबीगंज
मकान के लिए आवेदन किया था। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी फाइल पास भी हो गई है लेकिन अब तक मकान निर्माण शुरू कराने के लिए पैसे खाते में नहीं आए हैं।
गिरीश, पुराना शहर
डेढ़ साल पहले प्रधानमंत्री आवास के लिए आवेदन किया था। जिसके लिए अधिकारियों की टीम ने मकान का सर्वे भी कर लिय है। अब पता नहीं उनकी फाइल गुम हो गई है।
हीरा लाल, बारादरी
