बरेली: बंद आईटीआर फैक्ट्री के 151 कर्मचारी गए हाईकोर्ट, मुश्किलें बढ़ीं

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अमृत विचार, बरेली। 17 साल से बंद आईटीआर (इंडियन टर्पेनटाइन रोजिन) फैक्ट्री के 151 कर्मचारी बकाया धनराशि का 2018 तक का कंपनसेशन लेने के लिए फैक्ट्री प्रबंधन के विरुद्ध इलाहाबाद हाईकोई चले गए हैं। इससे जहां फैक्ट्री की जमीन पर प्रस्तावित प्रोजेक्ट ही नहीं लटके, बल्कि फैक्ट्री प्रबंधन भी मामले को लेकर मुश्किलों में घिर …

अमृत विचार, बरेली। 17 साल से बंद आईटीआर (इंडियन टर्पेनटाइन रोजिन) फैक्ट्री के 151 कर्मचारी बकाया धनराशि का 2018 तक का कंपनसेशन लेने के लिए फैक्ट्री प्रबंधन के विरुद्ध इलाहाबाद हाईकोई चले गए हैं। इससे जहां फैक्ट्री की जमीन पर प्रस्तावित प्रोजेक्ट ही नहीं लटके, बल्कि फैक्ट्री प्रबंधन भी मामले को लेकर मुश्किलों में घिर गया है।

अंदरखाने कर्मचारियों को मनाने के लिए सभी कर्मचारियों का सत्यापन कराया गया। मंडलायुक्त के निर्देश पर तहसील सदर की टीम ने कर्मचारियों से बात की, लेकिन हाईकोर्ट गए 151 कर्मचारियों ने अपने बारे में कुछ भी बताने से इनकार कर दिया। उन्होंने साफ कह दिया कि अब बताने को कुछ नहीं। अब वह कोर्ट में ही कहेंगे।

तहसीलदार सदर आशुतोष गुप्ता ने एसडीएम सदर को रिपोर्ट सौंप दी है। मामले की रिपोर्ट मंडलायुक्त कार्यालय भेजी जा रही है। इधर, अब फैक्ट्री प्रबंधन हाईकोर्ट में मजबूत पैरवी कराने की तैयारी में लगा है। अभी मंडलायुक्त ने आईटीआर प्रकरण की पैरवी करने के लिए तहसीलदार सदर को नामित किया है।

कई तारीखों में तहसीलदार कोर्ट भी जा चुके हैं। चर्चा यह है कि यदि हाईकोर्ट ने कर्मचारियों के हित में कंपनसेशन देने का निर्णय ले लिया तो आईटीआर प्रबंधन की मुश्किलें और बढ़ जाएंगी। इसलिए, प्रकरण की पैरवी कराने के लिए जिला प्रशासन सख्त हो गया है। आईटीआर फैक्ट्री वर्ष 2004 से बंद है, इसलिए प्रबंधन इसी वर्ष से बकाया धनराशि देने की बात कह रहा है।

35 कर्मचारियों की हो चुकी है मौत, उनके आश्रित बकाया लेने को तैयार
आईटीआर फैक्ट्री के 35 पूर्व कर्मचारियों की मौत हो चुकी है। यह बात तहसील सदर की टीम के सत्यापन में सामने आई। लेखपाल हरद्वारी गंगवार ने मृतक कर्मचारियों के आश्रितों से संपर्क किया। लेखपाल 30 आश्रितों से मिले। उनसे बकाया धनराशि लेने के बाबत जानकारी की। जिस पर मृतक कर्मचारियों के आश्रितों ने बकाया धनराशि लेने के लिए सहमति जता दी है।

सत्यापन में यह बात सामने आई कि पांच ऐसे कर्मचारी थे, जिनके परिजन अब उत्तराखंड राज्य के रुद्रपुर, बाजपुर और हल्द्वानी शहर में रह रहे हैं। लेखपाल ने उनसे संपर्क करने के प्रयास किए लेकिन, बात नहीं हो सकी। लेखपाल के अनुसार यदि कर्मचारियों के आश्रित संबंधित एसडीएम या नगर मजिस्ट्रेट से वारिसान बनवाकर यहां दिखाएंगे तो उसी के आधार पर उनको बकाया देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। वैसे, उनसे संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं।

186 कर्मचारी थे, आईटीआर में बने हैं 250 आवास
आईटीआर फैक्ट्री के बंद होने के दौरान 186 कर्मचारी कार्यरत थे। इसमें से 151 हाईकोर्ट गए हैं। आईटीआर फैक्ट्री परिसर में 225 आवास और आठ चौक बने हुए हैं। वर्तमान में आवासों में 50 से अधिक पूर्व कर्मचारी रह रहे हैं। अन्य आवास खंडहर में बदल चुके हैं। मरम्मत के अभाव में कई की छत गिर गई है।

बीडीए करेगा आईटीआर जमीन की डिजीटल पैमाइश, खाका तैयार
आईटीआर फैक्ट्री के पूर्व जीएम व सुपीरियर शराब फैक्ट्री के अधिकारी दो विदेशी बायलर चोरी होने के बाद से खासे चर्चा में हैं। प्रकरण में सीबीगंज थाने में एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस जांच कर रही है, लेकिन मंडलायुक्त रणवीर प्रसाद फैक्ट्री जमीन की भी पैमाइश करा रहे हैं। ताकि यह मालूम हो सके कि वर्तमान में फैक्ट्री की कितनी जमीन है और किन-किन कंपनियों को पूर्व में कितनी जमीनें बेची गईं। कितनी पर कब्जा है।

मंडलायुक्त ने अपर आयुक्त प्रशासन अरुण कुमार के निर्देशन में जमीन की पैमाइश के आदेश पिछले सप्ताह जारी किए थे। गुरुवार को यह तथ्य सामने आया कि फैक्ट्री जमीन की डिजीटल पैमाइश कराई जाएगी। इसकी जिम्मेदारी बरेली विकास प्राधिकरण को सौंपी गई है। बीडीए से गूगल सीट निकलवाने के साथ खसरा-खतौनी भी निकलवाई गई है। सेटेलाइट के जरिए पैमाइश की जाएगी। हालांकि, पैमाइश में तहसील के लेखपाल भी सहयोग करेंगे लेकिन पैमाइश के संबंध में न कोई पत्र एसडीएम सदर विशु राजा और न ही तहसीलदार सदर आशुतोष गुप्ता के पास पहुंचा है।

एसडीएम सदर व तहसीलदार सदर ने संयुक्त रूप से बताया कि पैमाइश के संबंध में कोई पत्र अभी तक नहीं मिला है। लेखपालों के बिना पैमाइश किए जाना भी संभव नहीं है।

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