मुरादाबाद: पिता का सहारा बनने के लिए शुरू किया पेपर वितरण
मुरादाबाद, अमृत विचार। घर की आर्थिक स्थिति बहुत ज्यादा ठीक नहीं थी। सहारा देने के लिए कोई बड़ा भाई नहीं था। ऐसे में परिवार की जरूरतें पूरी करना भी कभी-कभी मुश्किल हो जाता था। लेकिन पिता कभी इस बात का एहसास न होने देते की वह किस तरह घर से बाहर निकलकर दो वक्त की …
मुरादाबाद, अमृत विचार। घर की आर्थिक स्थिति बहुत ज्यादा ठीक नहीं थी। सहारा देने के लिए कोई बड़ा भाई नहीं था। ऐसे में परिवार की जरूरतें पूरी करना भी कभी-कभी मुश्किल हो जाता था। लेकिन पिता कभी इस बात का एहसास न होने देते की वह किस तरह घर से बाहर निकलकर दो वक्त की रोटी का इंतजाम करते हैं। परिवार की हर परिस्थिति को देखने के बाद पिता का सहारा बनने के लिए उन्होंने तड़के उठकर समाचार पत्र वितरण का काम शुरू किया, ताकि पढ़ाई भी प्रभावित न हो और परिवार में किसी तरह की कोई परेशानी लालन-पोषण में न आए। ये फलसफा है समाचार पत्र विक्रेता विजेंद्र सिंह का।
विजेंद्र की उम्र 31 वर्ष है। वह हरथला कालोनी में मां, नारायण देही, पत्नी नीलम, बेटी अंशिका और बेटे अक्षित के साथ रहते हैं। बताते हैं कि शुरुआती दौर में परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। पिता दो वक्त की रोटी और हमारी पढ़ाई को जारी रखने के लिए सुबह घर से मजदूरी को निकल जाते थे। लेकिन समय के साथ परिवार की भी जरूरत बढ़ने लगी तो पिता को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता।
यही सब देख 20 वर्ष की उम्र में समाचार पत्र वितरण करने का मन बनाया, ताकि पढ़ाई को जारी रखा जा सके। इसके बाद हिंदू कालेज से बीए की पढ़ाई पूरी की। वर्ष 2006 में शादी हुई और वर्ष 2007 में पिता का देहांत हो गया। अब तो जैसे सारी जिम्मेदारियां उनके ऊपर ही आ गई थीं। बताया कि उन्होंने 100 अखबारों से वितरण का काम शुरू किया और धीरे-धीरे इसकी संख्या को बढ़ाया। जिम्मेदारी बढ़ जाने के बाद उन्होंने निजी कालेज में चालक के रूप में काम करना भी शुरू किया। बताते हैं कि अब बच्चों को बेहतर शिक्षा प्राप्त कराकर उन्हें सफल बनाना ही जीवन का एकमात्र सपना है।
