बरेली: 52 लोगों को नसीब नहीं हुआ अपनों का कंधा

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Edited By Amrit Vichar
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अमृत विचार, बरेली। मौत बेरहम होगी, मगर इतनी भी नहीं कि अपनों का कंधा भी नसीब न हो सके। अंतिम बार मृत हुए लोगों का परिजन मुंह तक नहीं देख सके। जी हां यह यही सच्चाई है। ट्रेन हादसों में मारे गए 52 लोगों की पहचान नहीं हो सकी। हालांकि मरने वालों के शव पोस्टमार्टम …

अमृत विचार, बरेली। मौत बेरहम होगी, मगर इतनी भी नहीं कि अपनों का कंधा भी नसीब न हो सके। अंतिम बार मृत हुए लोगों का परिजन मुंह तक नहीं देख सके। जी हां यह यही सच्चाई है। ट्रेन हादसों में मारे गए 52 लोगों की पहचान नहीं हो सकी। हालांकि मरने वालों के शव पोस्टमार्टम हाउस में 72 घंटे तक अपनों का इंतजार करते रहे, लेकिन उनकी पहचान करने वाला कोई नहीं पहुंचा। मजबूरन जीआरपी को उनका अंतिम संस्कार करना पड़ा।

ट्रेन हादसों से मरने वालों की संख्या में इजाफा होता जा रहा है। बीते तीन वर्षों में बरेली क्षेत्र में 130 लोगों की ट्रेन हादसे की वजह से जान जा चुकी है। इसमें से 52 लोग ऐसे है जिन्हें अपने परिजनों की मुखाग्नि भी नसीब नहीं हुई। अज्ञात लोगों में ही उनका अंतिम संस्कार किया गया। जीआरपी भी इनकी शिनाख्त के लिए करने में सफल नहीं होती है।

बरेली परिक्षेत्र में ट्रेन से कटने की वजह से वर्ष 2018 में कुल 45 लोगों की मौत हुई थी। जिसमें से केवल 25 लोगों की शिनाख्त हो सकी। जबकि 20 लोगों का अज्ञात में ही अंतिम संस्कार करना पड़ा। इसी तरह वर्ष 2019 में यह आंकड़ बढ़ गया और 49 लोगों की जान गई। जिसमें से केवल 31 लोगों की ही पहचान हुई। बाकी 18 लोग अभी तक अज्ञात में ही है। इनका कुछ पता नहीं चला कि वह कौन है और कहां के रहने वाले है।

कोरोना संक्रमण की वजह से वर्ष 2020 में यह आंकड़ा घट गया और लाकडाउन में भी 36 लोगों ने अपनी जान केवल ट्रेन के कटने की वजह से गवा दी। इसमें से 22 लोगों की शिनाख्त हुई 14 लोग अभी भी अज्ञात की श्रेणी में शामिल है। जीआरपी इंस्पेक्टर विजय सिंह राणा का कहना है कि हादसे में मौत के बाद वह पोष्टामार्टम के 72 घंटो का इंतजार करते है। इस बीच वह पोस्टर चस्पा करने से लेकर सभी थानों में उसकी सूचना देते है। इसके बाद भी यदि शिनाख्त नहीं हो पाती तो उसका अंतिम संस्कार कर दिया जाता है।

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