बरेली: गलत कर दी आईटीआर फैक्ट्री की भूमि की पैमाइश, उठे सवाल

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Edited By Amrit Vichar
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अमृत विचार, बरेली। आईटीआर फैक्ट्री फिर चर्चा में है। इस बार भूमि की पैमाइश गलत होने का मामला सामने आया है। तहसील सदर के लेखपाल ने बरेली विकास प्राधिकरण के साथ मिलकर भूमि की डिजिटल पैमाइश की लेकिन पैमाइश में उस भूमि को भी नाप दिया जो पूर्व में बेची जा चुकी है। इससे पैमाइश …

अमृत विचार, बरेली। आईटीआर फैक्ट्री फिर चर्चा में है। इस बार भूमि की पैमाइश गलत होने का मामला सामने आया है। तहसील सदर के लेखपाल ने बरेली विकास प्राधिकरण के साथ मिलकर भूमि की डिजिटल पैमाइश की लेकिन पैमाइश में उस भूमि को भी नाप दिया जो पूर्व में बेची जा चुकी है। इससे पैमाइश कराने वाली टीम पर सवाल खड़े हो रहे हैं। बेची गई भूमि सहित पैमाइश करने से फैक्ट्री का वो रकबा सामने नहीं आ सका जिसके लिए पैमाइश कराई गई।

शुक्रवार को गलम पैमाइश करने का मामला मंडलायुक्त आर. रमेश कुमार के संज्ञान में लाया गया। इसमें नए सिरे से भूमि की पैमाइश कराने के निर्देश दिए गए हैं। कमिश्नरी के सूत्रों के अनुसार, बीडीए ने राजस्व टीम के साथ पैमाइश कराई, जिसमें फैक्ट्री की पूरी जमीन की पैमाइश कर दी गई, जो कि 5.64 लाख वर्ग मीटर बताई गई है। इसमें वह हिस्सा भी नाप दिया गया, जो कि पहले अन्य कंपनियों को बेच दिया गया था।

बता दें कि आईटीआर फैक्ट्री के दो विदेशी वायलरों के चोरी होने के 16 साल के बाद एफआईआर दर्ज हुई। इसके बाद तत्कालीन मंडलायुक्त रणवीर प्रसाद के आदेश पर भूमि की पैमाइश की गई। आईटीआर फैक्ट्री के पूर्व जनरल मैनेजर व सुपीरियर शराब फैक्ट्री के अधिकारी पर एफआईआर दर्ज है। सीबीगंज पुलिस पड़ताल कर रही है। इधर एसडीएम सदर विशु राजा ने बताया कि आईटीआर भूमि की पैमाइश कराने के संबंध में तहसीलदार सदर को जानकारी ज्यादा होगी। उसका कोई कागज मेरे पास नहीं आया।

चार बॉयलर थे दो सुपीरियर में लगे तो दो कहां गए
बताते हैं कि आईटीआर फैक्ट्री में चार बॉयलर लगे थे। इसमें दो विदेशी बॉयलर थे। विदेशी बॉयलरों के बारे में कहा जा रहा है कि दोनों बॉयलर सुपीरियर फैक्ट्री में लगे हैं। इसमें शराब फैक्ट्री प्रबंधन ने तर्क दिया था कि नीलामी में दोनों बॉयलर खरीदे थे लेकिन नीलामी में खरीदने के संबंध में कोई पुख्ता प्रमाण अधिकारियों को नहीं मिले। वहीं, फैक्ट्री के दो अन्य बॉयलर गायब हैं। उनके बारे में किसी को कुछ नहीं पता है।

हालांकि, बॉयलरों की जांच के दौरान कई रहस्य सामने आए। पड़ताल में ही यह मामला खुला कि साठगांठ से सुपीरियर कंपनी ने फैक्ट्री की जमीन दबा दी है। सच बाहर लाने के लिए भूमि की पैमाइश कराई गई लेकिन टीम के गलत पैमाइश करने से सच सामने नहीं आ पाया। फरवरी माह में तत्कालीन मंडलायुक्त रणवीर प्रसाद ने तहसील सदर की टीम को बरेली विकास प्राधिकरण के साथ मिलकर डिजिटल पैमाइश करने के निर्देश दिए थे।

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