बरेली: तीन तलाक के खिलाफ लड़ने वाली महिला के कथित माफीनामा पर सवाल

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अमृत विचार, बरेली। दरगाह आला हजरत देश में सुन्नी-बरेलवी मुसलमानों का मरकज (केंद्र) है। उसी सेंटर से एक बार में तीन तलाक के खिलाफ बेखौफ आवाज उठी थी, जिसकी गूंज पूरे देश में पहुंची। आवाज उठाने वाली महिला के खिलाफ इस्लाम से खारिज किए जाने का फतवा जारी हुआ था। उसी महिला का एक कथित …

अमृत विचार, बरेली। दरगाह आला हजरत देश में सुन्नी-बरेलवी मुसलमानों का मरकज (केंद्र) है। उसी सेंटर से एक बार में तीन तलाक के खिलाफ बेखौफ आवाज उठी थी, जिसकी गूंज पूरे देश में पहुंची। आवाज उठाने वाली महिला के खिलाफ इस्लाम से खारिज किए जाने का फतवा जारी हुआ था। उसी महिला का एक कथित माफीनामा वायरल हो रहा है। इस दावे के साथ कि महिला ने तलाक, हलाला के खिलाफ जो लड़ाई छेड़ी थी, उसके लिए माफी मांग ली है। हालांकि, अभी तक इस माफीनामे की पुष्टि नहीं हो पाई है।

माफीनामा पत्र पर 12 मार्च की तारीख अंकित है। गवाहों के साथ महिला के भी कथित हस्ताक्षर हैं। इस पत्र को लेकर तमाम तरह के सवाल उठ रहे हैं। कुछ इस पत्र को साजिश ठहरा रहे हैं तो कोई हकीकत मान रहा है। सबके अपने दावे हैं, लेकिन लोगों के मुताबिक यह पत्र दबाव में लिखवाया गया है। महिला से बात करने का प्रयास किया, लेकिन उनसे बात नहीं हो पाई। महिला ने दूसरे दिन भी फोन नहीं उठाया। घर के बाहर गार्ड भी तैनात हैं। महिला किसी से मिल भी नहीं रही है।

इस्लाम से खारिज करने के फतवे का असर तो नहीं
महिला के खिलाफ वर्ष 2017 में इस्लाम से खारिज किए जाने का एक फतवा जारी हुआ था। इसमें लिखा था कि, ‘समाज इनसे हर तरह के नाते-रिश्ते तोड़ ले। अगर ये मर जाएं तो दफनाने के लिए कब्रिस्तान में दो गज जमीन न दी जाए। रिश्तेदार भी इन्हें अपनी खुशी और गम में शरीक न करें। महिला ने इस फतवे के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कराया था और ये प्रकरण अभी कोर्ट में चल रहा है।

शहर के प्रमुख घराने में हुई थी शादी
दरअसल, महिला खुद तीन तलाक पीड़िता हैं। उनकी शादी शहर के प्रमुख धार्मिक परिवार में हुई थी। हालांकि शादी के करीब साल भर के अंदर ही शौहर ने तलाक दे दिया था। ये मामला भी कोर्ट में विचाराधीन है। अब जब कथित माफीनामा का पत्र वायरल हो रहा, तब पिछली सभी घटनाओं के सिरे भी जोड़े जा रहे हैं कि क्या वाकई महिला ने दिल से माफी मांगी है या फिर किसी भावनात्मक दबाव में ऐसा हुआ है।

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