बरेली: चोरों के बराबर संपत्ति खातों से साफ कर रहे साइबर ठग
अमृत विचार, बरेली। पुलिस के लिए अब चोरों और लुटेरों से ज्यादा सिरदर्द साइबर ठग हैं। बिना किसी मेहनत के फोन पर लोगों को झांसे में लेकर ठग उनकी मेहनत की कमाई साफ कर रहे हैं। साइबर ठगों को पुलिस पकड़ने में भी नाकाम साबित हो रही है। बरेली रेंज में एक साल में जितनी …
अमृत विचार, बरेली। पुलिस के लिए अब चोरों और लुटेरों से ज्यादा सिरदर्द साइबर ठग हैं। बिना किसी मेहनत के फोन पर लोगों को झांसे में लेकर ठग उनकी मेहनत की कमाई साफ कर रहे हैं। साइबर ठगों को पुलिस पकड़ने में भी नाकाम साबित हो रही है।
बरेली रेंज में एक साल में जितनी कीमत की संपत्ति चोरों ने घरों के ताले तोड़कर चुराई। लगभग उतनी ही राशि साइबर ठगों ने लोगों के खातों से उड़ा दी। साइबर ठगी की संपत्ति और भी ज्यादा है क्योंकि कई मामलों में रिपोर्ट ही दर्ज नहीं की गई।
रेंज में चोरी और ठगी के दोनों मामलों में बरेली जिला टॉप पर है। चोरी को रोकने के लिए 28 थानों की पुलिस है। जबकि साइबर ठगी रोकने के लिए सिर्फ रेंज स्तर पर एक थाना और एक साइबर सेल है। ऐसे में साइबर ठगों को पकड़ना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन साबित हो रहा है।
बरेली रेंज की बात करें तो 1 जनवरी से 31 दिसंबर 2020 तक चोरी (नकबजनी) के 205 मुकदमे दर्ज किए गए। इन मुकदमों में 1 करोड़ 16 लाख की संपत्ति चोरी हुई। रेंज में साइबर ठगी के 267 मुकदमे दर्ज किए गए जिनमें 53 लाख की संपत्ति गई। जबकि साइबर ठगी के 40 फीसदी मामलों में रिपोर्ट ही दर्ज नहीं की गई। सिर्फ बरेली जिले की बात करें तो नकबजनी के 110 मुकदमे दर्ज किए गए जिनमें 55,59,730 रुपये की संपत्ति गई।
साइबर ठगी के 179 मामले दर्ज किए गए जिनमें 24 लाख की संपत्ति गई। दूसरी तरफ देखा जाए तो बरेली में साइबर सेल के पास ठगी के 364 केस सामने आए थे, जिनमें 1 करोड़ 28 लाख रुपये की संपत्ति गई थी। इससे साफ है कि कई मामले ठगी के दर्ज ही नहीं किए गए। चोरी के अन्य मामलों में भी लाखों रुपये की संपत्ति गई है।
आईजी रेंज राजेश कुमार पांडेय ने चोरी और साइबर ठगी के मामलों और इनमें गई संपत्ति का रिकॉर्ड तैयार कराया। साइबर ठगी को रोकने के लिए साइबर सेल के साथ-साथ साइबर थाना भी बनाए गए हैं लेकिन यह नाकाफी है क्योंकि चोरी, नकबजनी व अन्य अपराधों को रोकने के लिए जिले में महिला थाना समेत 29 थाना खुले हैं। सभी थानों में 100 से अधिक पुलिसकर्मी भी तैनात हैं लेकिन साइबर सेल और साइबर थाना मिलाकर 10 लोग भी नहीं हैं।
साइबर ठगी के मामले थाने में दर्ज तो होते हैं लेकिन पुलिस पकड़ने में रुचि नहीं दिखाती, क्योंकि ठग झारखंड, राजस्थान, दिल्ली व अन्य राज्यों में बैठकर फोन पर ठगी करते हैं। गलत मोबाइल नंबरों और फर्जी खातों का इस्तेमाल करते हैं। साइबर सेल जब भी किसी ठगी के मामले को ट्रेस करती है, वह खाता फर्जी निकलता है। उसे मोबाइल ऐप के जरिए खोला गया होता है। कुछ ही मिनटों में अलग-अलग खातों में रकम ट्रांसफर कर दी जाती है। कभी कोई ठग ट्रेस हो भी जाए तो दूसरे राज्य में जाकर पकड़ने की बड़ी चुनौती होती है।
नकबजनी के मामले
जिला मुकदमे संपत्ति
बरेली 110 5559730
बदायूं 18 287500
पीलीभीत 48 1924740
शाहजहांपुर 29 2830500
चोरी के मामले
जिला मुकदमे संपत्ति
बरेली 290 7681545
बदायूं 75 5237240
पीलीभीत 84 1578600
शाहजहांपुर 59 2116340
साइबर ठगी के मामले
जिला मुकदमे संपत्ति
बरेली 179 2400420
बदायूं 25 336232
पीलीभीत 30 1303023
शाहजहांपुर 33 1276631
चोरी और लूट की वारदात के साथ अब साइबर ठगी के मामले बढ़ रहे हैं। इनमें लोगों को अधिक नुकसान हो रहा है। साइबर थाना और साइबर सेल काम कर रहे हैं। साइबर ठगी को रोकने और ठगों को पकड़ने के लिए पुलिसकर्मियों की संख्या बढ़ाई जाएगी और दूसरे राज्यों में भी टीम भेजी जाएंगी।
-राजेश कुमार पांडेय, आईजी रेंज
