बरेली: नवरात्र के चौथे दिन श्रद्धालुओं ने की मां कुष्मांडा की पूजा

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बरेली, अमृत विचार। चैत्र नवरात्र के चौथे दिन शुक्रवार को मां के चतुर्थ स्वरूप मां कुष्मांडा की पूजा-अर्चना कर श्रद्धालुओं ने सुख-शांति की मन्‍नत मांगी। घरों और मंदिरों में श्रद्धालुओं ने वि‍धिवत पूजा के बाद माता के भजन किए। आचार्य सुनील शास्त्री के अनुसार मां कुष्मांडा यानी कुम्हड़ा। कुष्मांडा एक संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ …

बरेली, अमृत विचार। चैत्र नवरात्र के चौथे दिन शुक्रवार को मां के चतुर्थ स्वरूप मां कुष्मांडा की पूजा-अर्चना कर श्रद्धालुओं ने सुख-शांति की मन्‍नत मांगी। घरों और मंदिरों में श्रद्धालुओं ने वि‍धिवत पूजा के बाद माता के भजन किए। आचार्य सुनील शास्त्री के अनुसार मां कुष्मांडा यानी कुम्हड़ा। कुष्मांडा एक संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ है कुम्हड़ा, यानि कद्दू, यानि पेठा, जिसका हम घर में सब्जी के रूप में इस्तेमाल करते हैं।

मां कुष्मांडा को कुम्हड़े की बलि बहुत ही प्रिय है, इसलिए मां दुर्गा का नाम कुष्मांडा पड़ा। इसके साथ ही देवी मां की आठ भुजायें होने के कारण इन्हें अष्टभुजा वाली भी कहा जाता है| इनके सात हाथों में कमण्डल, धनुष, बाण, कमल, अमृत से भरा कलश, चक्र और गदा नजर आता है, जबकि आठवें हाथ में जप की माला रहती है।

माता का वाहन सिंह है और इनका निवास स्थान सूर्यमंडल के भीतर माना जाता है। मंदिरों में कोरोना वायरस संक्रमण को लेकर पूरे इंतजाम किए गए थे। शारीरिक दूरी का पालन कर श्रद्धालु पूजा अर्चना कर रहे थे। मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप मां कुष्मांडा की पूजा-अर्चना करने के लिए मंदिर में भोर से श्रद्धालु आने शुरू हो गए। ऐसे में लोग मां की पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

पांचवें दिन स्कंदमाता की होगी अराधना
शांत, करुणामयी, ममतामयी रूप है माता आदिशक्ति का पांवचां स्‍वरूप। देवी भगवती का पांचवां स्वरूप जगद्जननी स्‍कंदमाता का है। मातृगुणों से ओतप्रोत स्कंदमाता भक्तों को अभय, आयु, आशीष प्रदान करने वाली हैं। आचार्य सुनील शास्त्री के अनुसार स्कन्दमाता भी पार्वती का ही स्वरूप हैं। स्कंदकुमार की माता होने के कारण उनका नाम स्कन्दमाता पड़ा। मां के पांचवें स्‍वरूप की साधना तभी पूर्ण मानी जाती है जब साधक अपनी मां और मां की उम्र की स्‍त्री की सेवा पूरे मनोयोग के साथ करता है। मां स्‍कंदमाता की आराधना के दिन भूलकर भी अपनी माता और उनकी उम्र की किसी भी स्‍त्री का अपमान नहीं करना चाहिए।

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