लखनऊ: ऑक्सीजन खत्म, अस्पतालों में बेड भी फुल, कैसे मिले इलाज नहीं बता पा रहे अधिकारी
लखनऊ, अमृत विचार। राजधानी के जिन अस्पतालों में ऑक्सीजन समाप्त हो गयी है और मरीजों की भर्ती नहीं हो पा रही है, ऐसे में मरीजों को कैसे राहत मिले इसका जवाब अधिकारी 24 घंटे बीतने के बाद भी नहीं दे पाये हैं। हालात ये हैं कि निजी अस्पतालों में मरीजों को इलाज नहीं मिल पा …
लखनऊ, अमृत विचार। राजधानी के जिन अस्पतालों में ऑक्सीजन समाप्त हो गयी है और मरीजों की भर्ती नहीं हो पा रही है, ऐसे में मरीजों को कैसे राहत मिले इसका जवाब अधिकारी 24 घंटे बीतने के बाद भी नहीं दे पाये हैं। हालात ये हैं कि निजी अस्पतालों में मरीजों को इलाज नहीं मिल पा रहा है, तो वहीं सरकारी अस्पतालों में पहले ही बेड फुल चल रहे हैं।
शहर के अधिकांश अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी लगातार बनी हुई है। वहीं ऑक्सीजन के सिलेंडरों के लिए मरीजों के परिजनों को ऑक्सीजन एजेंसी तक जाकर संघर्ष करना पड़ रहा है। गढ़ी कनौरा स्थित मेडिकल आक्सीजन केन्द्र पर लोग भारी संख्या में सिलेंडर के लोग संघर्ष करते दिखे। लोगों को लंबी लाइन लगानी पड़ रही है।
बता दें कि शहर के जिन अस्पतालों में ऑक्सीजन की किल्लत लगातार बनी हुई है उनमें प्रमुख रूप से मेयो, मैक्वेल, चरक, चंदन और इंटीग्रल हैं। यहां के प्रबंधनों ने मरीजों की भर्ती बंद कर दी है। इससे पहले इन अस्पतालों में बीते गुरूवार को नोटिस चस्पा की गयी थी। मामला मीडिया में आने के बाद भी स्थिति साफ नहीं हो सकी कि इन अस्पतालों में इलाज मिलेगा या नहीं। मरीज आते हैं तो उन्हें गेट से ही लौटा दिया जाता है। शुक्रवार इस संबंध में जब लखनऊ डीएम से बात करने का प्रयास किया गया तो फोन नहीं उठा और सीएमओ का नंबर बंद बताता रहा ।

डीएम और सीएमओ का फोन नहीं उठता
वहीं आम मरीज के परिजन डीएम और सीएमओ से बात कर कोई मदद मांगना चाहते हैं तो उनका फोन नहीं उठता है। इस संबंध में लगातार शहर के लोग शिकायत भी कर रहे हैं। बलरामपुर अस्पताल में इलाज कराने आये अनुपम शर्मा नाम के मरीज के परिजनों ने बताया कि वह कई दिनों से अस्पताल के चक्कर लगा रहे हैं लेकिन इलाज नही मिल पाया। वहीं डीएम और सीमएओ को फोन मिलाया तो फोन नहीं उठ रहा है।
अपॉइंटमेंट के बाद भी नहीं मिली भर्ती
गोमती नगर निवासी 54 वर्षीय विनोद कुमार मिश्रा पेशे से शिक्षक हैं, उनकी कोविड रिपोर्ट पॉजीटिव है, ऐसे में उन्होंने सीएमओ हेल्पलाइन समेत कई जगह संपर्क किया, उन्हें 24 से 26 घंटे में भर्ती का समय भी मिला, लेकिन कोई गाड़ी उन्हें लेने नहीं पहंची और वह खुद को घर में आइसोलेट करके अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। विनोद के परिजनों ने बताया कि चार दिन से वह भर्ती के इंतजार में हैं लेकिन भर्ती नहीं हो पा रही है।
