मुरादाबाद : घर में रखा युवक का शव, अंतिम संस्कार को परेशान वृद्ध दंपति

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Edited By Amrit Vichar
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मुरादाबाद, अमृत विचार। वास्तव में, कोरोना के खौफ ने हालात बिल्कुल बदल दिए हैं। डर के कारण लोग इस कदर संवेदनशील हो गए हैं कि अपने पड़ोसियों से भी दूरी बना रहे हैं। कोरोना की चपेट में आने से लोगों की जिंदगी की सांस थम रही है और इस नाजुक घड़ी में उनके परिजनों को …

मुरादाबाद, अमृत विचार। वास्तव में, कोरोना के खौफ ने हालात बिल्कुल बदल दिए हैं। डर के कारण लोग इस कदर संवेदनशील हो गए हैं कि अपने पड़ोसियों से भी दूरी बना रहे हैं। कोरोना की चपेट में आने से लोगों की जिंदगी की सांस थम रही है और इस नाजुक घड़ी में उनके परिजनों को पड़ोसियों का भी साथ नहीं मिल पा रहा है। शव को कंधा देना तो दूर पड़ोसी ढांढस बंधाने के लिए भी दरवाजे तक नहीं आ रहे हैं। कुछ ऐसी ही आंखों में आंसू लाने वाली एक हकीकत देखने को मिली मझोला थाना क्षेत्र की पाश कालोनियों में शामिल बुद्धि विहार में।

जहां कोरोना से मौत होने के कारण एक युवक का शव घर के आंगन में रखा था तो उसके बुजुर्ग दादा-दादी इस आस से टकटकी लगाकर दरवाजे की ओर देख रहे थे कि शायद इस दुखद घड़ी में कोई उनका साथ देने आए। लेकिन कोरोना का खौफ इस कदर था कि पड़ोसियों ने अपने घरों के दरवाजे तक बंद कर लिए। थकहार कर बुजुर्ग दंपति ने जब सोशल मीडिया पर गुहार लगाई तो क्षेत्रीय पार्षद व स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने सुध ली। इसके बाद किसी तरह अंतिम संस्कार के लिए शव मोक्षधाम ले जाया गया। एक सप्ताह में इस घर में हुई तीसरी मौत ने बुजुर्ग दंपति को निढाल कर दिया है।

यह ह्दय विदारक मामला है मझोला थाना क्षेत्र के बुद्धि विहार सेक्टर तीन का है। यहां पर बुजुर्ग ईश्वर चंद्र अग्रवाल अपने परिवार के साथ रहते हैं। बताते हैं कि उनके घर के अधिकतर सदस्य कोरोना की चपेट में आ गए। जिस कारण 19 अप्रैल को उनके बेटे प्रेम प्रकाश का निधन हो गया। बेटे के निधन के कुछ घंटे बाद ही दूसरे बेटे वेद प्रकाश की पत्नी का भी कोरोना का निधन हो गया। परिजन अभी दो मौतों के सदमे से उभरे भी नहीं थे कि ईश्वर चंद्र के पोते श्वेत व वैभव अग्रवाल समेत अन्य परिजन भी कोरोना की चपेट में आ गए।

परिवार के कुछ सदस्य तो अस्पताल में भर्ती हैं, जबकि श्वेत व वैभव घर पर ही थे। रविवार को कोरोना के कारण श्वेत अग्रवाल की भी मौत हो गई। चूंकि वैभव भी कोरोना संक्रमित था, लिहाजा वृद्ध ईश्वर चंद्र व उनकी पत्नी के सामने शव का अंतिम संस्कार करने का संकट खड़ा हो गया। उम्मीद थी कि शायद इस संकट की घड़ी में पड़ोसी साथ दे लेकिन कोरोना के खौफ के कारण पड़ोसियों ने दरवाजे तक बंद कर लिए। घंटों इंतजार करने के बाद जब कोई मदद को नहीं आया तो वृद्ध दंपति ने सोशल मीडिया के जरिए पोते के शव के अंतिम संस्कार की गुहार लगाई। जिसके बाद क्षेत्रीय पार्षद प्रदीप शर्मा ने स्वास्थ्य अफसरों के साथ ही पुलिस को सूचना दी। इसके बाद किसी तरह अंतिम संस्कार के लिए श्वेत का शव मोक्षधाम ले जाया गया। बताते हैं कि वहां पर भी कई शव होने के कारण अंतिम संस्कार के लिए काफी देर तक इंतजार करना पड़ा।

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