ब्लैक फंगस से बचना है तो पहले कोरोना संक्रमण से बचे

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अमृत विचार, मुरादाबाद ब्लैक फंगस एक ऐसी बीमारी से आंख से शुरू होकर नाक व गले के जरिए होते हुए फेफड़ों पर अटैक करती है। कोरोना के साथ आई इस बीमारी का अभी ठोस उपचार सामने नहीं आया है। लिहाजा एक्सपर्ट इस बीमारी का सटीक उपचार केवल बचाव को ही बता रहे हैं। इस बीमारी …

अमृत विचार, मुरादाबाद ब्लैक फंगस एक ऐसी बीमारी से आंख से शुरू होकर नाक व गले के जरिए होते हुए फेफड़ों पर अटैक करती है। कोरोना के साथ आई इस बीमारी का अभी ठोस उपचार सामने नहीं आया है। लिहाजा एक्सपर्ट इस बीमारी का सटीक उपचार केवल बचाव को ही बता रहे हैं। इस बीमारी से बचने के लिए जरूरी है कि आप कोरोना संक्रमण से खुद को बचाएं।  क्योंकि यह फंगस सबसे अधिक कोरोना संक्रमित मरीजों को अपना निशाना बना रहा है।

अभी तक जितने भी मरीजों में इस फंगस की पुष्टि हुई है, वह सभी कोरोना संक्रमित रह चुके थे। इस बचाव के बाद भी अगर किसी के अंदर ब्लैक फंगस के लक्षण नजर आते हैं तो वह तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें। अफसरों की लापरवाही इस कदर है कि ब्लैक फंगस के मामले सामने आने के बाद अभी तक प्रशासनिक या फिर स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने उपचार के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए हैं।

करीब एक साल से पूरा देश कोरोना संक्रमण से जूझ रहा है। देश में लाखों लोग इस संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। मौतों का आंकड़ा भी लगातार बढ़ता जा रहा है। इस वर्ष आई कोरोना की दूसरी लहर तो और भी घातक साबित हो रही है। संक्रमण की चपेट में आने वाले अधिकतर मरीज काल के गाल में समा रहे हैं। संक्रमण को रोकने के लिए वैक्सीनेशन के अलावा लगातार लाकडाउन भी लगाया जा रहा है। अगर मुरादाबाद जिले की बात करें तो संक्रमण की चपेट में आने से करीब सवा दो सौ से अधिक मरीजों की मौत हो चुकी है।

इस संक्रमण के बाद आई नई बीमारी ब्लैक फंगस ने स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा दिया है। कोरोना की तरह घातक ब्लैक फंगस भी तेजी से मुरादाबाद जिले में पैर पसारने लगा है। हालांकि अभी भी स्वास्थ्य विभाग के अफसर लोगों को इस फंगस की चपेट में आने की बात स्वीकार नहीं रहे हैं। जबकि हकीकत में प्राइवेट अस्पतालों में लगातार ऐसे मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। कई निजी चिकित्सक इसकी पुष्टि भी कर चुके हैं। चिकित्सकों का दावा है कि आंख से शुरू होने वाला यह फंगस नाक और गले से होता हुआ सीधे फेफड़ों पर अटैक कर रहा है। लिहाजा लक्षण नजर आने पर तुरंत विशेषज्ञों की राय लें।

ब्लैक फंगस के लक्षण
-बुखार आना, सिर दर्द होना, खांसी और सांस फूलना
– नाक बंद हो, नाक में जमने वाली पपड़ी के साथ खून आना
– आंख में दर्द होना, आंख फूल जाना, एक चीज दो दिख रही हो या दिखना बंद हो जाए।
– चेहरे में एक तरफ दर्द-सूजन या फिर सुन्न होना
– दांत में दर्द, दांत हिलना व चबाने में दर्द होना
– उल्टी में या खांसने पर बलगम में खून आना

यह करे उपाय
ब्लैक फंगस के कोई लक्षण नजर आए तो तत्काल सरकारी अस्पताल में या किसी अन्य विशेषज्ञ डॉक्टर को दिखाएं। नाक, कान, गले, आंख, मेडिसिन, चेस्ट या प्लास्टिक सर्जन विशेषज्ञ को तुरंत दिखाएं, ताकि जल्दी इलाज शुरू हो सके।

यह बरते सावधानी
1-खुद या किसी गैर विशेषज्ञ डॉक्टरों, दोस्तों, मित्रों, रिश्तेदारों के कहने पर स्टेरायड दवा कतई शुरू न करें।
2- लक्षण के पहले 5 से 7 दिनों में स्टेरायड देने के दुष्परिणाम हो सकते हैं। बीमारी शुरू होते स्टेरायड शुरू न करें। इससे बीमारी बढ़ सकती है।
3- स्टेरायड का प्रयोग विशेषज्ञ डाक्टर कुछ ही मरीजों को केवल 5 से 10 दिनों के लिए देते हैं, वह भी बीमारी शुरू होने के 5 से 7 दिनों बाद, केवल गंभीर मरीजों को। इससे पहले बहुत सी जांच होना जरूरी हैं।
4- इलाज शुरू होने पर डाक्टर से पूछें की इन दवाओं में स्टेरायड तो नहीं है, अगर है तो ये दवाएं मुझे क्यों दी जा रही हैं।
5- स्टेरायड शुरू होने पर विशेषज्ञ डॉक्टर के नियमित संपर्क में रहें।
6- घर पर अगर आक्सीजन लगाया जा रहा है तो उसकी बोतल में उबालकर ठंडा किया हुआ पानी डालें या नार्मल स्लाइन डालें, बेहतर हो अस्पताल में भर्ती हों।

इनको लेता है चपेट में ब्लैक फंगस
1- कोविड के दौरान जिन्हें स्टेरायड्स- मसलन डेक्सामिथाजोन, मिथाइल, प्रेडनिसोलोन आदि दी गई हों।
2- कोविड मरीज को आक्सीजन सपोर्ट या फिर आईसीयू में भर्ती रहा हो
3- कैंसर, किडनी, ट्रांसप्लांट आदि की दवाएं चल रही हों।

क्या कहते एक्सपर्ट
शुरूआती दौर में लोगों के आखों में सूजन के साथ ही सर में दर्द जैसी समस्या पाई जा रही है। अभी तक अधिकतर लोगों में कोरोना संक्रमण के बाद ये लक्षण पाए जा रहे है। हालांकि पिछले छह दिन में ब्लैक फंगस के कई मरिजों देख चुका हूं।-डा. मंजेश राठी, दिमाग व नसों के विशेषज्ञ

ब्लैक फंगस अधिकतर कोरोना और शुगर वाले मरिजों में पाई जा रही है। ये संक्रमण उन लोगों को तेजी से ग्रफ्त में ले रहा है, जिनकी रोग प्रतिरोद्ध क्षमता कंमजोर है। इस संक्रमण से बचने के लिए शुरूआती दौर में ही इलाज करा ले।-डा. गिरजेश कैन, नेत्र रोग विशेषज्ञ

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