टूटी अफसरों की नींद, पहुंचे रतनपुर कलां गांव, अमृत विचार ने उठाया था रहस्यमयी बुखार का मुद्दा
मुरादाबाद/पाकबड़ा/अमृत विचार। रतनपुर कलां गांव में रहस्यमयी बुखार से होने वाली मौतों के बाद आखिरकार स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की नींद खुल गई। अमृत विचार द्वारा गांव में बढ़ रहे मौत के आंकड़ों की हकीकत उजागर करने के बाद मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव में डेरा डाल दिया। एक चिकित्सक के नेतृत्व …
मुरादाबाद/पाकबड़ा/अमृत विचार। रतनपुर कलां गांव में रहस्यमयी बुखार से होने वाली मौतों के बाद आखिरकार स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की नींद खुल गई। अमृत विचार द्वारा गांव में बढ़ रहे मौत के आंकड़ों की हकीकत उजागर करने के बाद मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव में डेरा डाल दिया। एक चिकित्सक के नेतृत्व में पहुंची छह सदस्यीय टीम ने करीब 98 लोगों की कोरोना के साथ ही बुखार की भी जांच की, जिसमें करीब 44 ग्रामीणों की रिपोर्ट निगेटिव आ गई। अन्य की जांच रिपोर्ट दो दिन बाद आएगी। इसके अलावा टीम ने बुखार से पीड़ित कई ग्रामीणों को मौके पर बुलाकर दवा भी दी।
पाकबड़ा थाना क्षेत्र के ग्राम रतनपुर कलां का हाल-बेहाल हो चुका है। इस गांव में कोरोना संक्रमण के बीच रहस्यमयी बुखार ने तेजी से पैर पसार लिए हैं। इसकी चपेट में आने से एक माह के भीतर 20 ग्रामीणों की मौत हो चुकी है। एक की मौत कोरोना संक्रमण के कारण हुई थी। मौजूदा समय में भी अधिकतर घरों में कोई न कोई बुखार से पीड़ित है। गांव के हालात इतने खराब होने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने ग्रामीणों की कोई सुध नहीं ली। हैरानी वाली बात यह है कि उपचार के नाम पर गांव स्थित एक मात्र प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कई दिनों से ताला लटका हुआ है। यही वजह है कि बीमार ग्रामीण गांव के आसपास के निजी अस्पतालों में उपचार कराने को मजबूर हैं।
अमृत विचार ने प्रमुखता से उठाया मुददा तो अफसरों ने ली सुध
ग्रामीणों की इस समस्या और अफसरों की अनदेखी के मामले को अमृत विचार ने प्रमुखता से उठाया। हमारी टीम ने गांव का दौरा कर वहां के हालातों की जानकारी ली। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के प्रति ग्रामीणों का गुस्सा खुलकर सामने आया। इसके बाद अमृत विचार में 17 मई के अंक में ‘रहस्यमयी बुखार ने रतनपुर कलां गांव में पसारे पैर, 20 की मौत’ शीर्षक से खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया। हालांकि इस खबर के बाद भी स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की नींद नहीं टूटी। अलबत्ता लेखपाल ने गांव पहुंचकर पूरे मामले की जानकारी ली और बुखार से पीड़ित ग्रामीणों को 10 किट उपलब्ध कराईं। इसकी जानकारी होने के बाद अमृत विचार ने फिर 18 मई के अंक में ‘बुखार से कराह रहे मरीज, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में लटका ताला’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की। इसके बाद आखिरकार मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की नींद टूट गई। मंगलवार को दिन निकलते ही चिकित्सक डा. सौरभ बरतरिया के नेतृत्व में छह सदस्यीय टीम ने गांव में डेरा डाल दिया।
98 मरीजों का किया चेकअप, बांटीं दवायें
टीम ने गांव पहुंचकर प्रधान के घर के बाहर शिविर लगाया। इसके बाद टीम ने बीमार चल रहे ग्रामीणों की जांचें की। 44 लोगों की एंटीजन जांच कराई गई, जिसमें सभी निगेटिव आए, जबकि 54 ग्रामीणों की आरटीपीसीआर जांच कराई। उसकी रिपोर्ट दो दिन बाद आएगी। इसके अलावा कई ग्रामीणों बुखार व जुकाम से संबंधित दवायें भी दीं। दिन भर चली जांच के बाद टीम दोबारा आने की बात कहकर वापस चली गई। टीम पहुंचने के बाद मंगलवार को ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।
डा. सौरभ बरतरिया ने बताया कि रतनपुर कलां पहुंचकर 72 ग्रामीणों की जांच की गई है। कोरोना संक्रमण नजर नहीं आया है। फिर भी ग्रामीणों से अपील की गई है कि अगर स्वास्थ्य सही नहीं हैं तो वे जांच करा सकते हैं।
बोले लोग
वैसे तो ग्रामीण कई दिन से बीमार चल रहे थे पर कोई सुध नहीं ले रहा था। अमृत विचार ने जब मुद्दा उठाया तो मंगलवार को टीम गांव पहुंची। कई ग्रामीणों की जांच की गई है। -कल्लू पहलवान
सबसे पहले तो अमृत विचार का धन्यवाद। अगर यह समस्या नहीं उठाई जाती तो शायद ही कोई ग्रामीणों की सुध लेता। मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जांच करने के साथ ही दवायें भी वितरित कीं। -इदरीस अहमद
एक माह में 20 ग्रामीणों की मौत होने से सभी दहशत में थे। कई ग्रामीणों का अभी भी उपचार चल रहा है। कोरोना का भय बना हुआ था। लेकिन मंगलवार को जांच के बाद यह भय काफी कम हुआ है। -अल्लादिया
