काशी के प्रकांड विद्वान पंडित रेवा प्रसाद द्विवेदी का निधन, पीएम मोदी ने जताया शोक

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वाराणसी। काशी पांडित्य परंपरा के देदीप्यमान नक्षत्र महामहोपाध्याय रेवा प्रसाद द्विवेदी का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। साहित्य के प्रकांड विद्वान पं. द्विवेदी ने शुक्रवार को मध्यरात्रि में अंतिम सांस ली। शनिवार की सुबह हरिश्चंद्र घाट उनके पांचभौतिक शरीर का दाह-संस्कार किया गया। उनके छोटे पुत्र प्रो. सदाशिव द्विवेदी ने मुखाग्नि दी। उनके …

वाराणसी। काशी पांडित्य परंपरा के देदीप्यमान नक्षत्र महामहोपाध्याय रेवा प्रसाद द्विवेदी का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। साहित्य के प्रकांड विद्वान पं. द्विवेदी ने शुक्रवार को मध्यरात्रि में अंतिम सांस ली। शनिवार की सुबह हरिश्चंद्र घाट उनके पांचभौतिक शरीर का दाह-संस्कार किया गया। उनके छोटे पुत्र प्रो. सदाशिव द्विवेदी ने मुखाग्नि दी। उनके निधन से संस्कृत जगत में शोक की लहर है। पं. रेवा प्रसाद द्विवेदी साहित्य शास्त्र के मूर्धन्य विद्वान थे। बीएचयू के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के प्रमुख, साहित्य विभाग में विभागाध्यक्ष सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर अपने सेवाएं दीं।

पीएम मोदी ने जताया शोक

पंडित रेवा प्रसाद द्विवेदी के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शोक व्यक्त किया है। उन्होंने ट्वीट किया ‘संस्कृत की महान विभूति महामहोपाध्याय पं. रेवा प्रसाद द्विवेदी जी के निधन से अत्यंत दुख पहुंचा है। उन्होंने साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में कई प्रतिमान गढ़े। उनका जाना समाज के लिए अपूरणीय क्षति है। शोक की इस घड़ी में उनके परिजनों और प्रशंसकों को मेरी संवेदनाएं। ओम शांति!।

काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो रामनारायण द्विवेदी ने बताया कि रेवा प्रसाद द्विवेदी साहित्य शास्त्र के मूर्धन्य विद्वान थे। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के पूर्व संकाय प्रमुख रहे। साहित्य शास्त्र के साहित्य विभाग में विभागाध्यक्ष रहे।

उन्होंने अनेकों ग्रंथों की रचना की है। इसमें तीन महाकाव्य अद्भुत हैं। शताब्दी का सबसे बड़ा महाकाव्य स्वातंत्र्यसंभव जो 103 सर्ग का है। इन्होंने दो नाटक और 20 महाकाव्य लिखे थे। इसके अलावा लगभग 6 मौलिक साहित्य शास्त्र के ग्रंथों की रचना की। वह 1950 में मध्य प्रदेश से काशी आए थे।

स्वामी करपात्री के अनन्य शिष्यों में से एक थे पंडित रेवा प्रसाद

पंडित द्विवेदी का जन्म स्थान मध्य प्रदेश का नांदेड था। नवीन साहित्यशास्त्र की स्थापना में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान है। पंडित रेवा प्रसाद द्विवेदी स्वामी करपात्री के अनन्य शिष्यों में से थे। 70 के दशक में काशी में पं. रेवा प्रसाद द्विवेदी ,महंत वीर भद्र मिश्र, विद्या निवास मिश्र, हरिहर नाथ त्रिपाठी, शिव दत्त शर्मा चतुर्वेदी, पं. गोपाल त्रिपाठी, कमलेश दत्त त्रिपाठी, गिरजा शंकर सिंह, बटुक शास्त्री जैसे लोग काशी के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, अकादमिक क्षेत्र में बडे नाम थे।

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