बरेली: अफसरों की सख्ती के बाद भी क्रय केंद्रों में फर्जीवाड़ा
बरेली, अमृत विचार। गेहूं खरीद के अंतिम दिनों में अफसरों की तमाम कोशिशों के बाद भी सरकारी क्रय केंद्रों पर बिचौलिए और माफिया पूरे सिस्टम को पलीता लगाकर केंद्रों पर कब्जा जमाये बैठे हैं। अधिकारी सरकारी रेट पर खरीद की बात कह रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि अधिकांश केंद्रों पर माफियाओं ने अपने …
बरेली, अमृत विचार। गेहूं खरीद के अंतिम दिनों में अफसरों की तमाम कोशिशों के बाद भी सरकारी क्रय केंद्रों पर बिचौलिए और माफिया पूरे सिस्टम को पलीता लगाकर केंद्रों पर कब्जा जमाये बैठे हैं। अधिकारी सरकारी रेट पर खरीद की बात कह रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि अधिकांश केंद्रों पर माफियाओं ने अपने नजदीकियों की ड्यूटी लगा दी है। जो गेहूं लेकर पहुंचने वाले किसानों को लक्ष्य पूरा होने की बात कहकर केंद्रों से वापस कर देते हैं।
फिर किसान मजबूरी में अपना गेहूं औने-पौने दामों में व्यापारियों को बेचता है। बाद में यही गेहूं व्यापारी से खरीद सरकारी खरीद में दर्शाया जाता है। सालों से चल रहे इस खेल में माफिया, फ्लोर मिलर्स और कुछ अफसर भी शामिल हैं। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि पिछले साल की तरह इस साल भी किसान छला जाएगा और सरकारी गोदामों में लाखों का घोटाला निश्चित ही होगा।
जिले में एक अप्रैल से शुरू हुई गेहूं खरीद को आज दो महीना हो जाएगा। किसानों का गेहूं समर्थन मूल्य पर खरीदा जाए इसको लेकर प्रभारी आरएफसी जोगिंदर सिंह समेत सभी अफसर खुद गेहूं खरीद पर नजर रखे हैं मगर केंद्रों पर मानक से अधिक गेहूं खरीद होने की बात कहकर किसानों से ठगी का खुला खेल जारी है। किसानों की गुजारिश पर 1975 रुपये क्विंटल वाला गेहूं 1600 से 1700 से रुपये में खुलेआम व्यापारी खरीद रहे हैं। कई मंडियों में तो गेहूं उठान को लेकर परिवहन की व्यवस्था भी ठीक नहीं है।
साठगांठ से चल रहे इस खेल में सिस्टम से जुड़े कुछ अफसरों की भूमिका संदिग्ध है। सूत्र बताते हैं कि गड़बड़ी के मामले में केंद्र प्रभारियों पर भले ही कार्रवाई की जा रही है, लेकिन अब भी शासन की मंशा के बजाय माफिया की प्लानिंग से ही खरीद चल रही है। जो एजेंसियां गेहूं खरीद रही हैं, वहां उनका स्टॉफ न के बराबर है। अधिकांश क्रय एजेंसियों ने आढ़तियों के ही प्राइवेट कर्मचारी गेहूं खरीद में लगा रखे हैं। नवाबगंज, बहेड़ी, फरीदपुर, आंवला समेत कुछ स्थानों पर गेहूं खरीद के तमाम केंद्र ऐसे हैं, जहां इस तरह से गड़बड़ी होने की बात कही जा रही है।
हर साल यूं ही चलता है ये खेल
शासन व जिला प्रशासन भले ही सख्ती और पारदर्शिता का दावा करे, लेकिन गेहूं और धान की सरकारी खरीद में माफियागिरी पर लगाम नहीं लग सकी है। बीते साल भी सरकारी गेहूं खरीद में बिचौलियों के माध्यम से खरीद गए गेहूं से माफियाओं ने करोड़ों के वारे-न्यारे किए थे। अब एक बार फिर यही स्थिति दोहराई जा रही है। लाकडाउन में भले ही उपज क्रय केंद्रों तक लाने की किसानों को छूट है मगर कई तरीकों की बंदिशों से परेशान किसानों से माफिया डरा धमाकर कम दाम में गेहूं खरीदकर ठिकाने लगा रहे हैं।
बड़े किसानों के खेतों में पहुंचकर हो रहा सौदा
शासन प्रशासन की तमाम कोशिशों के बाद भी जहां उनके मातहत किसानों को उनका हक नहीं दिला पा रहे हैं वहीं कुछ इलाकों में माफिया और बिचौलिये खरीद के अंतिम दिनों में बड़े जोत वाले किसानों के खेतों में जाकर सीधे सौदेबाजी कर रहे हैं और उनका गेहूं केंद्रों तक नहीं पहुंचने दे रहे। सूत्रों का कहना है औने-पौने दाम में गेहूं खरीदकर जमा कर लिया गया है। व्यापारी साठगांठ कर इसे आसपास के आढ़तियों को महंगे दाम पर बेचने की फिराक में हैं।
उठ रहे सवाल, माफियाओं पर कब होगी कार्रवाई
पिछले दिनों नरियावल उपमंडी में स्थित केंद्र पर एक हजार क्विंटल की फर्जी गेहूं खरीद पकड़े जाने के मामले में क्षेत्रीय विपणन अधिकारी की तहरीर पर केंद्र प्रभारी जितेंद्र सिंह सागर के खिलाफ बिथरीचैनपुर थाने में रिपोर्ट दर्जा करा दी गई। वहीं, सिस्टम पर काबिज माफियाओं पर शिकंजा कब कसेगा यह बड़ा सवाल अब भी बना हुआ है। जबकि जिले में बड़े पैमाने पर गेहूं खरीद से लेकर गेहूं भंडारण व्यवस्था में माफिया सेंध लगा रहे हैं।
गोदामों पर डाला वसूली का खेल भी खूब चल रहा है। इसमें रसुईया स्थित गोदाम की शिकायतें अक्सर रहती हैं। कुल मिलाकर क्रय केंद्र व गोदाम प्रभारियों से साठगांठ होने के कारण किसान हर तरफ से लूटे जा रहे हैं। इससे अफसरों की कार्यशैली पर भी सवाल खड़ा होता है।
कम किसान ही अब गेहूं लेकर क्रय केंद्रों पर पहुंच रहे हैं। माफियागीरी कहीं नहीं हो रही है और किसानों को किसी ने बहकाने की कोशिश नहीं की है। अगर इस तरह की कहीं गड़बड़ी मिली तो निश्चित ही केंद्र प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -राममूति वर्मा, आरएमओ
