क्या कोरोना के इलाज में गोमूत्र है कारगर?, जानें इस दावे की सच्चाई

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नई दिल्ली। कोरोना उपचार में गोमूत्र एवं उससे बनी दवाइयां कितनी कारगर हैं, इसका भले ही कोई वैज्ञानिक आधार न हो लेकिन गोमूत्र की मांग बढ़ गई है और कहीं-कहीं तो दूध से भी महंगा बिक रहा है। राष्ट्रीय कामधेनु आयोग के अध्यक्ष डॉ वल्लभभाई कथूरिया के मुताबिक कई राज्यों में एक हजार से ज्यादा …

नई दिल्ली। कोरोना उपचार में गोमूत्र एवं उससे बनी दवाइयां कितनी कारगर हैं, इसका भले ही कोई वैज्ञानिक आधार न हो लेकिन गोमूत्र की मांग बढ़ गई है और कहीं-कहीं तो दूध से भी महंगा बिक रहा है।

राष्ट्रीय कामधेनु आयोग के अध्यक्ष डॉ वल्लभभाई कथूरिया के मुताबिक कई राज्यों में एक हजार से ज्यादा कोरोना पॉजिटिव मरीजों का गोमूत्र एवं पंचगव्य से बनी दवाइयों से सफल इलाज किया गया है। हरिद्वार, काशी, अहमदाबाद, राजकोट, बुरहानपुर, सेंधवा एवं मुंबई में कई गौशालाओं में मरीजों का इलाज का दावा किया जा रहा है हालांकि अभी तक आयुष मंत्रालय ने इसकी पुष्टि नहीं की है, मगर डॉ कथूरिया के मुताबिक दो सौ मरीजों पर किए गए ट्रायल की विस्तृत रिपोर्ट आयुष मंत्रालय को सौंपी गई है जिस पर विशेषज्ञों की एक टीम विचार कर रही है।

कोरोना में गोमूत्र के प्रयोग की बातें अभी तक किसी भी वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्रों से नहीं मिली है लेकिन कुछ राजनीतिज्ञ एवं गोशाला संचालकों द्वारा इसका जोर शोर से प्रचार करने के कारण गोमूत्र की मांग बढ़ गई है। राष्ट्रीय कामधेनु आयोग ने गो विज्ञान पर आधारित एक ट्रायल करवाया है और जिसमें कुछ डॉक्टरों के भी हस्ताक्षर हैं।

इस रिपोर्ट में गोमूत्र गोबर गाय के दूध भी एवं छाछ से बनी कुछ दवाइयों का प्रयोग किया गया है और उन दवाइयों का जिक्र करते हुए आयुष मंत्रालय से मांग की गई है कि आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में गोमूत्र से बनी दवाइयों को अधिकृत किया जाए और कोरोना के मरीजों पर प्रयोग करने के लिए आयुर्वेदिक डाक्टरों को दिशा निर्देश दिए जाएं। मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक गोमूत्र पर बनी दवाइयों पर किए गए ट्रायल रिपोर्ट का अध्ययन करवाया जा रहा है।

कुछ गो शालाओं में कोविड सेंटर भी खोले गए हैं। जहां पर गोबर गोमूत्र एवं पंचगव्य से बनी दवाइयों का प्रयोग किया जा रहा है।
राष्ट्रीय कामधेनु आयोग का यह भी कहना है कि गौशालाओं में गोमूत्र एवं दवाइयों की मांग बढ़ गई है। कहीं-कहीं पर दूध से गो मूत्र महंगा हो गया है। गौ प्रचारक यह भी दावा कर रहे हैं कि यदि सामान्य व्यक्ति भी सुबह 15 से 20 एमएल गोमूत्र आधे गिलास पानी में सेवन करता है तो उससे इम्यूनिटी में काफी सुधार देखा गया है। कुछ लोग गोमूत्र का सेवन सैनिटाइजर और गरारा में भी कर रहे हैं।

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