उपभोक्ता हेल्पलाइनों के प्रति राज्यों के ढीले रुख से केंद्र मायूस
संजय सिंह, नई दिल्ली, अमृत विचार। उपभोक्ताओं की शिकायतें सुनने और उनका समाधान दिलाने के मकसद से केंद्रीय स्तर पर स्थापित नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन की तर्ज पर प्रत्येक राज्य में स्टेट कंज्यूमर हेल्पलाइन स्थापित करने की योजना राज्य सरकारों के असहयोग तथा ढीलेपन के कारण पूरी तरह परवान नहीं चढ़ पा रही है। स्टेट हेल्पलाइन …
संजय सिंह, नई दिल्ली, अमृत विचार। उपभोक्ताओं की शिकायतें सुनने और उनका समाधान दिलाने के मकसद से केंद्रीय स्तर पर स्थापित नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन की तर्ज पर प्रत्येक राज्य में स्टेट कंज्यूमर हेल्पलाइन स्थापित करने की योजना राज्य सरकारों के असहयोग तथा ढीलेपन के कारण पूरी तरह परवान नहीं चढ़ पा रही है।
स्टेट हेल्पलाइन स्थापित करने के लिए केंद्र सरकार बाकायदा राज्यों को पैसा देती है। वर्ष 2018-19 और 2019-20 के दौरान उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, चंडीगढ़ और पुडुचेरी समेत पांच राज्यों की केंद्र की ओर से इस मद में 121.36 करोड़ रुपये की राशि प्रदान की गई। लेकिन केवल चंडीगढ़ और पुडुचेरी ने अपने हिस्से की 23.56 करोड़ रुपये की राशि खर्च करने का कंप्लीशन सर्टिफिकेट पेश किया है। जबकि उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश की ओर से कोई प्रमाणपत्र नहीं दिया गया।
कंज्यूमर स्टेट हेल्पलाइन के प्रति कुछ राज्य सरकारें कितनी गंभीर हैं इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि बिहार, नगालैंड और पुडुचेरी में कंज्यूमर हेल्पलाइन स्थापित तो हो गई हैं मगर उन्हें चालू नहीं किया गया है। इतना ही नहीं, दिल्ली, गोवा और लद्दाख ने स्टेट कंज्यूमर हेल्पलाइन के प्रति कोई रुचि तक नहीं दिखाई है।
एक तरफ जहां राज्यों का रवैया ढीला है। वहीं केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आने वाले उपभोक्ता मामलों की सुनवाई एवं निवारण के लिए उपभोक्ता मामले मंत्रालय की ओर से अक्टूबर, 2017 में स्थापित नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन सफलतापूर्वक कार्य कर रही है।
यही नहीं, इससे संबंधित अहमदाबाद, बंगलूर, गुआहाटी, जयपुर, कोलकाता तथा पटना में स्थापित जोनल कंज्यूमर हेल्पलाइने भी अच्छे से कार्य कर रही हैं। इसका पता इस बात से चलता है कि नेशनल हेल्पलाइन के जरिये अब तक प्राप्त लगभग 20 लाख शिकायतों में 90 फीसद से ज्यादा का समाधान किया जा चुका है। कोरोना लाकडाउन के कारण 2020 में नेशनल हेल्पलाइन में 28 फीसद से ज्यादा शिकायतें ई-कामर्स कंपनियों के खिलाफ आईं।
उपभोक्ता मामले विभाग का इरादा
मालूम हो कि ई-कामर्स के चलन के साथ ग्राहकों की बढ़ती शिकायतों के मद्देनजर केंद्र सरकार ने 20 जुलाई, 2020 से नया उपभोक्ता संरक्षण कानून, 2019 लागू किया है। ये 1986 के पुराने उपभोक्ता संरक्षण कानून का संशोधित रूप है। नए कानून में ई-कामर्स कंपनियों को भी उपभोक्ता संरक्षण के दायरे में ला दिया गया है। साथ ही उपभोक्ताओं को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से शिकायत दर्ज कराने जबकि आयोगों को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम सुनवाई करने की अनुमति दी गई है।
ऐक्ट में प्रत्येक उत्पाद या सेवा में खामी, झूठे प्रचार आदि के मामलों में उत्पादक, निर्माता, सेवा प्रदाता तथा विक्रेता की जवाबदेही के साथ दावे पर क्षतिपूर्ति और जुर्माने की मात्रा भी तय कर दी गई है। इसमें विवादों के हल के लिए मध्यस्थता का प्रावधान भी है।
नए ऐक्ट के तहत केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) की स्थापना की गई है। जिसने 24 जुलाई, 2020 से काम करना प्रारंभ कर दिया है।
प्राधिकरण के महानिदेशक को अन्वेषण शाखा के माध्यम से किसी भी शिकायत की जांच शुरू कराने और कानूनी कार्रवाई करने का अधिकार है। वो खुद अपनी तरफ से भी जांच शुरू कर सकता है और किसी भी उत्पाद/सेवा को बाजार से वापस लेने का आदेश जारी कर सकता है।
नए कानून के अंतर्गत उपभोक्ता आयोग नाम से उपभोक्ताओं की शिकायतें सुनने व समाधान देने का जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर तीन स्तरीय अर्द्ध-न्यायिक तंत्र विकसित किया गया है। जिला और राज्य स्तरीय आयोगों की स्थापना एवं संचालन की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है। जिसके लिए केंद्र सरकार मदद प्रदान करती है। जबकि राष्ट्रीय आयोग केंद्र की जिम्मेदारी है।
