मुरादाबाद: बाढ़ के अलर्ट से शहरियों की बढ़ी धड़कनें, जिम्मेदारों को नही कोई चिंता
मुरादाबाद, अमृत विचार। राज्य आपदा प्रबंधन समिति ने मुरादाबाद को बाढ़ के मद्देनजर संवेदनशील घोषित किया है। जिससे रामगंगा नदी तट के कालोनियों में रहने वाले लोग चिंतित नजर आ रहे हैं। नदी तट पर बांध निर्माण की मांग करने वाले लोग फिर से हुंकार भरने की तैयारी में है। जबकि नगर निगम, एमडीए और …
मुरादाबाद, अमृत विचार। राज्य आपदा प्रबंधन समिति ने मुरादाबाद को बाढ़ के मद्देनजर संवेदनशील घोषित किया है। जिससे रामगंगा नदी तट के कालोनियों में रहने वाले लोग चिंतित नजर आ रहे हैं। नदी तट पर बांध निर्माण की मांग करने वाले लोग फिर से हुंकार भरने की तैयारी में है। जबकि नगर निगम, एमडीए और सिंचाई विभाग को इसकी फिक्र ही नहीं है।
शहरी क्षेत्र से सटकर बहने वाली रामगंगा नदी पर बांध की मांग वर्ष 2010 में उठी थी। जिसके लिए रामगंगा तटबंध निर्माण संघर्ष समिति का गठन हुआ। 2012 में इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल कर दीं गईं। इसके बाद सिंचाईं एवं बाढ़ नियंत्रण विभागा ने 12.5 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में तटबंध निर्माण के लिए 1200 करोड़ रुपये खर्च का प्रस्ताव तैयार किया।
समिति ने बाढ़ बचाव के मुद्दे पर सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण विभाग, नगर निगम और एनडीए को पक्षकार बनाया गया है। मामले की सुनवाई जारी है। उधर, मौसम विभाग ने इस साल अत्यधिक वर्षा से बाढ़ की संभावना जताई है। जिसके लिए प्रशासन को सतर्क किया गया। संभावना है कि अबकी पहाड़ों में बारिश की वजह से अचानक नदियों का जलस्तर बढ़ेगा। ऐसे में रामगंगा नदी के आसपास बसी कॉलोनियों के लोगों का डरना स्वाभाविक है।
सूत्रों का कहना है कि उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान नगर निगम ने अपना पक्ष रखते हुए तटबंध निर्माण के लिए मुरादाबाद विकास प्राधिकरण को जिम्मेदार ठहराया है। निगम की ओर से तर्क दिया गया है कि नदी क्षेत्र से सटे इलाकों की कालोनियों का निर्माण और विस्तार मुरादाबाद विकास प्राधिकरण ने कराया है, तो तटबंध की जिम्मेदारी भी एमडीए की ही है।
सुनवाई के दौरान सक्रिय होते हैं विभाग
तटबंध प्रकरण की हाईकोर्ट में सुनवाई की तिथि नजदीक आने के साथ जिम्मेदार विभाग के कर्मचारी-अधिकारी सक्रिय नजर आते हैं। पांच माह पहले नगर निगम और सिविल प्रशासन की टीम ने नदी तट से सटे निर्माण तोड़ा था। संघर्ष समिति के सदस्यों का कहना है कि कभी-कभी नदी को साफ करने का अभियान भी तेज हो जाता है। इस कार्रवाई के विवरण के साथ जिम्मेदार विभाग के प्रतिनिधि हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखने पहुंच जाते हैं। बाद में सब कुछ शांत हो जाता है।
यह हैं नदी क्षेत्र की प्रमुख कालोनियां
आशियाना, टीडीआई, मधुर ग्रीन, जिगर कालोनी, शाह बुलाकी शाह की मजार क्षेत्र, नवाबपुरा, काली मंदिर, जामा मस्जिद, बरबलान लालबाग, वारसी नगर
राममोहन श्रीवास्तव, अध्यक्ष रामगंगा तटबंध निर्माण संघर्ष समिति का कहना है कि 2010 में यह मांग उठायी। 2012 में दो रिट हाईकोर्ट में दाखिल की गईं। जिसमें शहरी क्षेत्र में नदी के तटबंध अनिवार्यता की मांग स्वीकार कर ली गई। यह अगल बात है कि उसकी समय सीमा तय नहीं की गई। निर्माण और खर्च के प्रबंध की मांग लंबित है। तीन माह पहले सुनवाई हुई थी। जिसमें नगर निगम ने इसकी जिम्मेदारी एमडीए की बताते हुए सुनवाई की दूसरी तिथि मुकरर्र करा ली। अभी लाकडाउन की वजह से कोर्ट बंद हैं।
