बरेली: पोस्ट कोविड मरीजों में पल्मोनरी फाइब्रोसिस का खतरा
बरेली, अमृत विचार। कोरोना संक्रमण से ठीक हो चुके मरीजों में पल्मोनरी फाइब्रोसिस का खतरा बढ़ गया है। अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद कई मरीजों को दोबारा भर्ती होना पड़ रहा है। मरीजों में सांस फूलने की समस्या आती है। डाक्टरों का कहना है कि लक्षण दिखने पर तुरंत जांच कराएं। लापरवाही करने पर …
बरेली, अमृत विचार। कोरोना संक्रमण से ठीक हो चुके मरीजों में पल्मोनरी फाइब्रोसिस का खतरा बढ़ गया है। अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद कई मरीजों को दोबारा भर्ती होना पड़ रहा है। मरीजों में सांस फूलने की समस्या आती है। डाक्टरों का कहना है कि लक्षण दिखने पर तुरंत जांच कराएं। लापरवाही करने पर जीवनभर इस बीमारी से जूझना पड़ सकता है।
300 बेड कोविड अस्पताल के सीएमएस डा. बागीश वैश्य ने बताया कि कोरोना संक्रमण फेफड़ों के छोटे-छोटे हिस्सों को काफी नुकसान पहुंचा देता है। फेफड़ों पर हुए घाव तो भर जाते हैं। बावजूद इनमें सूजन बनी रहती है। यह सिटी स्कैन में साफ दिखता है। इसकी वजह से ऑक्सीजन और कार्बन डाई आक्साइड का संचालन कम हो जाता है जिससे फेफड़ों की कार्यक्षमता पर प्रभाव पड़ता है। इस कारण व्यक्ति को सांस लेने में परेशानी होती है। कई बार यह दिक्कत इतनी बढ़ जाती है कि मरीज को आक्सीजन सपोर्ट पर भी लेना पड़ता है।
ये हैं बीमारी के प्रमुख लक्षण
300 बेड कोविड अस्पताल के सीएमएस डा. बागीश वैश्य ने बताया कि पल्मोनरी फाइब्रोसिस के प्रमुख लक्षणों में सांस लेने में परेशानी, बहुत अधिक थकान महसूस होना, सूखी खांसी, कुछ दूर चलने पर सांस फूल जाना शामिल आदि है। पल्मोनरी फाइब्रोसिस बीमारी अधिक मोटे, फेफड़ों से संबंधित पूर्व की बीमारी व डायबिटीज आदि के मरीजों में ज्यादा होती है। यह समस्या 60 से अधिक उम्र वाले मरीजों में भी आ रही है।
इसके अलावा लंबे समय तक वेंटिलेटर पर रहे कोविड मरीजों को भी इसका खतरा ज्यादा होता है। उन्होंने बताया कि बीमारी के इलाज में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका स्टेरायड की है। लगातार चार से छह सप्ताह तक मरीज को स्टेरायड देना पड़ता है। इसके अलावा ब्रीथिंग एक्सरसाइज, एंटी फाइब्रोटिक दवाओं से इसका इलाज संभव है। इसकी दिक्कत या परेशानी समझने के लिए सिटी स्कैन कराना जरूरी है।
