बरेली: 1100 पत्रावलियों की जांच में उलझे दो जनपदों के अधिकारी

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। पीलीभीत नगर पालिका परिषद के वर्तमान और पूर्व चेयरमैन के खिलाफ लोकायुक्त के यहां से जांच बैठी है। जांच के बजाय इस प्रकरण में दो जनपदों के अधिकारी उलझ गए हैं। 2017 से लेकर अब तक चेयरमैन के लिए राज्य सरकार ने किन मदों में कितना धन आवंटित किया? और कहां-कहां धनराशि …

बरेली, अमृत विचार। पीलीभीत नगर पालिका परिषद के वर्तमान और पूर्व चेयरमैन के खिलाफ लोकायुक्त के यहां से जांच बैठी है। जांच के बजाय इस प्रकरण में दो जनपदों के अधिकारी उलझ गए हैं। 2017 से लेकर अब तक चेयरमैन के लिए राज्य सरकार ने किन मदों में कितना धन आवंटित किया? और कहां-कहां धनराशि खर्च की गयी? आदि बिंदुओं की जांच करनी है।

इसमें करीब 1100 से ज्यादा पत्रावलियों की जांच होनी हैं। पत्रावलियों की संख्या देख अधिकारी जांच से कतरा रहे हैं। पूर्व में पीलीभीत के अपर जिलाधिकारी प्रशासन को जांच सौंपी गयी लेकिन जांच नहीं हुई। वहां के प्रशासन ने मंडलायुक्त को यह कहते हुए रिपोर्ट भेज दी कि ढेरों पत्रावलियां हैं, इसमें उच्च स्तरीय जांच की जरूरत है।

इसके बाद मंडलायुक्त ने अप्रैल में कोविड काल में तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की जिसमें अपर आयुक्त वित्त बरेली मंडल, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व मनोज कुमार पांडेय, पीडब्ल्यूडी के अधीक्षण अभियंता देवेश कुमार तिवारी को नामित किया। इसमें देवेश कुमार मई में सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उनके स्थान पर हरस्वरूप सिंह अधीक्षण अभियंता बनकर आए हैं।

बताते हैं कि उनके पास बरेली और पीलीभीत जनपद का भी चार्ज है। जांच रिपोर्ट तलब होने के बाद अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व अधीक्षण अभियंता को कई बार बुला चुके हैं, लेकिन वह कभी बैठक में शामिल होने नहीं आए। इन दिनों अपर आयुक्त वित्त भी अवकाश पर हैं। ऐसे में चेयरमैन के खिलाफ जांच नहीं हो सकी।

कुछ दिन पहले मंडलायुक्त आर रमेश कुमार ने जांच पूरी नहीं होने पर नाराजगी जतायी और संबंधित अधिकारियों का स्पष्टीकरण तलब कर लिया। अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व ने मंडलायुक्त को बताया कि अप्रैल और मई में कोविड काल के चलते जांच प्रभावित रही। कोविड काल में व्यवस्तता के चलते जांच नहीं हो सकी।

यह भी बताया कि प्रकरण में कार्रवाई के लिए नामित सदस्यों को बैठक में बुलाया मगर तय तिथि पर कोई भी सदस्य उपस्थित नहीं हुआ। अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व ने मंडलायुक्त से जांच पूरी करने के लिए एक सप्ताह का समय और मांगा। बता दें कि पीलीभीत के ही प्रदीप कुमार ने लोकायुक्त के समक्ष शिकायत कर गंभीर आरोप लगाए थे।

शिकायत बिल्कुल निराधार
नगरपालिका की चेयरमैन विमला जैसवाल का कहना है कि जब लोकायुक्त की जांच शुरू हुई तो जांच अधिकारी तत्कालीन अपर जिलाधिकारी ने उनसे कई बिंदुओं पर जवाब मांगा था। शासन से कितना पैसा स्वीकृत हुआ और उस धनराशि का उपभोग किस तरह किया गया। कई निर्माण कार्यों की सत्यापन रिपोर्ट भी मांगी गई। सभी बिंदुओं पर साक्ष्यों सहित जवाब भेज दिया गया था। शिकायत बिल्कुल निराधार थी और पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर की गई थी। इस बार चेयरमैन मैं हूं। इससे पहले दो बार मेरे पति प्रभात जायसवाल चेयरमैन रहे। कई बार जांच हुई लेकिन किसी जांच में भ्रष्टाचार या किसी अन्य अनियमितता की पुष्टि नहीं हुई। अगर दोबारा जांच होती है और नये जांच अधिकारी अभिलेख या जवाब मांगते हैं तो उन्हें उपलब्ध कराया जाएगा।

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