रायबरेली: कहीं लकड़ी तो कहीं कंडा, शौचालय बना स्टोर रूम, जिम्मेदार लगा रहे हैं पलाता, जानें कैसे

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रायबरेली। जहां एक ओर केंद्र की मोदी सरकार व प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ स्वच्छ भारत मिशन योजना के अंतर्गत करोड़ों रुपए की योजनाएं बनाकर देश के प्रत्येक परिवार को शौचालय व प्रत्येक ग्राम सभा को सार्वजनिक शौचालय मुहैया कराने का काम कर रहे हैं। ताकि देश खुले में शौच से मुक्त हो सके, और …

रायबरेली। जहां एक ओर केंद्र की मोदी सरकार व प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ स्वच्छ भारत मिशन योजना के अंतर्गत करोड़ों रुपए की योजनाएं बनाकर देश के प्रत्येक परिवार को शौचालय व प्रत्येक ग्राम सभा को सार्वजनिक शौचालय मुहैया कराने का काम कर रहे हैं। ताकि देश खुले में शौच से मुक्त हो सके, और स्वच्छ भारत मिशन की योजना का उद्देश्य साकार हो सके। परंतु कुछ जिम्मेदार सरकार की इस योजना के उद्देश्य को पलीता लगाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं।

जानकारी के अनुसार आपको बताते चलें कि विकास क्षेत्र के अंतर्गत लगभग सभी 53 ग्राम पंचायतों को सार्वजनिक शौचालय उपलब्ध कराए गए। परंतु कुछ ग्राम पंचायतों को छोड़ दिया जाए तो अभी तक अन्य ग्राम पंचायतों में सार्वजनिक शौचालय प्रारंभ नहीं हुए हैं। वह केवल शोपीस बनकर दिखाई दे रहे हैं। यहां तक की सरकार द्वारा स्वच्छ भारत मिशन योजना के अंतर्गत प्रत्येक परिवार को शौचालय उपलब्ध कराने का काम किया गया था। लोगों को शौचालय तो मिले शौच जाने के लिए परंतु लोगों ने उन शौचालयों में लकड़ी कंडा भरकर सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना की पूर्ण रूप से सत्या पीट दी है।

कुछ ग्राम पंचायतों में तो सार्वजनिक शौचालय ऐसी जगह बनाए गए हैं, जहां उनका उपयोग न के बराबर साबित हो रहा है। वही कुछ ग्राम पंचायतों में अभी भी यह शौचालय पूर्ण रूप से बनकर तैयार भी नहीं हुए हैं। अब ऐसे में सार्वजनिक शौचालय की समस्या को लेकर जब जिम्मेदारों से बातचीत की जाती है तो उनका उत्तर बस यही आता है कि कुछ ही दिनों में यह सार्वजनिक शौचालय शुरू हो जाएंगे कुछ दिन करते-करते महीनों बीत जाते हैं, परंतु सार्वजनिक शौचालय शुरू नहीं होते।

प्रत्येक परिवार को मिलने शौचालय में भरे लकड़ी कंडो को लेकर जब संबंधित ग्राम सभा के प्रधान से बातचीत की जाती है तो उनका कहना होता है कि, अभी हम तो नए-नए प्रधान बने हैं, जानकारी करेंगे अगर ऐसा कुछ है तो उन लोगों के ऊपर कार्यवाही की जाएगी। अब देखने वाली बात यह होगी कि आखिरकार सरकार की ऐसी महत्वाकांक्षी योजनाओं का लाभ जिम्मेदार कब तक लोगों को दिला पाते हैं या फिर पुरानी परंपरा के अनुसार केवल ऐसी महत्वाकांक्षी योजनाओं पर लीपापोती होती रहेगी।

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