सिर्फ प्रेम
मेरे पास थोड़े-से सुख हैं जो मेरे भीतर से नहीं कहीं और से आते हैं मुझ तक मेरे पास दुख हैं जो किसी और ने दिए हैं मुझे मेरे पास रिश्ते हैं जिन्हें मैंने नहीं चुना मेरे मित्र है जो जब चाहें छोड़कर जा सकते है मुझे मेरे पास एक देह है कहते हैं कि …
मेरे पास थोड़े-से सुख हैं
जो मेरे भीतर से नहीं
कहीं और से आते हैं मुझ तक
मेरे पास दुख हैं
जो किसी और ने दिए हैं मुझे
मेरे पास रिश्ते हैं जिन्हें मैंने नहीं चुना
मेरे मित्र है
जो जब चाहें छोड़कर जा सकते है मुझे
मेरे पास एक देह है
कहते हैं कि वह मिट्टी से बना है
और किसी एक दिन
मिट्टी में ही मिल जाना है उसे
एक दिन मैंने खुद से पूछा –
क्या इस दुनिया में ऐसा कुछ नहीं
जो नितांत मेरा अपना हो
उसी पल मन के किसी कोने से
उचककर प्रेम ने कहा – मैं हूं न
मैंने प्रेम को छूकर देखा
और उसी पल मुझे महसूस हुआ
कि मैं प्रेम से भरने लगा हूं
मेरे जीवन की वह अकेली चीज
जो किसी का मोहताज नहीं
जिस पर सिर्फ मेरा नियंत्रण है
- ध्रुव गुप्त
