हरदोई: सपा को अपनों ने दिया धोखा या प्रशासन ने निभाई अहम भूमिका!…बड़ा सवाल?
हरदोई। आखिरकार प्रदीप कुमार वर्मा की धर्मपत्नी प्रेमावती जिलापंचायत अध्यक्ष का चुनाव जीत गई। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार नामांकन की शाम को सपा में गुटबाजी के चलते सपा के एक नेताजी पीके वर्मा से मिलने उनके आवास पर गए थे। ज्ञात हो कि सपा की प्रत्याशी मुन्नी देवी को सपा का प्रत्यासी बनवाने …
हरदोई। आखिरकार प्रदीप कुमार वर्मा की धर्मपत्नी प्रेमावती जिलापंचायत अध्यक्ष का चुनाव जीत गई। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार नामांकन की शाम को सपा में गुटबाजी के चलते सपा के एक नेताजी पीके वर्मा से मिलने उनके आवास पर गए थे। ज्ञात हो कि सपा की प्रत्याशी मुन्नी देवी को सपा का प्रत्यासी बनवाने में सुभाष पाल व पद्म राग सिंह पम्मू की अहम भूमिका थी।
इन दोनों नेताओं पर सपा के प्रत्याशी को विजय दिलवाने का दमोरदार था। सपा के कुछ 14 जिलापंचायत सदस्य चुनाव जीते थे व तीन निर्दलीय प्रत्याशी ने अपनी सपा में आस्था जताई थी जिस हिसाब से कुल 17 वोट सपा को मिलने चाहिए थे। अभी कुछ दिन पूर्व में ही पम्मू यादव ने एक समाचार पत्र को बयान दिया था कि उन्हें अपने जिलापंचायत सदस्यों पर पूरा भरोसा है।
यहां यह बताना जरूरी है कि ये वही पम्मू यादव है जो पूर्व में अखिलेश यादव को काले झंडे तक दिखा चुके है। इन्ही नेताजी का एक ऑडियो सपा के प्रत्यासी को हराने का वाइरल हो चुका था कार्यवाही शायद अखिलेश यादव ने इसलिए नहीं की क्योंकि इनका पूरा नाम पद्म राग सिंह यादव है। जितेंद्र वर्मा जीतू की अध्यक्षता में कम से कम भाजपा निर्विरोध नहीं हो सकी।
मुन्नी देवी की हार ने कई सवाल खड़े कर दिए है कि आखिर सपा के ग्यारह वोट कहा चले गए जिन पर पम्मू यादव को भरोसा था। क्या वह ग्यारह वोट बेच दिए गए या बिक गए यह सपा के लिए सोचनीय प्रश्न व जांच का विषय है। सपा के जितने खुद के वोट थे उनका सपा के पक्ष में मतदान न होना क्या किसी साजिश की ओर इशारा नही करते है।
आखिर समाजवादी पार्टी ने पम्मू यादव के उस ऑडियो से सीख क्यो नही ली जिस ऑडियो में पम्मू यादव सपा से गद्दारी करते हुए सुनाई पड़ रहे थे क्या अखिलेश यादव द्वारा कार्यवाही न करने का खामियाजा अखिलेश यादव को हरदोई में भुगतना पड़ा। क्या सपा के मुखिया इस प्रकार के नेताओ के दम पर 2022 में सत्ता में वापसी का सपना देख रहे है।
क्या जैसे पूर्व में जहां जहा भाजपा निर्विरोध हुई थी उस जिले में सपा जिलाध्यक्ष पर अखिलेश यादव का कहर टूट पड़ा क्या उसी तरह हरदोई में भी उन लोगो पर कहर टूटेगा। जिनके कंधों पर सपा के प्रत्याशी को जिताने की जिम्मेदारी थी। क्या सिर्फ इसलिए यह लोग कार्यवाही से बच जाएंगे क्योंकि की यह यादव है। अखिलेश यादव के कहर से यह लोग बच जाए शायद इस कारण इन लोगो ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया कि प्रशासन भाजपा के पक्ष में मतदान करा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर प्रशासन भाजपा की मदद में होता तो शायद भाजपा की बुरी दशा पंचायत चुनाव में न होती और खुद भाजपा के जिलाध्यक्ष के पैतृक गांव में भाजपा अपना बूथ न हारती। मुन्नी देवी के हार के बाद सपा में सोसल मीडिया वार शुरू हो चुका है सपाई एक दूसरे पर तरह तरह के आरोप लगा रहे है। इस सोसल मीडिया वार से यह बात साफ है कि हरदोई की सपा में गुटबजी चरम सीमा पर है।
लेकिन प्रेमावती की जीत ने आज यह दर्शा दिया दिया कि सपा के विधायक ही नहीं भाजपा का गुणगान नहीं कर रहे है बल्कि हरदोई के ज्यादातर समाजवादी पार्टी के नेता, पदाधिकारी भाजपा के इशारे पर कार्य कर रहे है जो अखिलेश यादव के लिए बेहद ही चिंता का विषय है।
