बरेली: कमजोर रणनीति से औंधे मुंह गिरे, अब सत्ता का दबाव बता रहे
बरेली, अमृत विचार। 60 सदस्यों में खुद के 26 सदस्य होने के बावजूद पार्टी दिग्गजों की बगावत से जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी गंवाने के बाद समाजवादी पार्टी ब्लॉक प्रमुख के चुनाव में भी औंधे मुंह गिर गई। जबकि 2022 में यूपी विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में सरकार बनाने का दावा ठोक रही पार्टी …
बरेली, अमृत विचार। 60 सदस्यों में खुद के 26 सदस्य होने के बावजूद पार्टी दिग्गजों की बगावत से जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी गंवाने के बाद समाजवादी पार्टी ब्लॉक प्रमुख के चुनाव में भी औंधे मुंह गिर गई। जबकि 2022 में यूपी विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में सरकार बनाने का दावा ठोक रही पार्टी जिले में महज तीन ब्लॉक प्रमुख ही बनवा सकी। 13 नवंबर को जिलाध्यक्ष अगम मौर्य की ताजपोशी हुए भी एक वर्ष पूरा हो जाएगा। इस अवधि में वह पार्टी में हावी गुटबाजी कहें या कोई अन्य कारण एक भी चुनाव नहीं जिता सके।
हालात यह हैं कि जो जिला पंचायत सदस्य चुनाव जीतने के बाद उनके साथ थे, वे देखते ही देखते भाजपा की गोद में बैठ गए। ब्लॉक प्रमुख चुनाव में भी कुछ इसी तरह का हाल हुआ है। 15 ब्लॉकों में मात्र तीन ब्लॉक प्रमुख ही सपा के बन सके। हालांकि अब सपा नेता अपनी बेहद लचर रणनीति को छिपाने और हार की खिसियाहट मिटाने के लिए इसका कारण ‘सत्ता का दबाव’ बता रहे हैं। सपा के साथ ही कांग्रेस समेत अन्य पार्टियों का भी यही हाल है।
सपा के भुता, शेरगढ़ और फतेहगंज पश्चिमी में ब्लॉक प्रमुख जीते हैं। इनमें भुता ब्लॉक प्रमुख पद की बात करें तो पिछले दिनों हुए जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में समाजवादी पार्टी की करारी हार के बाद से चर्चा थी कि महिपाल सिंह यादव के परिवार के कुछ सदस्यों ने भाजपा के पक्ष में मतदान किया है। हालांकि इसका कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला।
जिन ब्लॉकों में सपा की हार हुई, उसको लेकर जिलाध्यक्ष अगम मौर्य समेत पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि सत्ता के दबाव में उनके प्रत्याशियों को हराया गया। अब सपा नेता कुछ भी कहे लेकिन इससे स्पष्ट है कि पार्टी ब्लॉक प्रमुख जैसे प्रतिष्ठित पद के लिए मजबूत उम्मीदवार तक नहीं तलाश सकी।
सत्ता के दबाव में भाजपा प्रत्याशी को जिताया: शमीम खां सुल्तानी
सपा के महानगर अध्यक्ष शमीम खां सुल्तानी पार्टी प्रत्याशी पूर्व विधायक विजयपाल सिंह की पत्नी सुनीता सिंह के समर्थन में सुबह ही फरीदपुर पहुंच गए थे। एड़ी से चोटी तक जोर लगाने के बाद पार्टी प्रत्याशी की जीत नहीं हो सकी। इस पर पूर्व विधायक के साथ-साथ सपाइयों की पुलिस से नोकझोंक हो गई। महानगर अध्यक्ष ने बताया कि पुलिस प्रशासन फरीदपुर विधायक के इशारे पर भाजपा प्रत्याशी को जिताने के लिए हर संभव कोशिश में लगे थे। सपाइयों पर सख्ती की जा रही थी, जबकि भाजपाइयों को खुली छूट दी गई थी। भाजपा विधायक के दबाव में हेल्परों का गलत तरीके से उपयोग कर जबरन अपने पक्ष में वोट डलवा कर भाजपा ने जीत हासिल की है।
जिपं चुनाव में गद्दारी करने वालों का भी पता नहीं
जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में भाजपा को समर्थन देकर गद्दारी करने वाले दो दिग्गजों के नाम की चर्चाएं तो खूब हुईं लेकिन उन पर भी कार्रवाई को लेकर अग्रिम निर्णय नहीं लिया जा सका है। हालांकि इतना जरूर कहा जा रहा है कि हाईकमान को साक्ष्य सहित गोपनीय रिपोर्ट जिलाध्यक्ष की तरफ से भेज दी गई है। लेकिन इनका नाम कब उजागर होगा या कब एक्शन लिया जाएगा, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि जिन दिग्गजों का नाम प्रकाश में आया उनको कुछ नहीं होगा। ब्लॉक प्रमुखी जितने के बाद अब क्लीनचिट मिलना तय है।
