बरेली: रुविवि की मुख्य परीक्षाओं में पहले दिन पकड़े तीन नकलची

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बरेली, अमृत विचार। महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय की स्नातक और परास्नातक की मुख्य परीक्षाएं गुरुवार से शुरू हो गईं। पहले दिन परीक्षा में अव्यवस्थाएं हावी रहीं। 9 जिलों में आयोजित परीक्षा में तीन छात्राएं नकल के साथ पकड़ी गईं। छात्र-छात्राओं को परीक्षा कक्ष ढूंढने में दिक्कतें हुईं। परीक्षा के दौरान कोरोना नियमों का भी पालन …

बरेली, अमृत विचार। महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय की स्नातक और परास्नातक की मुख्य परीक्षाएं गुरुवार से शुरू हो गईं। पहले दिन परीक्षा में अव्यवस्थाएं हावी रहीं। 9 जिलों में आयोजित परीक्षा में तीन छात्राएं नकल के साथ पकड़ी गईं। छात्र-छात्राओं को परीक्षा कक्ष ढूंढने में दिक्कतें हुईं। परीक्षा के दौरान कोरोना नियमों का भी पालन नहीं हुआ। छात्रों ने मास्क भी नहीं लगाया और परीक्षा शुरू होने से पहले और खत्म होने के बाद छात्र-छात्राओं की भीड़ जुट गई। पहले दिन 25 फीसदी छात्रों ने परीक्षा छोड़ दी।

गुरूवार को बरेली कालेज मे विश्वविधालय की परीक्षा के पहले दिन परीक्षा भवन मे परीक्षा देरहे परीक्षार्थियो की तलाशी लेते सचलदल।

स्नातक द्वितीय व तृतीय वर्ष और परास्नातक अंतिम वर्ष की परीक्षा 312 केंद्रों पर गुरुवार से शुरू हो गई। पहली पाली में 9:00 बजे से 10:30 बजे तक परास्नातक अंतिम वर्ष और द्वितीय पाली में दोपहर 12 बजे से 1:30 बजे तक स्नातक द्वितीय और तृतीय पाली में दोपहर 3 बजे से 4:30 बजे तक स्नातक तृतीय वर्ष की परीक्षा आयोजित हुई। नकलची छात्रों पर नजर रखने के लिए विश्वविद्यालय के तीन सचल दल ने अलग-अलग जिलों के महाविद्यालयों में छापेमारी की। वहीं महाविद्यालयों के सचल दल भी सक्रिय रहे। विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रण कक्ष में सीसीटीवी कैमरों से छात्रों पर नजर रखी गई। महाविद्यालयों में सीसीटीवी कैमरे से नजर रखी गई।

नकल के साथ पकड़ी गईं तीन छात्राएं
मुख्य परीक्षा में 9 जिलों के 312 केंद्रों पर छापेमारी के दौरान तीन नकलची पकड़े गए। तीनों नकलची छात्राएं ही हैं। बरेली कॉलेज के सचल दल ने पहली पाली में नये परीक्षा भवन में एम ब्लॉक में एमएससी गणित की छात्रा को नकल की पर्ची के साथ पकड़ा। वह कपड़ों में नकल छिपाकर लाई थी और उसने हाथ में भी नकल लिख रखी थी। सीसीटीवी से निगरानी के दौरान उसकी हरकतें संदिग्ध दिखीं। वहीं द्वितीय पाली में अलग-अलग महाविद्यालयों में दो छात्राओं को नकल के साथ पकड़ा गया।

गुरूवार को बरेली कालेज मे विश्वविधालय की परीक्षा छूटने के बाद जमा हुए बेग और मोबाइल लेने के लिए परीक्षार्थियो की भीड़।

बरेली कॉलेज में सबसे ज्यादा भीड़
परीक्षा के दौरान सबसे ज्यादा भीड़ बरेली जिले में बरेली कॉलेज में जुटी। यहां पर तीनों पालियों में परीक्षार्थियों की संख्या 1300 से 1400 के आसपास थी। यहां पर स्वकेंद्र के साथ पांच अन्य महाविद्यालयों के केंद्र भी बनाए गए थे। सबसे पहले यहां पर परीक्षा शुरू होने से पहले परीक्षार्थियों की लंबी लाइन लग गई और उनके बीच सामाजिक दूरी नहीं रही। परीक्षाथिर्यों को बिना मास्क के प्रवेश पर रोक थी लेकिन कई छात्र बिना मास्क के ही पहुंचे। कोरोना के डर से शिक्षकों ने परीक्षार्थियों की सही से तलाशी भी नहीं। इसके अलावा उनके हाथों को सेनेटाइज भी नहीं किया गया।

छात्र परीक्षा कक्ष ढूंढने के लिए परेशान रहे। सूचना बोर्ड पर अपना कक्ष तलाशने के दौरान भी भीड़ जुटी। दूसरी पाली में विधि विभाग में कक्ष बनाया गया था लेकिन बोर्ड पर साइकिल स्टैंड के पास लिखा गया। कई छात्र पूर्वी गेट के साइकिल स्टैंड पर पहुंच गए। ऐसे में उन्हें परीक्षा कक्ष में पहुंचने के लिए दौड़ लगानी पड़ गई। बरेली कॉलेज में 10 से अधिक शिक्षक बिना बताए परीक्षा ड्यूटी से गायब हो गए। इस पर प्राचार्य ने नाराजगी भी जाहिर की। छात्र-छात्राओं को मोबाइल व अन्य सामग्री रखने में भी दिक्कत हुई। उन्हें वाहन में सामान नहीं रखने दिया गया। परीक्षा छूटने के बाद सामान लेने में भी काफी दिक्कतें हुईं।

गुरूवार को बरेली कालेज मे विश्वविधालय की परीक्षा देकर बाहर आते परीक्षार्थियो की भीड़

परीक्षा छोड़ने वालों में छात्र अधिक
परीक्षा में पहले दिन 43323 परीक्षार्थियों को शामिल होना था लेकिन 11112 छात्रों ने परीक्षा छोड़ दी। परीक्षा छोड़ने वालों में छात्रों की संख्या छात्राओं से अधिक है। सिर्फ 4.4 फीसदी छात्राओं ने परीक्षा छोड़ी, जबकि 96.6 फीसदी छात्रों ने परीक्षा छोड़ी। तीनों पालियों में 489 छात्राओं और 10624 छात्रों ने परीक्षा छोड़ी है। सबसे ज्यादा परीक्षा द्वितीय पाली में यानी स्नातक द्वितीय वर्ष में 10296 छात्रों व 107 छात्राओं समेत कुल 10402 परीक्षाथिर्यों ने परीक्षा छोड़ी है। इतनी बड़ी संख्या में परीक्षा छोड़ने से कई तरह के सवाल भी खड़े हो रहे हैं। हो सकता है कि कई छात्र द्वितीय वर्ष की परीक्षा देना नहीं चाहते थे और कई सोच रहे थे कि वह बिना परीक्षा के प्रोन्नत हो जाएंगे।

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