बरेली: सामाजिक संस्थाओं की बाढ़, मंडल में 49 हजार पंजीकृत
बरेली, अमृत विचार। समाज में विभिन्न तरह के कार्य कर बदलाव लाने का चोला ओढ़ने वाली सामाजिक संस्थाओं की बाढ़ आ गयी है। कोरोना काल में भी संस्थाओं की संख्या बढ़ती जा रही है। प्रतिदिन 20 संस्थाओं का पंजीयन हो रहा है। कार्यालय सहायक रजिस्ट्रार फर्म्स, सोसाइटीज एवं चिट्स के आंकड़ों पर गौर करें तो …
बरेली, अमृत विचार। समाज में विभिन्न तरह के कार्य कर बदलाव लाने का चोला ओढ़ने वाली सामाजिक संस्थाओं की बाढ़ आ गयी है। कोरोना काल में भी संस्थाओं की संख्या बढ़ती जा रही है। प्रतिदिन 20 संस्थाओं का पंजीयन हो रहा है। कार्यालय सहायक रजिस्ट्रार फर्म्स, सोसाइटीज एवं चिट्स के आंकड़ों पर गौर करें तो मंडल में 49 हजार संस्थाएं पंजीकृत हो गयीं। इसमें 30 हजार संस्थाएं सिर्फ बरेली जनपद की हैं।
ये संस्थाएं कागजों में समाज हित में काम करने का दावा करते हुए गली-मोहल्ला शिक्षा और स्वच्छता व जल संरक्षण की अलख जगाने के कार्य कर रहीं है लेकिन धरातल से संस्थाएं गायब हैं। एक दो हजार संस्थाएं ही सक्रिय भूमिका में बतायी जा रही हैं। आंकड़े यह भी बता रहे हैं कि 15 हजार से अधिक संस्थाएं कुछ कार्य नहीं कर रहीं।
एक बार पंजीकरण कराकर दोबारा नवीनीकरण तक नहीं कराया है। इनकी मॉनीटरिंग नहीं होती है इसलिए ये संस्थाएं कागजों में सक्रिय हैं और विभिन्न तरह से धनराशि वसूल रही हैं। ये संस्थाएं समाज में बदलाव लाने के लिए किस तरह का क्या कार्य कर रही हैं? संस्था चलाने वालों का मुख्य उद्देश्य क्या है, इसकी जानकारी न तो सहायक रजिस्ट्रार को है और न ही इसका लेखा-जोखा कार्यालय सहायक रजिस्ट्रार में है।
सिर्फ 2000 रुपये खर्च संस्थाएं पंजीयन कराकर गली-मोहल्लों में अपने कार्यालय खोल लेती हैं। यहां कहने का मतलब साफ है कि छोटी रकम खर्च कर संस्थाएं बनाने वाले जिम्मेदार दिखावे के समाज सुधारक बने हुए हैं। इनके कार्य न तो समाज में दिख रहे हैं और न ही समाज को दिशा देने में इनकी भूमिका नजर आ रही है।
सहायक रजिस्ट्रार बोले-प्रतिदिन 20 संस्थाएं पंजीकृत हो रहीं
फर्म्स, सोसाइटीज एवं चिट्स के सहायक रजिस्ट्रार अवनीश कुमार सिंह ने बताया कि कोरोना काल में प्रतिदिन 20 संस्थाएं पंजीकृत हो रही हैं। इसमें स्कूल वाले भी संस्थाओं का पंजीयन करा रहे हैं। मंडल में करीब 49 हजार सामाजिक संस्थाएं पंजीकृत हैं। समिति पंजीकरण एक्ट में नवीनीकरण न कराने वाली संस्थाओं के विरुद्ध कार्रवाई होने के सवाल पर सहायक रजिस्ट्रार कहते हैं कि कार्रवाई कुछ नहीं होती है। जिन संस्थाओं के कागजात उनके पास आते हैं। उन्हीं की सही से जांच पड़ताल करते हैं। बाहर संस्थाएं क्या कर रही हैं, इसकी कोई जानकारी नहीं रहती है।
इस एक्ट के तहत होता है समिति का पंजीकरण
संस्था का पंजीकरण सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम 1860 के तहत होता है। संस्था के सचिव की ओर से संस्था के लिए एक औपचारिक आवेदन पत्र के साथ सादे मोटे कागज के केवल एक ही ओर लिखित कराकर देना होता है। समिति के स्मृति पत्र, नियमावली, शुल्क 2000 रुपये नकद या बैंक ड्राफ्ट तथा संस्था के पूर्व में पंजीकृत न होने संबंधी नोटरी शपथपत्र भी लगाना होता है। उपरोक्त कागजातों के आवेदन संबंधित मंडलीय कार्यालय में जमा किया जाता है। पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी होने पर ही समिति पंजीकृत मानी जाती है। प्रमाण पत्र की वैधता समाप्त होने की तिथि से एक वर्ष के बाद नवीनीकरण के लिए आवेदन किया जाता है। प्रार्थना, शपथपत्र व 1000 रुपये अनुमति शुल्क देना होता है।
