बरेली: पहले बिल भरो तब देंगे शव…छह घंटे में बनाया हजारों का बिल
बरेली, अमृत विचार। सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल मजदूर को पुलिस ने इलाज के लिए एक निजी अस्पताल में भेजा था। भर्ती होने के कुछ ही घंटों में मजदूर की मौत हो गई। वहीं अस्पताल की ओर से मजदूर के परिवार को करीब 33 हजार का बिल थमा दिया गया। पूरे बिल का …
बरेली, अमृत विचार। सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल मजदूर को पुलिस ने इलाज के लिए एक निजी अस्पताल में भेजा था। भर्ती होने के कुछ ही घंटों में मजदूर की मौत हो गई। वहीं अस्पताल की ओर से मजदूर के परिवार को करीब 33 हजार का बिल थमा दिया गया। पूरे बिल का भुगतान करने में असमर्थ मजदूर के परिजनों ने कम रुपये देने की बात कही तो अस्पताल कर्मचारियों ने शव को कई घंटों तक रोके रखा। किसी तरह लोगों से मांग कर परिजनों द्वारा कुछ रुपये दिए गए, जिसके बाद अस्पताल कर्मचारियों द्वारा शव परिजनों को सौंपा गया।

महानगर के एक निजी अस्पताल में इंसानियत को शर्मिंदा कर देने वाला मामला सामने आया है। सीबीगंज के मथुरापुर निवासी आजम शाह(40) परसाखेड़ा स्थित सोयाबीन फैक्ट्री में मजदूरी करता था। रविवार की शाम करीब 7:30 बजे वह फैक्ट्री से काम करके पैदल ही घर जा रहा था। रास्ते में झुमका चौराहे के पास रामपुर की ओर से आ रहे एक तेज रफ्तार वाहन ने टक्कर मार दी। मृतक के भाई बबलू ने बताया कि हादसा इतना भीषड़ था कि आजम का दायां पैर भी कट गया था और सिर में गंभीर चोटें भी आईं।

सूचना पर पहुंची पुलिस ने आनन-फानन में आजम को मिनीबाईपास स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया ताकि समय रहते उसका इलाज हो सके। रविवार की रात करीब 9 बजे चिकित्सकों ने आजम का इलाज शुरू हुआ। जहां देर रात करीब 3:30 बजे उसकी मौत हो गई। वहीं दूसरी तरफ मजदूर के परिजन समय से घर न पहुंचने पर परेशान हो रहे थे, जिन्हें आजम के साथ हुई दुर्घटना का कोई इल्म भी नहीं था। वहीं परिजन आजम की तलाश में जुट गए।
परिजनों ने बताया कि सोमवार की सुबह करीब 8 बजे अस्पताल वालों ने फोन किया और उसकी मौत की सूचना दी। मौत की सूचना आजम का भाई बबलू मां अकीला, भाभी आसमा बी व परिवार के अन्य सदस्य अस्पताल पहुंचे। जहां अस्पताल कर्मचारियों ने इलाज के दौरान बने अस्पताल बिल के 33 हजार रुपये और सात हजार दवाइयों के रुपये का भुगतान करने की बात कही। साथ ही एक व्यक्ति द्वारा खून देने की बात कही।

आरोप है कि जब आजम के परिजनों ने 33 हजार की रकम अदा करने में अस्मर्थता जताई तो अस्पताल कर्मचारियों ने शव देने से मना कर दिया। किसी तरह आजम के परिजनों व रिश्तेदारों ने आपसी सहयोग से 10 हजार रुपये एकत्र किए और अस्पताल में जमा किए। जिसके बाद बाकी का उधार दर्ज करते हुए अस्पताल कर्मचारियों ने शव परिजनों को सौंप दिया। परिजनों का कहना है कि अस्पताल की ओर से परिजनों को धमकी दी गई है कि अगर उन्होंने बुधवार तक बकाया राशि जमा नहीं करी तो उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करायी जाएगी। आजम की पत्नी आसमा बी ने बताया कि उनकी दो बेटियां मुस्कान बी(17), व फुरकान बी(15) दो बेटियां हैं।
इज्जतनगर इंस्पेक्टर, सतीश यादव ने बताया कि बिल न दे पाने पर शव को रोक लेने का मामले सामने आया है, मृतक के परिजनों द्वारा लिखित शिकायत देने पर कार्रवाई की जाएगी।
