मुरादाबाद : विभाग में ‘आईरेड’ एप का शोर, इंस्पेक्टर-दरोगाओं को नहीं जानकारी, 2016 में आईआईटी मद्रास ने लांच किया यह साफ्टवेयर
मुरादाबाद, अमृत विचार। आए दिन होने वाले सड़क हादसों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने एनआईसी के सहयोग से एकीकृत सड़क सुरक्षा डेटा बेस तैयार करने के लिए एप विकसित किया था। इंटीग्रेटेड रोड एक्सीडेंट डेटाबेस (आईरेड) नाम के इस एप पर प्रदेश में होने वाले सड़क हादसों का …
मुरादाबाद, अमृत विचार। आए दिन होने वाले सड़क हादसों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने एनआईसी के सहयोग से एकीकृत सड़क सुरक्षा डेटा बेस तैयार करने के लिए एप विकसित किया था। इंटीग्रेटेड रोड एक्सीडेंट डेटाबेस (आईरेड) नाम के इस एप पर प्रदेश में होने वाले सड़क हादसों का विवरण दर्ज करने का दावा किया जा रहा है।
विभाग में इसको लेकर जबरदस्त शोर है। लेकिन, जनपद के अधिकांश थाना प्रभारियों व दरोगाओं को इसके विषय में जानकारी ही नहीं हैं। ऐसे में इसे चलाने के बारे में जानकारी होने का तो प्रश्न ही नहीं उठता।
एसपी ट्रैफिक अशोक कुमार ने बताया कि हादसों का डेटा पलक झपकते ही मिल सके, इसके लिए वर्ष 2016 में आईआईटी मद्रास ने आईरेड नामक एप लांच किया था। मार्च 2020 में पुलिस लाइन के समीप परिवहन और पुलिस विभाग ने इसका ड्राई रन भी किया था। इस दौरान कार और बाइक की टक्कर कराई गई थी। इस हादसे का सारा विवरण आईरेड एप पर दर्ज किया गया था।
इसके बाद विभाग इसे भूल गया। एसपी ट्रैफिक का दावा है कि यह एप जनपद के सभी थानों के इंस्पेक्टर और दरोगाओं के मोबाइल में इंस्टॉल करा दिया गया है। जनपद में होने वाले हादसों की पूरी जानकारी इस पर ही डाउनलोड की जा रही है। इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि किसी भी हादसे के बारे में पूरी जानकारी पलक झपकते ही मिल जाएगी।
इसके अलावा आईओ को वाहन का टेक्निकल मुआयना कराने के लिए आरटीओ कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। इस बारे में कई इंस्पेक्टर और दरोगाओं से बात की गई तो अधिकांश का यह ही कहना था कि आईरेड क्या है, इस बारे में उन्हें जानकारी नहीं है।
एप में दर्ज होती है हादसे की पूरी जानकारी
दुर्घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस इस एप पर हादसे से जुड़ी सारी जानकारी फीड करेगी। इसमें हादसे की तारीख, समय, दुर्घटना स्थल, संबंधित वाहन, दुर्घटना का संभावित कारण आदि अपलोड किया जाएगा। जानकारी अपलोड होते ही पूरा विवरण स्वास्थ्य विभाग, परिवहन विभाग और राष्ट्रीय राजमार्ग के पास पहुंच जाएगा। इसके बाद संबंधित विभाग अपने स्तर से कार्रवाई करेगा।
पीडब्ल्यूडी की भी इसमें मुख्य भूमिका होगी। एप में फीड जानकारी के आधार पर विभाग घटनास्थल का निरीक्षण करेगा। यदि सड़क के कारण दुर्घटना हुई होगी तो आगे की कार्रवाई की जाएगी।
दिया जा चुका है प्रशिक्षण
एसपी ट्रैफिक अशोक कुमार के अनुसार एप चलाने के लिए परिवहन और पुलिस विभाग को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। पुलिस अधीक्षक यातायात श्रवण कुमार सिंह एवं जिला सूचना विज्ञान अधिकारी प्रसन्न पांडेय के निर्देश में रोल आउट मैनेजर चंद्रकांत तिवारी ने इसका प्रशिक्षण दिया था।
बोले दरोगा- आईरेड! यह क्या होता है?
एसपी ट्रैफिक का दावा है कि जनपद में आईरेड एप काम कर रहा है। हादसों की जानकारी संबंधित विवेचक इसमें अपलोड कर रहे हैं। लेकिन, वास्तविकता इससे अलग नजर आई। अमृत विचार ने जब इसको लेकर थाना प्रभारियों से बात की तो अधिकांश को इसके विषय में पता ही नहीं था। कई तो यह भी नहीं जानते कि आईरेड एप क्या बला है। इंस्पेक्टर मुगलपुरा, कटघर, गलशहीद और सिविल लाइंस को आईरेड से जब इस विषय में बात की गई तो सबका एक ही प्रश्न था कि यह क्या चीज है। इंस्पेक्टर मूंढापांडे नवाब सिंह ने भी गोलमोल जवाब देकर टाल दिया।
मुझे नहीं जानकारी की जरूरत
इंस्पेक्टर गलशहीद कपिल सिंह का कहना था कि जो भी करता है कंप्यूटर ऑपरेटर ही करता है। मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। वह यहां ही नहीं रुके। बोले, मेरे थाना क्षेत्र में तो हादसे ही नहीं होते, इसलिए मुझे इसकी जानकारी करने की जरूरत भी नहीं है।
यातायात निरीक्षक अनुज मलिक ने बताया कि हादसा होते ही विवेचक पूरा डेटा इस एप में फीड करते हैं। इसके बाद सीटीएनएस पर काम करने वाला कर्मचारी इन्हें ग्रुप में डाल देता है। सारी जानकारी जिलाधिकारी कार्यालय पहुंच जाती है। यदि किसी घटना के बारे में विस्तृत जानकारी लेनी हो तो पलक झपकते ही पूरा विवरण उपलब्ध हो जाता है। –
