यूपी: युवाओं को लेकर सिद्धार्थ नाथ दिया बड़ा बयान, राजनीतिक दलों पर लगाए ये आरोप
लखनऊ। कैबिनेट मंत्री और राज्य सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा कि 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती मामले में दक्षता के आधार पर तय आरक्षण से अधिक ओबीसी और एससी अभ्यर्थी चयनित हुए हैं। इसमें 23 हजार पदों पर समायोजन कानूनी रूप से संभव नहीं है। इसका मुख्य कारण यह है कि हर …
लखनऊ। कैबिनेट मंत्री और राज्य सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा कि 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती मामले में दक्षता के आधार पर तय आरक्षण से अधिक ओबीसी और एससी अभ्यर्थी चयनित हुए हैं। इसमें 23 हजार पदों पर समायोजन कानूनी रूप से संभव नहीं है। इसका मुख्य कारण यह है कि हर भर्ती की सेवा शर्तें अलग-अलग होती हैं। किसी भी विभाग में भर्ती के पूर्व जिन नियमों के तहत आवेदन मांगे जाते हैं, उसे न भर्ती प्रक्रिया के दौरान बदला जा सकता है और न भर्ती प्रक्रिया पूरी के बाद।
सरकार युवाओं के भविष्य को लेकर बेहद संवदेनशील है, लेकिन कुछ राजनीतिक दलों ने युवाओं को बहकाया है। यह बातें उन्होंने आज पत्रकारों से बातचीत में कहीं। उन्होंने कहा कि पिछले सवा चार साल में सरकार की उपलब्धियां इतनी हैं कि विपक्ष को मुद्दा नहीं मिल रहा है। जिस कारण वह येन केन प्रकारेणन लोगों को गुमराह करने में लगे हैं। विधान सभा चुनाव नजदीक होने के कारण राजनीतिक दल अपनी रोटी सेंकने के लिए युवाओं को भी नहीं बख्श रहे हैं और भरमा कर उनसे धरना प्रदर्शन करा रहे हैं।
जबकि पिछली सरकारों की तुलना में योगी सरकार ने सवा चार साल में करीब सवा चार लाख नौकरियां दी हैं। सरकार का लक्ष्य पांच साल में पांच लाख युवाओं को नौकरियां देने का है। उन्होंने कहा कि 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए निर्धारित 18,598 पदों के सापेक्ष 31,228 अभ्यर्थियों की निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से भर्ती हुई है। इसमें अपनी प्रतिभा के दम पर तय आरक्षण से अधिक ओबीसी और एससी अभ्यर्थी चयनित हुए हैं।
पिछड़ा वर्ग के 12,630 अभ्यर्थी अनारक्षित श्रेणी में अपनी दक्षता के आधार पर चयनित हुए हैं। उन्होंने बिना किसी राजनीतिक दल का नाम लिए कहा कि प्रदेश में जब इनकी सरकारें थीं, तब इन्होंने युवाओं के लिए कुछ नहीं किया। न ही युवाओं को रोजगार मुहैया कराया और न ही समुचित नौकरियां दीं, लेकिन अब यही लोग युवाओं को फिर गुमराह कर उनके भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं। नौकरी दिलाने के लिए नाम पर चंदा उगाह रहे हैं और ठेका भी ले रहे हैं।
