यूपी: पढ़ाई के साथ आसानी से सुलझेगी अपराधों की गुत्थी, साक्ष्यों के अभाव में नहीं छूटेंगे अपराधी

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लखनऊ। अपराधों की गुत्थी सुलझाने में अब ज्यादा समय नहीं लगेगा। साक्ष्य के अभाव में दोषी छूट नहीं पाएंगे। वैज्ञानिक प्रमाणिक साक्ष्य के आधार पर उन्हें सलाखों के पीछे भेजा जाएगा। दरअसल रविवार को उत्तर प्रदेश में स्टेट इंस्टीट्रयूट ऑफ फोरेंसिक साइंसेज का शिलांयास किया जाना है। डीएनए के क्षेत्र में स्थापित किया जाने वाला …

लखनऊ। अपराधों की गुत्थी सुलझाने में अब ज्यादा समय नहीं लगेगा। साक्ष्य के अभाव में दोषी छूट नहीं पाएंगे। वैज्ञानिक प्रमाणिक साक्ष्य के आधार पर उन्हें सलाखों के पीछे भेजा जाएगा। दरअसल रविवार को उत्तर प्रदेश में स्टेट इंस्टीट्रयूट ऑफ फोरेंसिक साइंसेज का शिलांयास किया जाना है। डीएनए के क्षेत्र में स्थापित किया जाने वाला यह सेंटर ऑफ एक्सीलेंस अपने आप में देश का एक अनूठा संस्थान होगा। इंस्टीट्रयूट में जहां पढ़ाई के दौरान छात्र अपराधों की गुत्थी सुलझाने के गुर सीखेंगे। वहीं साक्ष्यों का परीक्षण करने के लिए यहां लैब भी स्थापित होगी।

इसकी शुरुआत होने के बाद हत्या, लूट, डकैती, बलात्कार जैसै मामलों में मिलने वाले सबूतों की जांच आधुनिक प्रणाली से होगी। अभी तक जहां जांच रिपोर्ट आने में चार से पांच माह का समय लग जाता है, लेकिन अब यह समय घटकर एक से डेढ़ माह हो जाएगा। सबसे खास बात यह कि आधुनिक प्रणाली से जांच होने पर परीक्षण की गुणवत्ता बढ़ेगी। जांच जल्दी शुरू होने पर जहां मुकदमे का ट्रायल जल्दी शुरू हो जाएगा वहीं दोषियों को जल्दी सजा मिलेगी और आमजनों का पुलिस पर भरोसा भी बढ़ेगा। प्रदेश में अभी भी कई फोरेंसिक लैब हैं, लेकिन उनकी गुणवत्ता उतनी ज्यादा अच्छी नहीं है।

वैज्ञानिक प्रमाणिक साक्ष्य मिलने पर जहां दोषियों की सजा का प्रतिशत बढ़ेगा, वहीं पीड़ितों के मन भी अपने साथ जल्दी ही न्याय मिलने की उम्मीद भी जगेगी। इस संबंध में एडीजी टेक्निकल संदीप सलुंके ने बताया कि सरोजनीनगर इलाके में बनने वाले इस इंस्टीयूट का शिलांयास रविवार को होना है। यहां पर फोरेंसिक साइंस के साथ ही सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की जाएगी। उन्होंने कहा कि इसकी शुरुआत होने के बाद महानगर स्थित फोरेंसिक लैब को भी यहीं पर स्थानांतरित कर दिया जाएगा।

वर्तमान में आठ एफएसएल हैं कार्यरत
अपराधियों द्वारा छोड़े गए साक्ष्यों का परीक्षण करने के लिए वर्तमान में प्रदेश में आठ फोरेंसिक लैब कार्यरत हैं। यह लैब राजधानी के साथ ही आगरा, वाराणसी, गाजियाबाद गोरखपुर, मुरादाबाद, प्रयागराज, झांसी में स्थापित हैं। प्रदेश में होने वाले अपराधों से संबंधित साक्ष्य परीक्षण के लिए यहीं पर भेजे जाते हैं। चूंकि प्रदेश में घटने वाले अपराधों की संख्या ज्यादा है। लिहाजा यहां पर काम का दबाव ज्यादा रहता है और रिपोर्ट आने में कई-कई महीनों का समय लग जाता है। जानकारों की मानें तो इनकी गुणवत्ता भी बहुत ज्यादा अच्छी नहीं है।

इंस्टीट्यूट के विभाग और प्रयोगशालाएं
भौतिकी-आग्नेयशास्त्र प्रयोगशाला, फोरेंसिक एकाउस्टिक्स और प्रलेख प्रयोगशाला।
रसायन-विस्फोटक, नारकोटिक्स डिटेक्शन, और विषविज्ञान प्रयोगशाला।
जीवविज्ञान– जीव विज्ञान, सीरम विज्ञान और डीएनए प्रयोगशाला।
कम्प्यूटर साइंस– डेटा एनालिटिक्स, साइबर सुरक्षा और साइबर फोरेंसिक
व्यवहारविज्ञान– लाईडिटेक्शन, नाकों एनालिसिस और ब्रेन मैपिंग प्रयोगशाला के साथ ही
अपराध विज्ञान- कानून विभाग, पुलिस विज्ञान और प्रशासन भी शामिल रहेंगे।

कोर्स, समयावधि और छात्रों की संख्या
फोरेंसिक इंस्टीट्यूट में एक साथ पांच सौ छात्रों को प्रवेश दिया जाएगा। जिन कोर्सों में प्रवेश दिया जाएगा उनमें बीएससी (3 वर्ष) 120 छात्र, एमएस-सी. फोरेंसिक साइंस विथ स्पेशलाइजेशन (2 वर्ष) 80 छात्र, एम.फि. (2 वर्ष) 50 छात्र, पीएचडी (4 वर्ष) 15 छात्र, पोस्ट डाक्टोरलरिसर्च (3 वर्ष) 10 छात्र, पीजी डिप्लोमा इन फोरेंसिक साइंस फोरेंसिक साइंस (1 वर्ष) 50 छात्र, एडवांस स्पेशलाइज्ड एंड टेलरमेड पीजी डिप्लोमा (1 वर्ष 25) छात्र के साथ ही 150 छात्रों के लिए पीजी सर्टिफिकेट कोर्स की शुरुआत की जाएगी।

पुणे, दिल्ली और अन्य स्थानों को नहीं भेजना होगा सैंपल
प्रदेश में होने वाली कई ऐसी घटनाएं हैं। जिनमें मिले साक्ष्य को परीक्षण के लिए पुणे, दिल्ली या अन्य स्थानों को भेजा जाता है। जिनकी रिपोटर् आने में कई-कई माह का समय लग जाता है। अभी भी कई ऐसी वारदातें या फिर हादसे हैं, जिनकी गुत्थी आज तक नहीं सुलझ पाई है। आरुषि हत्याकांड हो फिर मोहनलालगंज-रायबरेली रेलखंड पर कई बार पटरी काटकर ट्रेन पलटाने की साजिश हो और चाहे कई बार हुई लाखों रुपए की लूट। इन सभी मामलों का खुलासा आज तक नहीं हो पाया।

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