बरेली: मरम्मत योग्य हैंडपंपों की रिबोरिंग दिखाकर चल रहा खेल
बरेली, अमृत विचार। इंडिया मार्क हैंडपंपों के रीबोर के नाम पर जिले में बड़ा खेल चल रहा है। मरम्मत योग्य हैंडपंप पर बिना तकनीकी जांच मनमाने ढंग से ग्राम पंचायतों का बजट खर्च किया जा रहा है। आलमपुर जाफराबाद, बिथरीचैनपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायतों में गोलमाल की सबसे अधिक शिकायतें हैं लेकिन अभी तक यह …
बरेली, अमृत विचार। इंडिया मार्क हैंडपंपों के रीबोर के नाम पर जिले में बड़ा खेल चल रहा है। मरम्मत योग्य हैंडपंप पर बिना तकनीकी जांच मनमाने ढंग से ग्राम पंचायतों का बजट खर्च किया जा रहा है। आलमपुर जाफराबाद, बिथरीचैनपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायतों में गोलमाल की सबसे अधिक शिकायतें हैं लेकिन अभी तक यह पता नहीं चल सका है कि प्रधानों ने किस तरह से घोटाले की नींव रखी। इस वर्ष गर्मियों के सीजन में 900 से ज्यादा हैंडपंप रीबोर कराने के नाम पर बजट खर्च किया जा चुका है।
जिले में 1193 ग्राम पंचायतें हैं। गांव में लगे इंडिया मार्क हैंडपंप की बोरिंग मरम्मत की जिम्मेदारी ग्राम प्रधान और पंचायत सचिवों की है। एक हैंडपंप को रिबोर करने में करीब 40 हजार रुपये का खर्च आता है। अगर ग्राम पंचायत चाहे तो 600 रुपये जमा कर यह जान सकती है कि हैंडपंप रिबोर योग्य है या नहीं। यह राशि जल निगम के खाते में जमा होती है। जल निगम की टीम मौका मुआयना करती है और फिर योग है या नहीं, इसका प्रमाण पत्र देती है मगर इस बार मानकों को ताक पर रख दिया गया।
सूत्रों की मानें तो आलमपुर जाफराबाद, बिथरीचैनपुर ब्लॉक की तमाम ग्राम पंचायतें ऐसी हैं, जिनमें प्रधान और सचिव ने उन हैंडपंपों को भी रिबोर करने का निर्णय ले लिया जो सिर्फ मरम्मत के योग्य थे। रीबोर से पहले जल निगम से तकनीकी सलाह भी नहीं ली। इतना ही नहीं किसी तरह का सत्यापन भी नहीं कराया।
एक हैंडपंप के रीबोर पर औसतन 40 हजार का खर्च आया है। जबकि एक नया हैंडपंप लगाने पर औसतन 50 हजार रुपये का खर्च आता है। ऐसे में घोटाले की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। गौर करने वाली बात यह भी है कि जल निगम को बिना कोई जानकारी दिए प्रधान और सचिवों ने हैंडपंपों को रीबोर कराने के बिल पास कर दिए।
जिले में लगे हैं 36979 इंडिया मार्क हैंडपंप
सरकारी आंकड़ों में जिले में आबादी के अनुरूप 36979 हैंडपंप लगे हैं। करीब ढाई हजार हैंडपंप खराब हैं। इनको रिबोर कराया जाना है। एक हजार हैंडपंपों की मरम्मत होनी है। सबसे ज्यादा हालात खराब ब्लॉक आलमपुर जाफराबाद की है। यहां के आठ सौ के करीब हैंडपंप ठीक होने हैं। मरम्मत का बजट ग्राम पंचायत और संबंधित निकाय को मिलता है।
पूर्व में हो चुकी कार्रवाई पर नहीं रुका गोलमाल
सरकारी हैंडपंपों के रिबोर कराने के नाम पर हर साल गोलमाल होता है। छिटपुट कमियां या फिर ठीक हैंडपंप को ही प्रधान और सचिव साठगांठ से बोरिंग दर्शाकर धनराशि डकार जाते हैं। इसके कुछ समय बाद यह हैंडपंप फिर खराब हो जाते हैं। ग्रामीणों की शिकायत पर पूर्व में इस तरह के कई मामले पकड़े जा चुके हैं जिसमें ग्राम प्रधान व संबंधित ग्राम पंचायत के सचिव से रिकवरी कराई गई लेकिन रिबोर के नाम होने वाला खेल अब भी चल रहा है।
खास फर्मों को दिया जाता है रीबोरिंग का काम
इंडिया मार्क हैंडपंपों की रीबोरिंग का काम भी जिले में कुछ खास फर्मों को ही दिया जाता है। यह चुनिंदा फर्में हैं और इनके मालिकान का राजनीति में भी दखल रहता है। जिले के 15 ब्लॉक की 1037 ग्राम पंचायतों में यहीं फर्म हैंडपंपों की रीबोरिंग, मरम्मत के साथ नए हैंडपंप लगाने का काम भी करती हैं। ऐसे में रीबोरिंग में खेल की संभावना और बढ़ जाती है।
खराब हैंडपंपों की ब्लाक वार स्थिति
भोजीपुरा में 34, मझगवां में 356, भुता में 134, आलमपुर जाफराबाद में 856, भदपुरा में 42, नवाबगंज में 91, शेरगढ़ में 195, बिथरीचैनपुर में 347, फरीदपुर में 236, रामनगर में 163, दमखोदा में 197, फतेहगंज पश्चिमी में 65, मीरगंज में 157 और क्यारा में 105 हैंडपंप खराब हैं।
गांवों में खराब पड़े हैंडपंप की सूची ब्लाक स्तर से मंगाकर तैयार की गई है। हैंडपंप रिबोर का काम चल रहा है। जल्द ही खराब पड़े सभी हैडपंप ठीक हो जाएंगे जिन ग्राम पंचायतों में इस तरह की गड़बड़ी हुई है। उनकी शिकायत के आधार पर संबंधित पर कार्रवाई की जाएगी। -धर्मेंद्र कुमार, डीपीआरओ
