पीलीभीत: हॉकी में भारत की जीत से पूरे जिले में जश्न का माहौल, सिमरनजीत सिंह के घर पर बधाई देने वालों का लगा तांता

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Edited By Amrit Vichar
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पीलीभीत, अमृत विचार। भारतीय हॉकी टीम ने आज बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए जर्मनी को 5-4 के अंतर से हराकर रोमांचक जीत दर्ज की। इसके साथ ही भारत ने कांस्य पदक हासिल कर लिया। इस जीत के हीरो पीलीभीत के मझोला के ग्राम मझारा निवासी तेजतर्रार सेंटर फारवर्ड सिमरनजीत सिंह रहे। उन्होंने दिल की धड़कन बढ़ा …

पीलीभीत, अमृत विचार। भारतीय हॉकी टीम ने आज बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए जर्मनी को 5-4 के अंतर से हराकर रोमांचक जीत दर्ज की। इसके साथ ही भारत ने कांस्य पदक हासिल कर लिया। इस जीत के हीरो पीलीभीत के मझोला के ग्राम मझारा निवासी तेजतर्रार सेंटर फारवर्ड सिमरनजीत सिंह रहे।

उन्होंने दिल की धड़कन बढ़ा देने वाले इस मैच में दो खूबसूरत गोल किए और टीम की जीत की आधारशिला रखी। भारत की जीत के बाद पूरे जिले में जश्न का माहौल है। बड़ी संख्या में लोग सिमरनजीत सिंह के घर उनके परिजनों को बधाई देने भी पहुंचे।

ग्राम मझारा के फार्मर इकबाल सिंह के सुपुत्र सिमरनजीत सिंह 10 साल की उम्र में ही पीलीभीत छोड़ कर पंजाब चले गए। सिमरनजीत को बचपन से ही हॉकी खेलना पसंद था। उनके ताऊ रशपाल सिंह ने उन्हें पंजाब बुला लिया और वहां सिमरनजीत का दाखिला चीमा हॉकी एकेडमी में करा दिया । चीमा हॉकी एकेडमी में कई जाने-माने प्रशिक्षक युवा खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिया करते थे।

सिमरनजीत ने अपने खेल में सुधार के लिए बहुत मेहनत की। शारीरिक परिश्रम के साथ उन्होंने हॉकी की तकनीकियों को भी भली-भांति जाना। कड़े परिश्रम और अभ्यास से सिमरनजीत कम उम्र में ही तेजतर्रार फारवर्ड के रूप में पहचान बनाने में सफल रहे। इसके बाद पहले प्रदेश की तरफ से हॉकी खेली और फिर राष्ट्रीय टीम में अपना स्थान बनाने में सफल रहे। जब भारत की राष्ट्रीय टीम में सिमरनजीत का चयन हुआ तो उनके माता-पिता ही नहीं पीलीभीत जनपद के लोग भी खुद को गौरवान्वित महसूस करने लगे। हर्ष की लहर दौड़ गई। सिमरनजीत ने उन को लेकर लगाई गई उम्मीदों को टूटने नहीं दिया और हर मैच में बेहतरीन प्रदर्शन किया।

बेल्जियम के खिलाफ उनको मैदान में उतारा नहीं गया। इस मैच में भारत को 5–2 से शर्मनाक पराजय का सामना करना पड़ा । आज कांस्य पदक के लिए सुबह भारत और जर्मनी के बीच कांटे की टक्कर हुई। इसमें सिमरनजीत को खिलाया गया और उन्होंने बेहतरीन खेल का प्रदर्शन किया। अग्रिम पंक्ति को सशक्त बनाते हुए उन्होंने लगातार अपने खूबसूरत मूव से जर्मनी की रक्षा पंक्ति को छिन्न-भिन्न रखा। इस दौरान उन्होंने दो खूबसूरत गोल भी किए।

पूरे मैच के दौरान सिमरनजीत के परिवार के लोग और जिले भर में लोग टकटकी लगाए टीवी पर मैच देखते रहे । जैसे ही भारत ने रोमांचक जीत हासिल की भारत जिंदाबाद के नारे लगने लगे। एक दूसरे को मुबारकबाद दी जाने लगी। सिमरनजीत का पूरा परिवार भी पूरी उत्सुकता के साथ इस मैच को देख रहा था।

भारत की जीत होते ही परिवार के लोग खुशी से उछल पड़े और फिर मिष्ठान वितरण का सिलसिला शुरू हो गया। पूरे गांव से लोग सिमरन जीत के आवास पर आ गए। बधाई देने वालों का तांता लग गया। यह सिलसिला देर शाम तक चलता रहा। जिले में कई जगह मिष्ठान वितरण किया गया आतिशबाजी की गई।

सिमरनजीत के पिता इकबाल सिंह गौरवान्वित
सिमरनजीत सिंह के पिता इकबाल सिंह का कहना है कि यह पूरे परिवार के लिए गर्व की बात है। उनके बेटे ने परिवार के साथ पीलीभीत जिले, अपने गांव मझारा प्रदेश और देश का नाम रोशन किया है। वह अपने भाई रशपाल सिंह के योगदान की भी सराहना करते हैं।

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