बरेली: ब्याज माफी योजना का लाभ नहीं ले रहे व्यापारी
बरेली, अमृत विचार। वाणिज्यकर विभाग की ‘ब्याज माफी योजना-2021’ जिले में असरदार साबित नहीं हुई। विभाग को उम्मीद थी कि इस योजना का जिले के करीब पच्चीस हजार से अधिक व्यापारी लाभ उठाएंगे, लेकिन मार्च 2021 से शुरू हुई यह योजना में अब तक केवल 752 व्यापारियों ने ही आवेदन किए हैं। यह आलम तब …
बरेली, अमृत विचार। वाणिज्यकर विभाग की ‘ब्याज माफी योजना-2021’ जिले में असरदार साबित नहीं हुई। विभाग को उम्मीद थी कि इस योजना का जिले के करीब पच्चीस हजार से अधिक व्यापारी लाभ उठाएंगे, लेकिन मार्च 2021 से शुरू हुई यह योजना में अब तक केवल 752 व्यापारियों ने ही आवेदन किए हैं। यह आलम तब है जब योजना के तहत आवेदन करने की अंतिम तारीख तीसरी बार बढ़ाकर दो सितंबर कर दी गई है।
शासनादेश के मुताबिक योजना में व्यापारियों के मूल बकाया राशि पर लगाए ब्याज में छूट देने का प्रावधान है। योजना के अंतर्गत व्यापारी को विभागीय पोर्टल पर आवेदन करना होगा। इसके लिए वाणिज्यकर विभाग में हेल्प डेस्क बनाई गई है। 10 लाख रुपये तक के मूल बकाया वाले छोटे व्यापारियों को पूरा बकाया जमा करने पर शत-प्रतिशत ब्याज में छूट का प्रावधान है।
अफसरों को उम्मीद थी कि इस योजना के तहत करोड़ों रुपये का राजस्व प्राप्त हो जाएगा, लेकिन कोरोना की दूसरी लहर में हुए नुकसान की वजह से व्यापारी योजना का लाभ लेने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। अगर व्यापारी पूरी बकाया राशि जमा करेगा तो योजना के तहत ब्याज में छूट देने के बाद 30 दिनों में संबंधित व्यापारी को ‘नो ड्यूज’ भी जारी कर दिया जाएगा।
इस कारण भी आए कम आवेदन
योजना के शुरू होने के तुरंत बाद कोरोना की दूसरी लहर आ गई और कामकाज ठप हो गया। पंचायत चुनाव के दौरान वाणिज्यकर विभाग में 50 से अधिक कर्मचारी संक्रमित हो गए। संक्रमण बढ़ने पर राजस्व वसूली में योगदान देने वाले अमीनों को कोविड ड्यूटी में लगा दिया। इससे थोड़े बहुत राजस्व की भी वसूली नहीं हो सकी। कोविड के कारण व्यापारियों ने भी रुचि नहीं ली।
समायोजन न होने से तमाम कारोबारी योजना से वंचित
वाणिज्यकर विभाग के डिप्टी कमिश्नर गौरीशंकर का कहना है कि योजना में 10 लाख के बकाए पर ब्याज और जुर्माना पूरा माफ करने का प्रावधान है। 10 लाख रुपये से ज्यादा और एक करोड़ के बकाए पर 90 फीसदी ब्याज और जुर्माना माफ करने का प्रावधान है। अधिकांश बकायेदार इसी दायरे में हैं लेकिन शासन द्वारा जारी शासनादेश में समायोजन के संबंध में कोई उल्लेख नहीं है। ऐसे में जिन व्यापारियों ने मूल धन पहले जमा कर दिया है, उनका समायोजन नहीं होने से पेच फंस गया है।
