बरेली: कब्जों से बचेगा तालाब तब संंवरेगा शहर, बूंद- बूंद सहेजने की कोशिश हो रही नाकाम
बरेली, अमृत विचार। ग्राम सभाओं में पट्टे के तालाब पर अवैध कब्जे और अतिक्रमण से जल संरक्षण की मुहिम को झटका लगा है। अफसरों की तमाम सख्ती के बाद भी जिले में करीब 68 तालाबों व पोखरों पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से दबंगों का कब्जा है। इसके कारण इन तालाबों में मछली पालन कर …
बरेली, अमृत विचार। ग्राम सभाओं में पट्टे के तालाब पर अवैध कब्जे और अतिक्रमण से जल संरक्षण की मुहिम को झटका लगा है। अफसरों की तमाम सख्ती के बाद भी जिले में करीब 68 तालाबों व पोखरों पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से दबंगों का कब्जा है। इसके कारण इन तालाबों में मछली पालन कर आजीविका चला रहे मछुआरों, अनुसूचित जाति व जन-जाति के गरीबों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
जिले के बहेड़ी, शेरगढ़, आंवला समेत कई ब्लॉकों में ग्राम प्रधानों ने नियमों को ताक पर रखकर तालाब अपने करीबी लोगों को दे रखे हैं। कई जगहों पर तो तालाबों को पाटकर अवैध मकान बनाने की शिकायत भी अफसरों से की गई है। मनरेगा कार्यालय में मिले आंकड़ों के मुताबिक जिले में छोटे-बड़े करीब पांच हजार तालाब व पोखर हैं। ये प्राकृतिक तालाब व पोखर ग्राम सभा के आधिकार क्षेत्र में आते हैं। ग्राम प्रधान के हस्तक्षेप पर इनका आवंटन होता है लेकिन अफसरों की सुस्ती से आंवला, नवाबगंज ब्लाक में करीब 68 तालाबों व पोखरों का अस्तित्व समाप्त होने की कगार पर है।
मछुआ समुदाय या अजा-जजा को देने का नियम
शासनादेश के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्र के तालाब ग्राम सभा के क्षेत्र में आते हैं। ग्राम प्रधान इन तालाबों को मत्स्य पालन व ¨सिंघाड़ा उत्पादन के लिए नियमानुसार गांव के ही मछुआ समुदाय के व्यक्ति को देता है। गांव में मछुआ समुदाय का व्यक्ति न होने पर अनुसूचित जाति व जनजाति वर्ग के किसी परिवार को दिया जाता है। पट्टा दिए जाने के लिए तहसील में खुली बोली लगती है। अधिकतम बोली लगाने वाले को तालाब 10 सालों के लिए दे दिया जाता है लेकिन ग्राम प्रधान नियमों के विरुद्ध तालाब अपने करीबी लोगों को दे रहे हैं। कई तालाबों के पट्टों का नवीनीकरण भी नहीं हो सका है।
इन जगहों पर कब्जे की शिकायत
नवाबगंज ब्लाक के गांव क्योलड़िया निवासी संतोष ने तालाब में मिट्टी भरवाकर वहां अवैध कब्जा की शिकायत पिछले दिनों डीसी मनरेगा से की थी। आलमपुर जाफराबाद निवासी एक व्यक्ति ने तो पूर्व ग्राम प्रधान पर बाहरी लोगों से मोटी रकम लेकर मछली पालन के लिए तालाब देने का आरोप लगाया है। इसी तरह बहेड़ी के कई तालाबों का अस्तित्व भी खतरे में है। इसके किनारे भी लोगों ने अतिक्रमण किया है। सबसे अधिक शिकायतें शेरगढ़, देवरनियां की हैं। यहां प्रधानों के खिलाफ अवैध कब्जे की शिकायतें आती रहती हैं।
तालाबों व पोखरों पर अवैध कब्जा करने वाले प्रधान हों या उनके करीबी अथवा कोई और, किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। ग्रामीणों की शिकायत की गंभीरता से जांच कराने के बाद निश्चित ही सख्त कार्रवाई की जाएगी। – गंगाराम वर्मा, डीसी, मनरेगा
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