लखनऊ: कल्बे जवाद ने माहे मुहर्रम की नवीं मजलिस में कहा- पैगम्बर ने फरमाया अगर…
लखनऊ। माहे मुहर्रम की नवीं मजलिस को इमामबाड़ा गुफरानमॉब में खिताब करते हुए मौलाना सै. कल्बे जवाद नकवी ने कहा कि पैगम्बर इस्लाम (स.अ.व) ने हमेशा अपने अहलेबैत (अ.स) के फजाएल बयान किये और उम्मत को ताकीद कि मेरे अहलेबैत (अ.स) के साथ अच्छा सुलूक करना। पैगम्बर इस्लाम (स.अ.व) ने फरमाया अगर दीन लेना है …
लखनऊ। माहे मुहर्रम की नवीं मजलिस को इमामबाड़ा गुफरानमॉब में खिताब करते हुए मौलाना सै. कल्बे जवाद नकवी ने कहा कि पैगम्बर इस्लाम (स.अ.व) ने हमेशा अपने अहलेबैत (अ.स) के फजाएल बयान किये और उम्मत को ताकीद कि मेरे अहलेबैत (अ.स) के साथ अच्छा सुलूक करना। पैगम्बर इस्लाम (स.अ.व) ने फरमाया अगर दीन लेना है तो मेरे अहलेबैत (अ.स) से लो, अगर मेरी शरीयत और सुन्नत लेना हैं तो इनसे लो। कुरान लेना है तो मेरे अहलेबैत (अ.स) से लो।
आप ने फरमाया कि तुम में सब से बेहतर फैसला करने वाला अली (अ.स) है। अब इससे ज्यादा पैगम्बर इस्लाम (स.अ.व) और क्या बयान करते ? गदीर के मैदान में रसूल इस्लाम (स.अ.व) ने हजरत अली (अ.स) की विलायत का ऐलान करके आपको उम्मत पर हाकिम करार दे दिया। अब लफ्जे मौला के मानि में मुस्लमान इख्तेलाफ करते है। लेकिन अगर जो मुबारकबाद हजरत अली (अ.स) को दी गयी तो उससे मालूम हो जायेगा के मौला के मानि क्या है।
मुबारकबाद देते हुए कहा गया कि ऐ अली (अ.स) मुबारक हो आज आप हमारे और और हर मोमिन और मोमिना के मौला हो गए। इस जुमले को बिला तफरीक तमाम मुहद्दिसीन और मूअर्रिखीन ने नक्ल किया है। लिहाजा मुलसलमान जो मानि लफ्जे मौला के पेश करते है वो इस जुमले की वजाहत में सादिक नहीं आते। क्या वो बुजर्ग सहाबी ये कह रहे थे कि ऐ अली (अ.स) मुबारक हो आज आप हमारे और और हर मोमिन और मोमिना के पड़ोसी हो गये ?
इससे मालूम होता है कि लफ्जे मौला के मानि हाकिम और और वाली के है। मजलिस के आखिर में मौलाना ने इमाम हुसैन अ.स के 6 महीने के बेटे हजरत अली असगर अ.स की शहादत बयान करते हुए कहा कि करबला के मैदान में हजरत अली असगर अ.स की शहादत इमाम हुसैन अ.स के हक पर होने की बेहतरीन दलील हैं जिसे पूरी दुनिया ने तस्लीम किया है। शहादत सुनकर मोमनीन ने खूब गिरया किया और नौहा ख्वानी और सीना जनी की।
