बरेली: अल्लाह की इबादत के साथ राखियां बना रहा परिवार
बरेली, अमृत विचार। रोजाना अल्लाह की इबादत के लिए उठने वाले हाथ इन दिनों हिन्दुओं के प्रमुख त्योहार रक्षाबंधन के लिए राखी तैयार करने में मशगूल हैं। राखियां बनाकर एक तरफ वह परिवार का भरण पोषण तो कर ही रहे हैं। दूसरी तरफ हिन्दू और मुस्लिमों के बीच सौहार्द्र की मिसाल भी पेश कर रहे …
बरेली, अमृत विचार। रोजाना अल्लाह की इबादत के लिए उठने वाले हाथ इन दिनों हिन्दुओं के प्रमुख त्योहार रक्षाबंधन के लिए राखी तैयार करने में मशगूल हैं। राखियां बनाकर एक तरफ वह परिवार का भरण पोषण तो कर ही रहे हैं। दूसरी तरफ हिन्दू और मुस्लिमों के बीच सौहार्द्र की मिसाल भी पेश कर रहे हैं।
कोहाड़ापीर निवासी 55 वर्षीय मुख्तार अहमद व उनके परिवार को रक्षाबंधन के त्योहार का हर साल बेसब्री से इंतजार रहता है। वे बताते हैं कि करीब 30 साल से वह राखी बनाने का काम कर रहे हैं। हालांकि, उनका मुख्य काम फेरी करने वालों के लिए प्रचार की रिकॉर्डिंग करना है। मुख्तार ने बताया कि 30 साल पहले जब घर के पास ही स्थित कुछ हिन्दू लोगों को राखियां बनाते देखा तो उन्होंने भी यह काम कर रुपये कमाने की ठानी।
बताया कि उनके दो बेटे हैं। बड़ा बेटा बोल नहीं पाता। इसलिए वह घर पर ही रहता है। इसलिए इस काम में उनके बेटे के साथ पत्नी शाहजहां बेगम व भाई की पत्नी भी मदद करते हैं। वह गुजरात और मुंबई से कच्चा माल मंगाकर राखियां घर में ही तैयार करते हैं। जिसके बाद बाजार में राखियां बेचकर आजीविका चलाते हैं। मुख्तार अहमद की पत्नी शाहजहां बेगम ने बताया कि रक्षाबंधन आने से करीब दो महीने पहले से ही वे लोग राखियां बनाना शुरू कर देती हैं। उन्हें एक राखी को बनाने में करीब 10 से 20 मिनट का वक्त लगता है।
बिहारीपुर में चार पीढ़ियों से राखियां बना रहा राजकुमार का परिवार
बिहारीपुर निवासी राजकुमार देवल का परिवार चार पीढि़यों से राखियां बना रहा है। बह बताते हैं कि पहले लोग रेशम की राखियों को ज्यादा पसंद करते थे लेकिन अब फैशन के दौर में लोग फैंसी राखियां मांगते हैं। रक्षाबंधन से तीन-चार महीने पहले राखियां बनाना शुरू कर देते हैं जिससे समय पर काम पूरा हो सके।
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