यूपी: बृज के कल्याण के हृदय में बसते थे अयोध्या के राम, कर दिया था कुर्सी का त्याग
लखनऊ। अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन के यों तो अनेक नायक थे, लेकिन उसमें पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह एक ऐसा चेहरा थे। जिन्होंने मर्यादा पुरुषोत्तम के मंदिर के लिए मुख्यमंत्री की कुर्सी का त्याग कर दिया। ब्रज क्षेत्र में जन्मे कल्याण सिंह के हृदय में अयोध्या के प्रभु राम अंतिम क्षणों में भी श्रीराम का …
लखनऊ। अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन के यों तो अनेक नायक थे, लेकिन उसमें पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह एक ऐसा चेहरा थे। जिन्होंने मर्यादा पुरुषोत्तम के मंदिर के लिए मुख्यमंत्री की कुर्सी का त्याग कर दिया। ब्रज क्षेत्र में जन्मे कल्याण सिंह के हृदय में अयोध्या के प्रभु राम अंतिम क्षणों में भी श्रीराम का भव्य मंदिर निर्माण देखना चाहते थे। इसलिए जब इस नायक के दुनिया से विदा होने की सूचना आई तो अयोध्या भी शोकाकुल हो गई।
नब्बे के दशक तक भाजपा उत्तर प्रदेश में बेहद कमजोर स्थिति में थी। पूर्व गृहमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने जब राम रथयात्रा निकाली तो कई राजनीतिक फलक पर कई चेहरे चमके। विनय कटियार से लेकर उमा भारती, कल्याण सिंह, साध्वी ऋतंभरा आदि प्रदेश की सियासत में अचानक प्रभावी हो गए। इसके बाद 1991 में भाजपा को जनादेश मिला। इस जनादेश के पीछे राममंदिर निर्माण की भावना जुड़ी थी, इसलिए पार्टी ने अलीगढ़ के अतरौली से कई बार के विधायक कल्याण सिंह को मुख्यमंत्री बनाया।
उत्तर प्रदेश जैसे विशाल प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के बावजूद उनके भीतर सत्ता का तनिक भी लालच नहीं आया। यही वजह थी कि जब अयोध्या में विवादित ढांचे को गिराने की तैयारी चल रही थी। उससे पहले वे अयोध्या गए और वहां श्रीराम मंदिर निर्माण का संकल्प लिया। इसके बाद जब छह दिसंबर 1992 को ढांचे का ध्वंस हुआ तो उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा भी दे दिया। साथ ही यह भी कहा कि इस विध्वंस में संलिप्त होने पर उन्हें कोई खेद नहीं है।
बाद उन्होंने राजनीतिक जीवन के तमाम उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन राममंदिर निर्माण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता बरकरार रही। सुप्रीम कोर्ट का फैसला राममंदिर के पक्ष में आने के बाद जब मंदिर निर्माण ट्रस्ट का गठन हुआ तो उन्होंने कहा कि उनकी वर्षों की साध पूरी हो गई। अब वे जीते-जी श्रीराम जन्मभूमि स्थल पर प्रभु श्रीराम का मंदिर देख सकेंगे। काल ने उनकी यह इच्छा तो पूरी नहीं होने दी, लेकिन अयोध्या में उनके चाहने वाले लाखों आंखों से जब मंदिर का निर्माण देखेंगे तो उन्हें अनन्य रामभक्त कल्याण सिंह की याद बरबस आ जाएगी। जब भी मंदिर निर्माण का जिक्र आएगा तो कल्याण सिंह के जिक्र बिना वह अधूरा ही रहेगा। अयोध्या के महापौर ऋषिकेश उपाध्याय कहते हैं कि अयोध्या उनकी ऋणी है।
