यूपी: नकलमुक्त यूपी बोर्ड परीक्षा व ठोस फैसलों के लिए जाने जाते थे कल्याण सिंह

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Edited By Amrit Vichar
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के दो बार मुख्यमंत्री रहे कल्याण सिंह को प्रदेश में आज भी सख्त प्रशासक के तौर पर याद किया जाता है। 1991 में पहली बार मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने प्रशासनिक मशीनरी को पारदर्शी और जवाबदेह बनाया। इसके अलावा नकल मुक्त बोर्ड परीक्षा कराकर तो उन्होंने जो इतिहास रचा। उसे आज तक …

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के दो बार मुख्यमंत्री रहे कल्याण सिंह को प्रदेश में आज भी सख्त प्रशासक के तौर पर याद किया जाता है। 1991 में पहली बार मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने प्रशासनिक मशीनरी को पारदर्शी और जवाबदेह बनाया। इसके अलावा नकल मुक्त बोर्ड परीक्षा कराकर तो उन्होंने जो इतिहास रचा। उसे आज तक कोई सरकार दोहरा नहीं पाई।

प्रदेश में मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने ऐसे कई ईमानदार छवि वाले आईएएस अधिकारियों को जिलाधिकारी के तौर पर तैनात किया, जिन्होंने प्रशासन की छवि को बदल कर रख दिया। हालांकि बाद की सरकारों में इसमें से अधिकांश अधिकारी हाशिये पर ही रहे। उन्होंने इस छवि को भी तोड़ा कि सरकार को नौकरशाही चलाती है। नौकरशाही में भी उनका बड़ा खौफ था, इसलिए जो भी फैसले उनकी सरकार ने लिए। वह निचले स्तर तक प्रभावी रहे। यूपी बोर्ड परीक्षा जो नकल के लिए बेहद बदनाम थी। उसे नकल मुक्त कराने के लिए उन्होंने भारी आलोचनाएं झेली।

बावजूद उसके वे शिक्षा के स्तर से कोई समझौता नहीं करना चाहते थे। इसलिए उन्होंने नकल के खिलाफ बेहद कठोर कार्रवाई की। जिसका नतीजा यह रहा कि बोर्ड परीक्षा का परिणाम इतने बेहद निचले स्तर पर पहुंच गया था। 1992 में हुई इस परीक्षा में हाईस्कूल करने वाले रामचंद्र पांडेय कहते हैं कि उस दौर में जो प्रतिभावान थे, वही पास हो पाए थे। यह बहुत अच्छा फैसला था, जिसे बाद की सरकारें कायम नहीं रख पाईं। हालांकि अपने दूसरे कार्यकाल में कल्याण सिंह वह प्रभाव नहीं छोड़ पाए। इस कार्यकाल में उनके साथ कई विवाद तो जुड़े ही। साथ ही बसपा की राजनीतिक बैसाखी और बाद में अल्पमत की सरकार ने भी उनके फैसलों और छवि को प्रभावित किया।

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