कुछ ऐसा था बरेली से कल्याण सिंह का रिश्ता… 50 साल का याराना, आंवला में राजवीर सिंह के विरुद्ध नहीं की रैली

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बरेली, अमृत विचार। बाबू जी के रूप में अपनी विशेष पहचान बनाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के बरेली के कई नेताओं से पारिवारिक रिश्ते रहे हैं। उनमें से एक हैं पूर्व सांसद राजवीर सिंह। राजवीर सिंह कल्याण सिंह को बड़े भाई की तरह मानते थे। करीब 50 साल पूर्व दोनों नेताओं के बीच शुरू …

बरेली, अमृत विचार। बाबू जी के रूप में अपनी विशेष पहचान बनाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के बरेली के कई नेताओं से पारिवारिक रिश्ते रहे हैं। उनमें से एक हैं पूर्व सांसद राजवीर सिंह। राजवीर सिंह कल्याण सिंह को बड़े भाई की तरह मानते थे। करीब 50 साल पूर्व दोनों नेताओं के बीच शुरू हुई दोस्ती ने बरेली की राजनीति में भी विशेष पहचान बनायी। शनिवार की रात जब कल्याण सिंह के निधन की खबर चैनलों पर चली। तब धीरेंद्र सिंह उर्फ धीरू अपने पिता राजवीर सिंह के कमरे में गए और उन्हें दुखद समाचार बताया। तब राजवीर सिंह दुखी हो गए और लाइट बंद कर जाने के लिए कहने लगे।

धीरेंद्र प्रताप सिंह बताते हैं कि पापा के मुख से सही शब्द नहीं निकल रहे थे। धीरेंद्र बताते हैं कि बाबू जी उनके परिवार के हर कार्यक्रम में शरीक हुए। कहते हैं कि जब उनकी माता लता की लखनऊ में मृत्यु हुई तब मुख्यमंत्री रहने के बावजूद बाबूजी अस्पताल आ गए थे। परिवार की तरह दुख बांटा। वर्ष 2003 की बात है पटेल चौक के पास उनके घर पर कल्याण सिंह आए थे। तब हम लोग तीसरी मंजिल पर रहते थे। घर में लिफ्ट नही थीं। कमांडो ने उन्हें मना किया कि बाईपास सर्जरी हुई है। जीने के रास्ते न जाएं लेकिन कल्याण सिंह तीसरी मंजिल पर सीढ़ियां चढ़कर आए।

2004 में उनके पिता राजवीर सिंह सपा से लोकसभा का चुनाव लड़े। तब भाजपा ने कल्याण सिंह से कहा कि आंवला में जाकर पार्टी प्रत्याशी के लिए प्रचार करें तब कल्याण सिंह ने शीर्ष नेतृत्व से साफ कह दिया था कि वह आंवला लोकसभा में वोट मांगने नहीं जाएंगे। बरेली लोकसभा में सिर्फ संतोष गंगवार के लिए वोट मांगेंगे। पारिवारिक संबंधों के चलते उन्हें आंवला में वोट नहीं मांगे थे। जब कल्याण सिंह राजस्थान के राज्यपाल थे तब हम सभी पापा के साथ उनसे मिलने गए थे।

अवंती बाई समेत आंवला और फरीदपुर का भी बनवाया डिग्री कॉलेज
आवंला से तीन बार के सांसद रहे राजवीर सिंह के बेटे धीरेंद्र सिंह उर्फ धीरू बताते हैं कि बाबू जी ने बरेली जनपद में तीन डिग्री कॉलेज बनवाए थे। पहला डिग्री कॉलेज उन्होंने आंवला में, दूसरा फरीदपुर में राजकीय डिग्री और तीसरा डिग्री कॉलेज उन्होंने अवंतीबाई शहर में बनवाया। कल्याण सिंह पहली बार 1991 में मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने बरेली में सबसे पहले जगदीश बिहार कॉलोनी का उद्घाटन किया था। उस वक्त बीडीए नहीं हुआ करता था। कल्याण सिंह ने बाबू जगदीश की प्रतिमा का अनावरण किया, जो आज भी उसी कॉलोनी में लगी हुई है। बताते हैं कि मुख्यमंत्री होने के दौरान सर्किट हाउस में जब वह आए तब उनसे कार्यकर्ता मिलने पहुंचे तो उन्होंने ब्लैक बेल्ट कमांडो को बाहर कर दिया था। कहा था कि यह सभी उनकी पार्टी के कार्यकर्ता हैं। उनसे उन्हें कोई खतरा नहीं है।

पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के साथ वीरेंद्र अटल व अन्य।

भाजपा नेता एवं स्वतंत्रता सेनानी वीरेंद्र अटल ने कल्याण सिंह के साथ बिताए पलों को याद करते हुए बताया कि प्रदेश अध्यक्ष और मुख्यमंत्री रहने के दौरान कल्याण सिंह मेरे हाथ से बनी तंबाकू ही खाते थे। उनकी तीन रजनीगंधा और तीन तुलसी एक ही खुराक होती थीं। एक बार की बात है, मुझे स्व. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और कल्याण सिंह के साथ अल्मोड़ा जाने का मौका मिला था। मेरे साथ पूर्व सांसद राजवीर सिंह, श्याम बिहारी, दया राम शाक्य और कुंवर सुभाष पटेल भी थे। अल्मोड़ा से लौटते वक्त नैनीताल से निकलने के बाद नौकायान करने वाले स्थल पर रुके।

वीरेंद्र अटल कहते हैं कि मुझे उस स्थान का नाम ठीक से याद नहीं है। सभी बैठे थे। चाय पीने की चर्चा छिड़ी। मैने पूछा कि चाय पिएंगे या काफी। सभी से मैने पूछ लिया। अटल जी ने चाय की पेशकश की। जब मै कल्याण सिंह की तरफ गया तो बोले- जो सामने आइसक्रीम वाला खड़ा है, उससे कह दो मुझे हर ब्रांड की आइसक्रीम खिला दे। मेरे इशारा करने पर आइसक्रीम वाला आ गया। चार आइसक्रीम वह खा चुके थे। तब अटल बिहारी वाजपेयी ने टोका। कहा-कल्याण सिंह ठंडे प्रदेश में हैं और आइसक्रीम खा रहे हैं। वहां से नौकायान का आनंद लिया तो बिना आइसक्रीम खाये नौका नहीं चलने दी। वीरेंद्र अटल कहते हैं कि कल्याण सिंह ने ही यूपी में भाजपा को सत्ता में लाने के प्रयास किए। जमीन से जुड़े थे और पार्टी के लिए बहुत काम किया।

घी उतराती हुई उर्द की दाल खाते थे
वीरेंद्र अटल कहते हैं कि कल्याण सिंह घी उतराती हुई उर्द की दाल खाते थे। दही भी शक्कर के साथ देशी घी डालकर खाते थे। बहुत परिश्रमी नेता थे। मैने उनके साथ बहुत रातें काली की हैं। एक बार कहीं उन्हें जाना था। डीआईजी के पास स्थित गेस्ट हाउस से जंक्शन तक जाने के लिए पूर्व मंत्री सत्यप्रकाश अग्रवाल की कार मंगायी थी तब समय पर नहीं आए तब कल्याण सिंह मेरे साथ पैदल ही जंक्शन तक गए थे। हैरत की बात यह थी कि कल्याण सिंह को यूपी के सभी जिलों में अपने अधिकांश कार्यकर्ताओं का नाम याद रहते थे। वह नाम से ही उन्हें पुकारते थे।

लखनऊ स्थित आवास पर पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह से मिलने पहुंचे प्रशांत पटेल।

कल्याण सिंह के कुंवर सुभाष पटेल से पारिवारिक रिश्ते रहे
पूर्व विधायक कुंवर सुभाष पटेल के पुत्र भाजपा नेता प्रशांत पटेल बताते हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह से उनके परिवार के पारिवारिक रिश्ते रहे हैं। 1991 में जब वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे तब उनके पिता कुंवर सुभाष पटेल भोजीपुरा से विधायक थे। पापा के लिए चुनाव प्रचार करने भोजीपुरा में आए थे। बाबू जी का हेलीकाप्टर हमारे बदायूं रोड स्थित रिसार्ट में ही खड़ा हुआ करता था। जब भी बरेली आए थे उनके घर जरूर आते थे। बात पुरानी है, मै बाबू जी से लखनऊ में उनके आवास पर मिलने गया था। जब उन्होंने भाजपा से नाता तोड़कर राष्ट्रीय क्रांति पार्टी बनायी थी, उन्होंने मुझे भोजीपुरा सीट से विधानसभा का चुनाव लड़ने के लिए कहा था।

न्याय यात्रा लेकर बरेली आने पर चांदी का मुकुट पहनाकर पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का स्वागत करते राकेश राजपूत।

2005 में न्याय यात्रा लेकर आए थे कल्याण सिंह
भाजपा महानगर कार्यकारिणी सदस्य राकेश राजपूत बताते हैं कि 2005 में बाबू जी उत्तर प्रदेश के चुनाव प्रभारी थे। मैं बीजेपी महानगर में मंत्री था। तब बाबू जी बरेली में न्याय यात्रा लेकर आए थे। उस वक्त प्रदेश में मुलायम सिंह की सरकार थी। बीएल वर्मा (अब केंद्रीय मंत्री) रैली के प्रभारी थे। बरेली में न्याय यात्रा का जोरदार स्वागत हुआ था। उस वक्त मंच पर तमाम भाजपा के पदाधिकारी मौजूद थे और बाबू जी का चांदी का मुकुट पहनाकर स्वागत किया था। इसके बाद कटी कुईयां, आजमनगर में दंगा हुआ था। पार्षद ने फायरिंग की थी। जिसमें लोधी समाज के लोगों को चोंटें आयीं थीं। एसपी सिटी ने कहा था कि बाबू जी को रोक लें, कटी कुईयां न जाने दें। जाएंगे तो हालात बिगड़ जाएंगे।

पुराना शहर स्थित घर में बाबू जी (कल्याण सिंह) को खाना खिलाते राजेंद्र गुप्ता।

14 विधायकों के साथ बरेली में पार्टी को मजबूती देने आए थे बाबू जी
उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के प्रांतीय महामंत्री राजेंद्र गुप्ता कहते हैं कि बाबू जी (कल्याण सिंह) से पारिवारिक रिश्ता रहा है। बात 1986 की है। तब मैं और मेरा परिवार पुराना शहर स्थित घर में रहता था। उस वक्त पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष थे। प्रदेश में भाजपा के 14 विधायक थे। जब बाबू जी बरेली में विधायकों के साथ बरेली में पार्टी को मजबूत करने के लिए आए थे। उसी बीच उनके घर आए थे। उन्हें देख यह नहीं लगता था कि वह इतने बड़े नेता है। बेहद सरल स्वभाव में रहते थे। मै तब बच्चा था मगर प्यार करते थे। इसके बाद मैं उनसे 1991 में मिला तब उन्होंने मुझे एक ही नजर में पहचान लिया था। वह कार्यकर्ताओं के लिए जान देते थे। उनकी दुख तकलीफ में भी परेशान हुआ करते थे।

हम सभी लोग उन्हें बाबू जी कहकर बुलाते थे। मुख्यमंत्री बनने के बाद सर्किट हाउस में जब उन्होंने बैठक की तब मैं मिलने गया। बोले- अब तो मै मुख्यमंत्री बन गया। किसी को परेशान होने की जरूरत नहीं है। उन्होंने महिलाओं के सम्मान के लिए सौंदर्य की चीजों को कर मुक्त किया था। इसके साथ फ्लोर मिल स्थापित करने और जेनरेटर लगाने के संबंध में अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि इसके लिए किसी को लखनऊ आकर अनुमति लेने की जरूरत नहीं है। लाइसेंस बनवाए और उद्योग व जेनरेटर लगवा सकते हैं।

सर्किट हाउस में कल्याण सिंह के साथ अरविंद राजपूत

वीरांगना रानी अवंती वाई लोधी स्मारक समारोह समिति के अध्यक्ष अरविंद राजपूत ने बताया कि बाबू जी (कल्याण सिंह) का बरेली से गहरा नाता रहा है। जब वह भारतीय जनता पार्टी छोड़ रहे थे और अपनी पार्टी बनाने जा रहे थे। तब उससे पहले वह बरेली आए थे। राष्ट्रीय क्रांति पार्टी बनाने से पहले उन्होंने सर्किट हाउस में लोधी समाज के युवाओं के साथ मिलकर मंथन किया था। कहा था अब आप लोगों को कमान संभालनी है। हम सभी को आशीर्वाद दिया था।

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