लखनऊ: मंच पर छलक पड़े थे कल्याण सिंह की आँखों से आंसू, जताई थी ये बड़ी इच्छा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह बाबू जी नहीं रहे। शनिवार को उन्होंने 89 साल की उम्र में लखनऊ के एसजीपीजीआई में आखिरी सांस ली। उनके शरीर के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। उनके निधन से पूरे देश में शोक की लहर है। राजस्थान और हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल …
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह बाबू जी नहीं रहे। शनिवार को उन्होंने 89 साल की उम्र में लखनऊ के एसजीपीजीआई में आखिरी सांस ली। उनके शरीर के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। उनके निधन से पूरे देश में शोक की लहर है। राजस्थान और हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल रहे कल्याण सिंह ने अपना पूरा जीवन भाजपा को मजबूत करने में लगाया। एक बार पार्टी से नाराजगी भी हुई, लेकिन बाद में फिर वह वापस आ गए और सांसद भी बने। उनकी एक पुरानी बात हर किसी को याद है। एक बार उन्होंने एक मंच से भारतीय जनता पार्टी और संघ के प्रति अपने प्रेम को जाहिर किया था।
उन्होंने जनता को संबोधित करते हुए कहा था, संघ और भारतीय जनता पार्टी के संस्कार मेरे रक्त के बूंद-बूंद में समाए हुए हैं। मंच पर सम्बोधित करते समय उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े थे। उन्होंने कहा कि मेरी इच्छा है कि जीवन भर भाजपा में रहूं और जीवन का जब अंत होने का हो तो मेरा शव भी भारतीय जनता पार्टी के झंडे में लिपटकर जाए। कल्याण सिंह का जन्म 5 जनवरी 1932 को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ के अतरौली तहसील के मढ़ौली गांव में हुआ था। भाजपा के कद्दावर नेताओं में शुमार रहे कल्याण सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और राजस्थान के राज्यपाल भी रहे।
कल्याण राम मंदिर आंदोलन के सबसे बड़े चेहरों में से एक थे। उनकी पहचान हिंदुत्ववादी और प्रखर वक्ता की थी। कल्याण सिंह तीन बार यूपी के सीएम रहे। वह भाजपा के यूपी में पहले सीएम भी थे। पहले कार्यकाल में 24 जून 1991 से 6 दिसम्बर 1992 तक और दूसरी बार 21 सितंबर 1997 से 21 फरवरी 1998 तक सीएम रहे। अगले दिन 22 फरवरी 1998 को वे तीसरी बार मुख्यमंत्री बने और 12 नवंबर 1999 तक इस पद पर रहे। 30 अक्टूबर 1990 को जब मुलायम सिंह यादव यूपी के मुख्यमंत्री थे तो उन्होंने कारसेवकों पर गोली चलवा दी थी। प्रशासन कारसेवकों के साथ सख्त रवैया अपना रहा था। भाजपा ने मुलायम का मुकाबला करने के लिए कल्याण सिंह को आगे किया।
कल्याण सिंह भाजपा में अटल बिहारी वाजपेयी के बाद दूसरे नेता थे जिनका भाषण सुनने के लिए जनता सबसे ज्यादा बेताब रहती थी। 1999 में कल्याण सिंह और भाजपा के कुछ नेताओं के बीच मनमुटाव हो गया। नाराजगी में उन्होंने पार्टी छोड़ दी और 5 साल बाद फिर भाजपा में वापसी की। 2004 में वह भाजपा के टिकट पर बुलंदशहर से लोकसभा चुनाव लड़े और जीत हासिल की।इसके बाद वे फिर भाजपा छोडक़र चले गए और 2009 के लोकसभा चुनाव में जब लालकृष्ण आडवाणी प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार थे, तब कल्याण एटा से निर्दलीय सांसद चुने गए।
2014 लोकसभा चुनाव से पहले नरेंद्र मोदी और भाजपा के उत्तर प्रदेश प्रभारी अमित शाह तीसरी बार कल्याण सिंह को भाजपा में लाये। इसके बाद कल्याण सिंह को राजस्थान और हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल बनाया गया। कल्याण सिंह ने एक साल के अंदर ही भाजपा को उस मुकाम पर लाकर खड़ा कर दिया कि पार्टी ने 1991 में अपने दम पर यूपी में सरकार बना ली। इसके बाद कल्याण सिंह यूपी में भाजपा के पहले सीएम बने। सीबीआई में दायर आरोप पत्र के मुताबिक मुख्यमंत्री बनने के ठीक बाद कल्याण सिंह ने अपने सहयोगियों के साथ अयोध्या का दौरा किया और राम मंदिर का निर्माण करने की शपथ ली थी।
6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी ढांचा गिराए जाने के दौरान कल्याण सिंह यूपी के मुख्यमंत्री थे। उन्होंने कारसेवकों पर गोली चलाने की अनुमति नहीं दी । ढांचा गिराए जाने के बाद कल्याण ने इस्तीफा सौंप दिया था। कल्याण सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में शपथ पत्र देकर कहा था कि यूपी के सीएम के रूप में, वह मस्जिद को कोई नुकसान नहीं होने देंगे। बाबरी मस्जिद विध्वंस के लिए कल्याण सिंह को जिम्मेदार माना गया। कल्याण सिंह ने इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए 6 दिसंबर, 1992 को ही सीएम पद से इस्तीफा दे दिया।
दूसरे दिन केंद्र सरकार ने यूपी की भाजपा सरकार को बर्खास्त कर दिया। कल्याण सिंह ने उस समय कहा था कि ये सरकार राम मंदिर के नाम पर बनी थी और उसका मकसद पूरा हुआ। सरकार राममंदिर के नाम पर कुर्बान हुई। अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिराए जाने और उसकी रक्षा न करने के लिए कल्याण सिंह को एक दिन की सजा मिली। 5 अगस्त 2020 को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में राम मंदिर का शिलान्यास किया ,तब कल्याण सिंह अयोध्या जाना चाहते थे। तबियत खराब होने की वजह से नहीं जा सके। इसका गृह मंत्री अमित शाह से लेकर कई दिग्गज नेताओं से जिक्र भी किया।
