मुरादाबाद: रामगंगा नदी किनारे अवैध कब्जे पर गरजा बुलडोजर, अधिकारियों से हुई नोकझोंक
मुरादाबाद,अमृत विचार। रामगंगा नदी के डूब क्षेत्र में हुए अवैध कब्जे पर प्रशासनिक अफसरों ने कार्रवाई कर दी। बुधवार को बाढ़ नियंत्रण आयोग द्वारा चिह्नीकरण करने के बाद तीन विभागों के अफसरों व भारी फोर्स की मौजूगदगी में अवैध कब्जे पर बुलडोजर गरजा। अचानक हुई कार्रवाई से मौके पर अफरातफरी मच गई। क्षेत्रीय लोगों ने …
मुरादाबाद,अमृत विचार। रामगंगा नदी के डूब क्षेत्र में हुए अवैध कब्जे पर प्रशासनिक अफसरों ने कार्रवाई कर दी। बुधवार को बाढ़ नियंत्रण आयोग द्वारा चिह्नीकरण करने के बाद तीन विभागों के अफसरों व भारी फोर्स की मौजूगदगी में अवैध कब्जे पर बुलडोजर गरजा। अचानक हुई कार्रवाई से मौके पर अफरातफरी मच गई।

क्षेत्रीय लोगों ने इसका विरोध करते हुए हंगामा करना शुरू कर दिया। उनका दावा था कि यह प्लाट उन्होंने खरीदे हैं और इसकी रजिस्ट्री भी है। जिस पर अफसरों ने रजिस्ट्री की जांच करने की बात कह दी तो माहौल काफी गर्म हो गया। नोकझोंक बढ़ने पर पुलिस ने सभी को हड़काते हुए पीछे कर दिया।

इसके बाद जेसीबी ने एक-एक करके 20 स्थानों पर किए गए अवैध निर्माण को ढहा दिया। कार्रवाई की जद में आए अधिकतर भवन आधे-अधूरे बने थे या फिर प्लाट के चारों ओर बाउंड्री थी। हालांकि एक घर में रहने वाले लोगों को जब कार्रवाई की जानकारी हुई तो वह आनन-फानन में अपना सामान लेकर दूसरे स्थान पर भागने लगे। करीब तीन घंटे तक चली कार्रवाई के दौरान कई बार नोकझोंक और हंगामे की स्थिति बनी रही।

सिविल लाइंस क्षेत्र में चक्कर की मिलक का अधिकतर क्षेत्र रामगंगा नदी के किनारे बसा हुआ है। यही वजह है कि नदी का जल स्तर बढ़ने पर अधिकतर मकान बाढ़ की जद में आ जाते हैं। बताते हैं कि नदी के दोनों ओर करीब 75 मीटर का दायरा डूब क्षेत्र में आता है। इस क्षेत्र में किसी भी तरह का कच्चा या पक्का निर्माण कराना पूरी तरह से अवैध है। इस क्षेत्र की देखरेख की जिम्मेदारी बाढ़ नियंत्रण आयोग की होती है।

पिछले दिनों मंडलायुक्त आन्जनेय कुमार सिंह से शिकायत की गई थी कि डूब क्षेत्र में कुछ लोगों ने प्लाटिंग कर दी है और वहां पर निर्माण कार्य शुरू हो गया है। इसकी जानकारी होने पर मंडलायुक्त ने सिटी मजिस्ट्रेट एमपी सिंह की अध्यक्षता में एक टीम का गठन किया गया था। जिसमें बाढ़ नियंत्रण आयोग के अलावा नगर निगम के अफसरों का शामिल किया गया था। कुछ दिनों पहले टीम ने डूब क्षेत्र का निरीक्षण कर करीब 20 स्थानों पर हुए अवैध निर्माण को चिह्नित कर लिया था।
दोपहर को जेसीबी लेकर पहुंचे अफसर, मची अफरातफरी
चिह्निकरण के बाद सिटी मजिस्ट्रेट पूरी टीम के साथ जेसीबी लेकर मौके पर पहुंच गए। अफसरों ने सभी को चेतावनी देते हुए बने-अधबने निर्माण से अपना सामान हटाने की चेतावनी दी। अधिकारियों और जेसीबी को देखकर मौके पर भारी भीड़ जुट गई और उन्होंने हंगामा करना शुरू कर दिया। उन लोगों का कहना था कि उन्होंने प्लाट खरीदे हैं और उनकी रजिस्ट्री भी है। लेकिन अफसरों ने दो टूक इंकार करते हुए कार्रवाई को आगे बढ़ाया तो क्षेत्रीय लोग नोकझोंक करने के साथ ही हंगामा करने लगे। माहौल बिगड़ता देख पुलिस-पीएसी ने सभी को हड़काते हुए पीछे कर दिया। इसके बाद जेसीबी ने अवैध निर्माण को तोड़ना शुरु कर दिया। करीब तीन घंटे तक चली कार्रवाई के दौरान मौके पर अफरा-तफरी का माहौल रहा।
रजिस्ट्री करने वालों पर होगी एफआईआर
बताते हैं कि जब टीम मौके पर पहुंची तो कुछ महिलाएं प्लाट की रजिस्ट्री लेकर अफसरों के पास पहुंची। उन्होंने रजिस्ट्री दिखाने का प्रयास किया तो अफसरों ने साफ तौर पर कहा कि जब डूब क्षेत्र में निर्माण कराना अवैध है तो किस आधार पर उन्होंने निर्माण कार्य शुरू कराया। भविष्य में इस स्थान पर बांध बनाने की तैयारी है। डीलर से जमीन खरीदने की बात पर अफसरों ने कहा कि रजिस्ट्री की जांच कराई जाएगी। किसी को डूब क्षेत्र की रजिस्ट्री करने का अधिकार नहीं हैं। रजिस्ट्री करने वालों को तलाश कर उनके खिलाफ भी रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी।
घर से सामान निकालते नजर आए लोग
काफी मान-मनौव्वल के बाद भी जब अफसर नहीं माने तो लोग अपने घरों से सामान निकालने लगे। हालांकि एक घर में ही कुछलोग रह रहे थे जबकि कुछ खाली प्लाटों में सामान रखा हुआ था। अफसरों के तेवर देखकर सभी ने खामोशी से अपना सामान हटाकर दूसरे स्थान पर रखने लगे।

डूब क्षेत्र में किसी भी तरह का निर्माण कराना अवैध है। मंडलायुक्त के आदेश के बाद चिह्निकरण कर यह कार्रवाई की गई है। यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। एमपी सिंह,सिटी मजिस्ट्रेट
