बरेली: प्रस्ताव-प्रस्ताव खेल रहे अधिकारी, किला पुल और जर्जर हो रहा
बरेली, अमृत विचार। किला पुल की हालत लगातार जर्जर होती जा रही है। पुल की सड़क जगह-जगह से उधड़ चुकी है। भारी वाहन के गुजरने पर पुल हिलता है। रेलिंग भी टूट चुकी है। इससे हादसे का डर रहता है। पुल के एक्सपेंशन ज्वाइंट भी उखड़ऩे लगे हैं। बावजूद अफसर अब तक प्रस्ताव-प्रस्ताव ही खेल …
बरेली, अमृत विचार। किला पुल की हालत लगातार जर्जर होती जा रही है। पुल की सड़क जगह-जगह से उधड़ चुकी है। भारी वाहन के गुजरने पर पुल हिलता है। रेलिंग भी टूट चुकी है। इससे हादसे का डर रहता है। पुल के एक्सपेंशन ज्वाइंट भी उखड़ऩे लगे हैं। बावजूद अफसर अब तक प्रस्ताव-प्रस्ताव ही खेल रहे हैं। शासन के निर्देश पर सेतु निगम ने एक बार फिर प्रस्ताव बनाकर भेज दिया है। हालांकि, हाल-फिलहाल में पुल का निर्माण तो नहीं होगा लेकिन लोगों में एक उम्मीद फिर जग गई है।
लगभग चार दशक पूर्व इस पुल का निर्माण हुआ था। जिसके बाद अब पुल अपनी आयु पूरी कर चुका है। निर्माण से संबंधित कई विभाग इसके पुन:निर्माण की जरूरत बता चुके हैं। बावजूद पुल पर सरपट भागती गाड़ियों की तादाद आए दिन बढ़ रही है। पीडब्ल्यूडी के अंर्तगत आने वाले इस पुल का खुद पीडब्ल्यूडी सहित सेतु निगम, नगर निगम कई सर्वे कर चुका है लेकिन धरातल पर मरम्मत कार्य अभी तक नहीं दिख रहा है। विभागीय अधिकारियों की शिथिलता ही कहेंगे कि पुल की मरम्मत का प्रस्ताव कई बार भेजा गया लेकिन पुल की जर्जर हालत में सुधार नहीं किया गया।
दिल्ली और लखनऊ को शहर से जोडऩे वाला पुल
शहर के अंदर किला रेलवे क्रॉसिंग के पुल का निर्माण वर्ष 1980 में हुआ था। यह शहर का पहला पुल है जो दिल्ली और लखनऊ हाईवे को शहर से जोड़ता है। इसी पुल से होकर तमाम वाहन शहर में आते-जाते हैं। बड़ा बाईपास बनने के बावजूद आज भी शहर के अंदर आने वालों के लिए यह प्रमुख मार्ग है। इस पुल के निर्माण से शहरवासियों को काफी सहूलियत हुई थी।
वाहनों के नीचे गिरने का रहता है भय
पुल की सड़क पर कोलतार डालते-डालते अब सड़क भी फुटपाथ के बराबर ऊंचाई तक पहुंच गई है। इससे कब वाहन फुटपाथ पर पहुंचकर किनारे पर आ जाएं, यह डर रहता है। यही हाल रोड किनारे पर लगे रेड एंगल का भी है। यह कई जगह से क्षतिग्रस्त हो चुकी है। इसलिए यहां से वाहनों के नीचे गिरने का डर बना रहता है। यहां तक कि विभागीय लापरवाही के कारण पुल के सीबीगंज की ओर से आने वाले सिरे पर शुरुआत में ही बाईं तरफ सड़क पर गहरा गड्ढा हो चुका है। इस कारण कभी भी बड़ी दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
पीडब्ल्यूडी ने बनाया था एस्टीमेट, सेतु निगम ने किया सर्वे
पुल की मरम्मत के लिए पीडब्ल्यूडी ने करीब एक करोड़ रुपये का एस्टीमेट तैयार कर शासन को भेजा था, जो तकनीकी कारणों से स्वीकृत नहीं हुआ। फिलहाल, पुल की मरम्मत के लिए सेतु निगम ने प्रस्ताव तैयार कर भेजा है। इसमें पुल की सतह, रेलिंग, एक्सपेंशन ज्वाइंट आदि की मरम्मत की जानी है। सेतु निगम के लखनऊ कार्यालय ने टीम भेजकर पुल का सर्वे कराया गया है।
पुल की मरम्मत के लिए अन्य विभागों के साथ संयुक्त रूप से सर्वे कराया गया है। उम्मीद है कि प्रस्ताव पर जल्द ही स्वीकृति मिल जाएगी। इसके बाद मरम्मत कार्य शुरू करा दिया जाएगा। -बीके सेन, उप परियोजना प्रबंधक, सेतु निगम
