बरेली: देश और समाज के अनुरूप हो महिला सशिक्तकरण
बरेली, अमृत विचार। सतत महिला सशक्तिकरण, एक नई संकल्पना है। महिला सशक्तिकरण पर आज पूरा विश्व बात कर रहा है और नए-नए प्रयोग किए जा रहे हैं। महिला सशक्तिकरण ऐसा होना चाहिए जो देश, समाज और काल के अनुरूप हो। यह कहना है कि एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय की मानिवकी विभाग की प्रमुख एसो. प्रो. डा. …
बरेली, अमृत विचार। सतत महिला सशक्तिकरण, एक नई संकल्पना है। महिला सशक्तिकरण पर आज पूरा विश्व बात कर रहा है और नए-नए प्रयोग किए जा रहे हैं। महिला सशक्तिकरण ऐसा होना चाहिए जो देश, समाज और काल के अनुरूप हो। यह कहना है कि एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय की मानिवकी विभाग की प्रमुख एसो. प्रो. डा. अनीता त्यागी का। उन्होंने इस विषय पर कॉपीराइट कराया है। वह इस पर किताब भी लिख रही हैं।
उन्होंने बताया कि हर देश के अपने मूल्य और अपनी संस्कृति होती है और हर देश में महिलाओं की सामाजिक और आर्थिक स्थिति भिन्न है इसलिए हम किसी भी देश की महिला सशक्तिकरण के माडल को अपने देश में लागू कर अपेक्षित परिणाम प्राप्त नहीं कर सकते हैं। यदि हम भारत जैसे देश की बात करें जो हमेशा से ही अपने आदर्शों, मूल्यों और परम्पराओं में दुनिया में अपनी अलग ही पहचान रखता है। भारत की संस्कृति और सभ्यता बहुत प्राचीन और उन्नत रही है, जहां महिला पहले से ही बहुत सशक्त रही हैं। हमें अपने ग्रंथों, पुराणों और प्राचीन शास्त्रों में इसके प्रमाण मिलते हैं।
महिला सशक्तिकरण का एक ही मॉडल सभी देशों के लिए उपयुक्त होगा ऐसा नहीं है। भारत ने भी महिला सशक्तिकरण के लिए जो मॉडल अपनाए वो पश्चिमी सभ्यता से प्रेरित होते हैं। सस्टेनवल वूमेन इंपावरमेंट का मतलब ऐसा सशक्तिकरण, जिसमें महिला अपनी गरिमा, भारतीय मूल्यों और आदर्श तथा अपनी संस्कृति के साथ सशक्त बने। भारत को अपना मॉडल विकसित करना चाहिए। अभी इस ओर विचार करने की आवश्यकता है।
