बरेली: राष्ट्रीय पोषण माह- 47 हजार बच्चे कुपोषित, कैसे मिले कुपोषण से मुक्ति
बरेली, अमृत विचार। प्रत्येक वर्ष सितंबर के महीने में राष्ट्रीय पोषण माह मनाया जाता है। इसका मकसद कुपोषण मिटाना होता है, लेकिन बाल विकास परियोजना में भ्रष्टाचार के कारण कुपोषण से मुक्ति दिलाने के लिए सरकार के सभी प्रयास बेमानी साबित हो रहे हैं। केंद्रों पर नि:शुल्क में बांटा जाने वाला पुष्टाहार ब्लैक कर दिया …
बरेली, अमृत विचार। प्रत्येक वर्ष सितंबर के महीने में राष्ट्रीय पोषण माह मनाया जाता है। इसका मकसद कुपोषण मिटाना होता है, लेकिन बाल विकास परियोजना में भ्रष्टाचार के कारण कुपोषण से मुक्ति दिलाने के लिए सरकार के सभी प्रयास बेमानी साबित हो रहे हैं। केंद्रों पर नि:शुल्क में बांटा जाने वाला पुष्टाहार ब्लैक कर दिया जाता है। इससे कुपोषण समाप्त नहीं हो पा रहा है। यही वजह है कि जिले में 47 हजार से अधिक बच्चे कुपोषित हैं। इनमें 6582 अतिकुपोषित हैं। इससे साफ है ‘पोषण’ पर कुपोषण भारी है।
मंगलवार को जिले में राष्ट्रीय पोषण दिवस मनाया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में इसको लेकर कार्यक्रम आयोजित किए गए। वहीं, सरकार भी शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए तमाम योजनाएं चला रही है। इस पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च किये जाते हैं लेकिन जनपद की बात करें तो बड़ी संख्या में बच्चे कुपोषण के शिकार हैं।
पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में भर्ती अति कुपोषित बच्चों को देखकर तो मन कांप जाता है। कई बच्चों के हाथ-पैर बेजान नजर आते हैं तो कमजोरी के कारण कुछ खड़े हो पाने की स्थिति में भी नहीं हैं। आंकड़ों के अनुसार जनपद में 6582 अति कुपोषित एवं 40731 कुपोषित बच्चे हैं। दिसंबर 2020 में अतिकुपोषित बच्चों की संख्या करीब सात हजार और कुपोषित बच्चों की संख्या 33159 थी। यानी पिछले आठ महीने में कुपोषण के आंकड़ों में बढ़ोत्तरी हुई है।
इस तरह होता है पोषाहार वितरण में गड़बड़झाला
सरकार ने पोषाहार वितरण में मिल रही गड़बड़ियों की शिकायत पर नई व्यवस्था शुरू की थी। इसके तहत अब बच्चों को दाल, चना, देसी घी समेत अन्य पोषाहार उपलब्ध कराए जाते हैं। सूत्रों की मानें तो ब्लाक स्तर पर बाल विकास परियोजना कार्यालय से कई पोषाहार का आवंटन आंगनबाड़ी केंद्रों को किया जाता है। इसके बाद आंगनबाड़ी और सहायिका मिलकर बच्चों को बांटा जाने वाले पुष्टाहार को ब्लैक कर देती हैं। जिला महिला चिकित्सालय में भी दस बेड का पोषण पुर्नवास केंद्र है। कई बार ऐसे हालात पैदा हो जाते हैं कि यहां बेड कम पड़ जाते हैं।
वजन तौल अभियान भी सिर्फ दिखावा
बाल विकास परियोजना विभाग की तरफ से हर छह महीने में अभियान चलाकर छह महीने से पांच साल के बच्चों का वजन कराया जाता है। इसमें मानक तय हैं और चार्ट भी बना हुआ है। अनुपात में जिन बच्चों का वजन कम होता है उनको कुपोषण की श्रेणी में रखा जाता है। ज्यादा गंभीर होने पर एनआरसी में पीड़ित बच्चों को भर्ती कराया जाता है। वर्ष 2018 से हर सितंबर माह पोषण माह के रूप में मनाया जाता है। इसके बाद भी कुपोषण बच्चों का पीछा नहीं छोड़ रहा। या यूं कहें कि जिम्मेदारों की सभी कोशिशें नाकाम साबित हो रही है।
राष्ट्रीय पोषण माह के तहत जिले में एक सप्ताह तक जिलेभर में कुपोषण दूर करने को अभियान चलाया जाना है। एक से दो दिन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लखनऊ से कार्यक्रम की शुरुआत करेंगे। इसके बाद जिला व ब्लाक मुख्यालय पर कार्यक्रम आयोजित होंगे। इसकी तैयारियां पूरी कर ली गई है। -डा. आरबी सिंह, डिप्टी डायरेक्टर, बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग
ब्लाक अतिकुपोषित कुपोषित
भोजीपुरा 386 2615
बिथरीचैनपुर 294 1955
शेरगढ़ 296 3172
बहेड़ी 412 1523
भुता 300 2950
दमखोदा 388 1669
भदपुरा 292 2438
सदर 254 1345
फतेहगंज 295 1949
मीरगंज 214 2367
नवाबगंज 873 3032
क्यारा 311 1358
रामनगर 325 3045
फरीदपुर 631 2942
आलमपुर जाफराबाद 850 3825
मझगवां 461 4546
कुल 6582 40731
