लखनऊ: वन विभाग में भर्ती के नाम पर करोड़ों ठगे, तीन गिरफ्तार
लखनऊ। वन विभाग में फर्जी भर्ती निकालकर भर्ती के नाम पर करोड़ों रुपये ठगने वाले गिरोह का एसटीएफ ने धर दबोचा। इसमें गिरोह के सरगना समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। सरगना वन विभाग के पलिया रेंज में संविदा कंप्यूटर संचालक की नौकरी कर चुका है और वन विभाग का कन्जर्वेटर बनकर यह …
लखनऊ। वन विभाग में फर्जी भर्ती निकालकर भर्ती के नाम पर करोड़ों रुपये ठगने वाले गिरोह का एसटीएफ ने धर दबोचा। इसमें गिरोह के सरगना समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। सरगना वन विभाग के पलिया रेंज में संविदा कंप्यूटर संचालक की नौकरी कर चुका है और वन विभाग का कन्जर्वेटर बनकर यह गिरोह चलाता था। एसटीएफ प्रवक्ता ने बताया कि लंबे समय से विभिन्न सरकारी विभागोें मे फर्जी भर्ती निकालकर व कूटरचित नियुक्ति पत्र, परिचय पत्र से ठगी की सूचनाएं मिल रही थीं। साइबर टीम और खूफिया तंत्र इनकी तलाश में जुटा था।
इस बीच सीतापुर निवासी रामगोपाल तिवारी ने अपने पुत्र और रिश्तेदारों से हुई ठगी का मुकदमा हजरतगंज थाने में दर्ज कराया। गिरोह ने उनसे व रिश्तेदारों से वन दारोगा व वनरक्षक के पद पर भर्ती कराने के नाम से 36 लाख रुपये ठग लिए थे। खूफिया जानकारी के आधार पर गुरुवार रात करीब 22ः45 बजे उप निरीक्षक पंकज सिंह के नेतृत्व में साइबर क्राइम टीम एसटीएफ व थाना हजरतगंज पुलिस की संयुक्त टीम ने 290 इन्दिरा नगर में छापा मारा। जहां से गिरोह सरगना सीतापुर निवासी शिवम मेहरोत्रा, बाराबंकी निवासी आनन्द कुमार सिंह और अम्बेडकर निवासी परीक्षित पाण्डेय को गिरफ्तार किया गया।
यह सामग्री हुई बरामद
आरोपियों के कब्जे से 11 एटीएम कार्ड, पांच मोबाइल,45 उपस्थित सूचना प्रार्थना पत्र, 50 परिचय पत्र के लिए आवेदन पत्र, 56 कूटरचित नियुक्ति पत्र के अलावा बड़ी संख्या में अन्य कागजात। वन विभाग की तीन मुहर, वन विभाग का मोनेाग्राम छपे 77 लिफाफे, 396 मार्कशीट, आधार व परिचय पत्र की छायाप्रति। 90 भिन्न प्रकार के फर्जी आदेशों की प्रतियां। ठगी के रुपयों से खरीदी गई गाड़ी।
संविदा की नौकरी छूटी तो शुरू की ठगी
पूछताछ में गिरोह के सरगना शिवम मेहरोत्रा ने बताया कि वर्ष 2017 में पलिया रेंज में उसकी नियुक्ति संविदा कम्प्यूटर आपरेटर के पद पर हुई थी। वर्ष 2017 में ही पलिया रेंज मे फाॅरेस्ट गार्ड की भर्ती हुई थी, जिनके नियुक्ति पत्र जारी हुए थे। उनकी एक प्रति उसने रख ली थी। वर्ष 2018 में जब उसे हटाया गया तो वह नौकरी के लिए लखनऊ आया। यहां कैसरबाग स्थित क्वीक मैनपावर कन्सेलटेंसी के आफिस में बेरोजगार अरबिंद यादव से मुलाकात हुई। दोनों को नौकरी नहीं मिली तो दोनों ने ठगी का रास्ता पकड़ लिया। इसके बाद अरविन्द के जरिए आनन्द सिंह, परीक्षित पाण्डेय, देवेन्द्र पाण्डेय व विजय सिंह भी गिरोह से जुड़े।
इसके बाद गिरोह वन विभाग में भर्तियां निकालने लगा और 2018 से अब तक 35-40 लोगों को फर्जी नियुक्ति पत्र देकर लगभग एक करोड़ रुपये ठगे। वन दारोगा के लिए तीन लाख और वन रक्षक के लिए डेढ़ लाख रुपये यह लोग लेते थे। अलग अलग रेंज के अनुसार अरविन्द यादव आनन्द सिंह, परीक्षित पाण्डेय, देवेन्द्र पाण्डेय व विजय सिंह हस्ताक्षर बनाकर कन्डीडेटों को नियुक्ति पत्र देते थे। गिरोह के लोग उसे कन्जरवेटर बताकर उनका परिचय कराते थे ,जिससे लोग फंस जाते थे। शिवम ने राम गोपाल तिवारी से ठगी की बात भी स्वीकार की।
