बरेली: जिले में 100 साल से अधिक पुराने पेड़ों का वन विभाग नहीं कर रहा संरक्षण
बरेली, अमृत विचार। प्रदेश सरकार ने बीते साल कॉफी टेबल बुक तैयार करने के लिए 100 साल से ज्यादा पुराने पेड़ों की सूची वन विभाग से मांगी थी। इन पेड़ों को विरासत वृक्ष घोषित करते हुए संरक्षित करने के निर्देश दिए गए थे मगर इनके संरक्षण को लेकर विभाग की कवायदें सिफर रहीं। जिले में …
बरेली, अमृत विचार। प्रदेश सरकार ने बीते साल कॉफी टेबल बुक तैयार करने के लिए 100 साल से ज्यादा पुराने पेड़ों की सूची वन विभाग से मांगी थी। इन पेड़ों को विरासत वृक्ष घोषित करते हुए संरक्षित करने के निर्देश दिए गए थे मगर इनके संरक्षण को लेकर विभाग की कवायदें सिफर रहीं। जिले में अब भी चंद ऐसे पेड़ बचे हैं जो लोगों को घनी छांव तो दे ही रहे हैं। इनका ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व भी है।
वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक केवल बरेली शहर में 4 जगह और पूरे जनपद में 32 ऐसे पेड़ चिन्हित किए गए हैं जो अपनी उम्र के 100 से अधिक बसंत देख चुके हैं। मंडल में ऐसे पेड़ों की संख्या करीब 71 है, जिनको संरक्षित करने का जिम्मा वन विभाग पर है।
विभाग ने एक सूची तैयार कर शासन को भेजी थी जिसमें कमिश्नर कार्यालय का लगभग 130 साल पुराना बरगद का पेड़, संजय कम्युनिटी हॉल के पीछे 105 साल पुराना पीपल का पेड़, कंथरिया गांव में हनुमान मंदिर के पास मौजूद 105 साल पुराना बरगद का पेड़, कैंट क्षेत्र स्थित जनरल साहब की कोठी के सामने 139 साल पुराना बरगद का पेड़ समेत पूरे जिले में करीब 32 पेड़ों को चिह्नित किया गया था। इनमें बरगद और पीपल के पेड़ों की संख्या सबसे अधिक है। कई पीपल के पेड़ ऐसे भी हैं जिनकी लोग पूजा भी करते हैं।
हार्मोनल ट्रीटमेंट से हो सकता है संरक्षण
संजय कम्युनिटी हॉल के पीछे मौजूद पीपल का पेड़ एक बड़े हिस्से को छांव दे रहा है। पेड़ के पास एक मंदिर भी मौजूद है। मान्यता है कि सैकड़ों सालों से लोग इसी तरह पीपल के इस पेड़ की पूजा कर रहे हैं। आस्था का केंद्र यह पेड़ इतना विशाल हो चुका है कि अब इसकी टहनिया झुंकने तक लगी हैं। पेड़ के संरक्षण के लिए क्या किया, इसके जवाब में वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि हार्मोनल ट्रीटमेंट के अलावा कोई इलाज नहीं। पेड़ का हार्मोनल ट्रीटमेंट किया गया या नहीं इस जवाब भी विभाग के अधिकारियों के पास नहीं है।
अंग्रेजों ने पेड़ पर दी थी क्रांतिकारियों को फांसी
कमिश्नरी कार्यालय में मौजूद बरगद के पेड़ की अनुमानित आयु 130 साल है। इसका ऐतिहासिक महत्व इसलिए भी है क्योंकि अंग्रेजों के शासनकाल में इस पेड़ पर सैकड़ों क्रांतिकारियों को फांसी पर लटका दिया गया था। बरगद के इस पेड़ को विरासत वृक्ष मानते हुए वन विभाग के अधिकारियों को संरक्षण का जिम्मा दिया गया था। हालांकि यह पेड़ आज भी कमिश्नर कार्यालय में आने वाले फरियादियों को छांव देता है।
ग्रामीणों को छांव देता है कंथरिया का वट वृक्ष
बिथरी चैनपुर के कंथरिया गांव में हनुमान मंदिर के पास मौजूद बरगद का पेड़ करीब 105 साल पुराना है। गांव के बुजुर्ग धर्मपाल सिंह बताते हैं कि इस पेड़ की छांव में ही बड़े हुए। गांव के लोगों के लिए मंदिर के आगे पड़ी जमीन पेड़ के कारण घर के आंगन जैसी है। स्थानीय निवासी नीटू सिंह ने कहा कि यह पेड़ संरक्षित रहे इसके लिए वन विभाग को कदम उठाने चाहिए। अक्सर गांव के लोग घनी दोपहरी में इस वट वृक्ष की छांव में आकर घंटों बैठे रहते हैं।
पुराने पेड़ों के संरक्षण के लिए सामान्य कार्यवाही करनी है। बस यह ध्यान रखना है कि कोई इन पेड़ों को नुकसान न पहुंचाए। संरक्षण के लिए कोई अलग से व्यवस्था नहीं करनी है। कॉफी टेबल बुक के लिए शासन ने पेड़ों की तस्वीरें मांगी थी। -ललित कुमार वर्मा, मुख्य वन संरक्षक
