सीतापुर: अपनी ही चौकी से डरते हैं पुलिसकर्मी, बताई ये बड़ी वजह
सीतापुर। जिला मुख्यालय से तकरीबन 40 किलो मीटर दूर सकरन थाने की महाराज नगर पुलिस चौकी से पुलिस वाले ही खौफ खाते हैं। उनके डर की कोई खास वजह नहीं है, बल्कि किराए के भवन में संचालित इस पुलिस चौकी की जर्जर हालत ही डर की वजह बनी हुई है। चौकी भवन की छत से …
सीतापुर। जिला मुख्यालय से तकरीबन 40 किलो मीटर दूर सकरन थाने की महाराज नगर पुलिस चौकी से पुलिस वाले ही खौफ खाते हैं। उनके डर की कोई खास वजह नहीं है, बल्कि किराए के भवन में संचालित इस पुलिस चौकी की जर्जर हालत ही डर की वजह बनी हुई है। चौकी भवन की छत से पानी टपकता है। दीवारों में दरारें हैं। दीवारों का प्लास्टर टूट कर खुदबखुद गिरता है। दो कमरों और एक बरामदें में चल रही यह पुलिस चौकी कब भरभरा कर ढह जाए, इसका कोई पता नहीं। इस पुलिस चौकी में बैठकर काम करने वाले पुलिस कर्मियों की जान हर वक्त जोखिम में रहती है।
जोखिम भरे माहौल में काम करने वाले पुलिस कर्मियों में डर बना रहता है। यहां तैनात पुलिस स्टाप अनुशासित महकमे के जिम्मेदार होने के नाते अपनी आवाज बुलंद करने से भी हिचकते हैं। ऐसी स्थित में पुलिस कर्मियों को इस जर्जर भवन में डयूटी करनी पड़ रही है। पुलिस कर्मियों के डर का आलम यह है कि रात को पुलिस कर्मी यहां रूकने से कतराते हैं। दिन में किसी तरह काम चलाते हैं। शायद यही वजह है कि यहां तैनात पुलिस स्टाप के लोगों ने सोने के लिए गांव में किराए पर कमरे ले रखे हैं।
डयूटी से छूटने के बाद पुलिस कर्मी अपने किराए के कमरों में जाकर सोते हैं। खास बात यह है कि मातहतों को लेकर संजीदगी दिखाने का दावा करने वाले पुलिस के आला अफसर भी इस पुलिस चौकी पर तैनात पुलिस कर्मियों की खैर-खबर नहीं लेते। अक्सर देखा जाता है कि पुलिस अधिकारी चौकियों पर जाकर विजिट करते हैं। वहां के भवन का निरीक्षण कर उनको दुरस्त कराने के निर्देश देते हैं, लेकिन सकरन थाने की महाराजनगर पुलिस चौकी को लेकर आला अफसर भी संजीदगी नहीं दिखा रहे।
मात्र साठ रुपए प्रतिमाह किराए पर चल रही पुलिस चौकी
पुलिस सूत्र व स्थानीय जानकार बताते हैं कि सकरन थाने की महाराजनगर पुलिस चौकी करीब चालीस साल से मस्जिद के भवन में कराए पर चल रही है। यह भवन साठ रुपए प्रतिमाह किराए पर लिया गया है। बेहद कम किराया होने के कारण भवन के जिम्मेदार भी इसको दुरुस्त कराने में दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं और भवन किराए का होने के नाते पुलिस विभाग भी भवन के दुरुस्तीकरण को लेकर कुछ नहीं कर रहा है। ऐसे में इस चौकी पर तैनात पुलिस वालों की जान जोखिम में पड़ी है।
पुलिस चौकी के नाम आवंटित हो चुकी है जमीन
ऐसा नहीं है कि महाराजनगर पुलिस चौकी किराए पर लिए जर्जर भवन में संचालित होने की कोई मजबूरी है। पुलिस चौकी के लिए बाकायदा ग्राम पंचायत की सरकारी जमीन कई वर्ष पूर्व आवंटित हो चुकी है। पुलिस विभाग चाहे तो आवंटित भूमि पर कभी भी पुलिस चौकी का बेहतरीन भवन खड़ा हो सकता है, लेकिन माना जा रहा है कि विभाग इसमें दिलचस्पी नहीं ले रहा है। सूत्र बताते हैं कि थाने के एक तत्कालीन थानाध्यक्ष ने इस पुलिस चौकी का निर्माण कराने की पहल शुरू की थी। बाकायदा कुछ निर्माण सामग्री भी मंगा ली गई थी, लेकिन इसी बीच उनका स्थानांतरण हो गया। जिसके बाद से यह कार्य ठंडे बस्ते में चला गया।
पुलिस चौकी निर्माण की चल रही कोशिशें
सकरन थाने की महाराजनगर की जर्जर पुलिस चौकी को लेकर क्षेत्राधिकारी बिसवां सुशील कुमार का कहना है कि पुलिस चौकी निर्माण को लेकर उच्चाधिकारियों से वार्ता चल रही है। पुलिस चौकी को दुरुस्त कराने व निर्माण की प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही इसको बनवाने का प्रयास किया जाएगा।
