बरेली: गरीबों के आवास न बनाने वाले बिल्डर का निरस्त किया भू-उपयोग
बरेली, अमृत विचार। गरीबों को सस्ते आवास बनाकर देने के लिए एक ठेका लेने वाली जिस संस्था को भूमि का आवंटन किया गया था, उसके इस आवासीय परियोजना में शामिल न होने से उसके भूमि उपयोग का परिवर्तन निरस्त कर दिया गया है। इस भूमि को बीडीए ने पहले प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गरीबों …
बरेली, अमृत विचार। गरीबों को सस्ते आवास बनाकर देने के लिए एक ठेका लेने वाली जिस संस्था को भूमि का आवंटन किया गया था, उसके इस आवासीय परियोजना में शामिल न होने से उसके भूमि उपयोग का परिवर्तन निरस्त कर दिया गया है। इस भूमि को बीडीए ने पहले प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गरीबों के लिए किफायती मकान देने के लिए उनके भू-उपयोग का परिवर्तन कराया था।
बीडीए के अधिकारियों का कहना है कि संबंधित संस्था को भू-उपयोग का परिवर्तन तो करा दिया गया था लेकिन आवासीय योजना ही स्वीकृत न होने से बीडीए को गरीबों को सस्ते आवास उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत निजी क्षेत्र की सहभागिता से अफोर्डेबल हाउसिंग इन पार्टनरशिप योजना के माध्यम से बिल्डरों के साथ काम करना था।
पीपीडी मोड यानी पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप से शहर में चार जगहों पर करीब 2344 आवासों के निर्माण शुरू कराए जाने थे लेकिन इसमें मैसर्स जेएम फैब्रीटेक जेवी को शामिल करते हुए बीडीए ने इस संस्था को जिस जगह पर आवासों के निर्माण कराने थे, उसका कृषि भू-उपयोग से परिवर्तन कर आवासीय में कर दिया गया था, ताकि आवासीय योजना को आगे बढ़ाया जा सके लेकिन यह संस्था बाद में इस योजना से बाहर हो गई। बीडीए का कहना है कि गरीबों के लिए आवासीय योजना शुरू करने के लिए जमीन का भू-उपयोग बदला गया था लेकिन इस संस्था ने काम नहीं किया इसलिए सुविधा वापस लेते हुए उनके भू-उपयोग का भी निरस्तीकरण कर दिया गया है।
तीन साल बाद भी नहीं मिला बजट, बिल्डरों ने आवासीय योजना से खड़े किए हाथ
गरीबों को सस्ते आवास देने के लिए बीडीए और बिल्डरों को मिलकर चार हजार प्रधानमंत्री आवास बनाकर देने हैं। बीडीए ने रामगंगा आवासीय योजना में 254 भवनों के निर्माण खुद कराए हैं। इसमें 224 का आवंटन भी हो चुका है। बाकी का लक्ष्य पूरा करने के लिए निजी निर्माण एजेंसियों को 2344 अवास बनाने का कांट्रेक्ट दिया गया था। इसमें एक बिल्डर को 364, दूसरे को 1500 और तीसरे को 480 आवासों का निर्माण करना हैं।
यहां दिक्कत ये है कि इन आवासों के लिए लाभार्थी ही ढूंढे नहीं मिल रहे हैं। इसलिए बीडीए अधिकारियों ने केवल 2344 आवास ही बनाने का फैसला लिया है। अन्य आवासों के निर्माण की फिलहाल कोई प्लानिंग नहीं है। बिल्डरों का कहना है कि वर्ष 2019 में आवासीय योजना के लिए शासन से पहली किस्त मिली थी, उसके बाद से बजट ही नहीं मिला है। ऐसे में बिल्डरों ने योजनाएं अधूरी छोड़कर बाकी आवास बनाने से हाथ खड़े कर दिए हैं।
पहले इंफ्रा स्ट्रक्चर को लेकर उपजे विवाद से रुक गया था निर्माण
सस्ते आवास बनवा रहे बिल्डर्स और बीडीए के बीच पहले यह पेच फंस गया कि आवासीय कॉलोनियों में बिजली, पानी, सड़क सहित दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर कौन पूरे कराकर देगा। निर्माण एजेंसियों का कहना था कि सरकार ने उन्हें केवल आवास बनाने का कांट्रेक्ट दिया है, जबकि बीडीए के अधिकारियों का कहना था कि बिल्डर्स को ही जरूरी सुविधाएं भी मुहैया करानी हैं।
इस पर सहमति न बनने पर पूर्व में तैनात रहीं बीडीए उपाध्यक्ष दिव्या मित्तल ने करीब दो साल पहले तीनों निर्माण एजेंसियों के खातों के संचालन पर रोक लगा दी थी। इससे इन खातों में आवास बनाने के लिए शासन से जारी हुई करीब चार करोड़ की रकम डंप हो गई थी। बाद में बिल्डरों के तैयार हो जाने के बाद करीब एक महीने के बाद खातों से रोक हटाई गई।
बिल्डरों को बजट न मिल पाने से दिक्कत हो रही है। इससे आवासीय योजना पूरा करने में अड़चन पैदा हो रही है। हालांकि जल्द ही बिल्डरों को बजट की दूसरी किस्त मिलने की उम्मीद की जा रही है। -जोगिंदर सिंह, बीडीए उपाध्यक्ष
